28 महिला अफसर को 12 सितंबर तक सेना छोड़ने का आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। इंडियन आर्मी में महिला अधिकारियों की परमानेंट कमिशन की लड़ाई अब भी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आर्मी ने 615 महिला अधिकारियों के लिए परमानेंट कमिशन का स्पेशल बोर्ड बैठाया था, जिनमें से कई को परमानेंट कमिशन दे दिया गया है। लेकिन जिन महिला अधिकारियों को परमानेंट कमिशन नहीं मिला है उनका आरोप है कि आर्मी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह पालन नहीं किया। आर्मी की 28 महिला अधिकारियों ने अब आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल से न्याय की गुहार की है। इन महिला अधिकारियों को आर्मी ने 12 सितंबर तक आर्मी छोड़ने का आदेश दिया है। 23 अगस्त को आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में इसकी सुनवाई है।

सर्विस के लिए अनफिट नहीं

एक महिला अधिकारी ने कहा कि आर्मी ने परमानेंट कमिशन देने में हमारी सर्विस के शुरू के पांच साल को ही कंसीडर किया और उस ग्राउंड पर परमानेंट कमिशन देने से मना कर दिया। जबकि ओवर ऑल प्रोफाइल के हिसाब से कंसीडर किया जाना चाहिए था। हम आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में इसी अपील के साथ गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे रेकॉर्ड को देखते हुए हमें पहले पांच साल की सर्विस के बाद एक्सटेंशन मिला और फिर 10 साल की सर्विस के बाद एक्सटेंशन मिला। अगर हम सर्विस के लिए अनफिट होते तो यहां तक भी नहीं पहुंचते।

20 साल से ज्यादा की सर्विस

जिन 28 महिला अधिकारियों ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में अपील की है उनमें से ज्यादातर की 20 साल से ज्यादा की सर्विस हो गई है। महिला अधिकारी ने बताया कि 100 महिला अधिकारी हैं जिन्हें आर्मी ने परमानेंट कमिशन नहीं दिया है। 72 का रिजल्ट अलग अलग आधार पर रोका गया है और हम 28 महिला अधिकारियों को आर्मी छोड़ने के लिए 12 सितंबर का ही वक्त दिया गया है। 14 जुलाई को बोर्ड का रिजल्ट आया और आर्मी ने 15 जुलाई को लेटर जारी कर दिया कि 12 सितंबर तक आर्मी छोड़ दें।