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एनकाउंटर से भयभीत हुए सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर, जानिए दबंगों के पुलिस के आगे सरेंडर की कहानी

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इंदौर। तीन दिन पहले विजय नगर स्थित सिंडिकेट ऑफिस में हुए गोलीकांड के बाद से फरार चल रहे गैंगस्टर सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया, जबकि आरोपी हेमू ठाकुर सहित अन्य पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को भोपाल बायपास से पकड़कर इंदौर लाया गया। गोलीकांड के बाद से ये सभी आरोपी फरार काट रहे थे। इस दौरान वे राजस्थान, दिल्ली, ग्वालियर और अन्य स्थानों तक पहुंच गए, उसके बाद पुलिस ने भोपाल बायपास से गिरफ्तारी करना बताया गया। हालांकि इंदौर लाने के बाद ज्यादा पूछताछ तो नहीं हुई, लेकिन विवाद का मुख्य कारण गांधी नगर स्थित शराब दुकान पर लगी स्व. वीरेंद्र सिंह ठाकुर की फोटो फेंकने का सामने आया। फिलहाल पुलिस गुरुवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी। वहीं तीसरा आरोपी अभी फरार है, जिसको दबोचने के लिए पुलिस ने पांच से छह टीम रवाना की है।

तीसरे आरोपी की तलाश

गौरतलब है कि सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर के सरेंडर के बाद अब तीसरे आरोपी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इन दोनों आरोपियों के जल्दी पकड़े जाने के पीछे पुलिस का दवाब काम आया, गोलीकांड के बाद से यह लोग फरार थे, तभी से परिजनों पर दवाब बनाया, कुछ साथियों को भी हिरासत में लिया। साथ ही संपत्तियों की जांच और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी नेपाल भागने की तैयारी में थे, पर फरारी के बाद से ही यह कहीं भी नहीं रुके। पहले राजस्थान, फिर दिल्ली इसके बाद ग्वालियर तक पहुंचे। पुलिस से अनुसार गुरुवार को इन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगा जाएगा । इंदौर आईजी हरिनारायणा चारी मिश्रा ने बताया कि दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बाकी भी जल्दी ही गिरफ्तार होंगे। शुरुआती पूछताछ में गांधी नगर में किसी दुकान पर फोटो को लेकर विवाद हुआ था, उसी विवाद में गोली चलना पाया गया है।

सुबह क्यों, यहां-वहां लेकर दौड़ती रही पुलिस

दोनों आरोपियों को सुबह भोपाल से इंदौर लाया गया, लेकिन यहां पुलिस कभी कनाड़िया तो कभी विजयनगर थाने लेकर घूमती रही। दोनों को सुबह सबसे पहले कनाड़िया थाने पर लेकर पहुंचे। वहां दोनों को थाने पर नहीं उतारा गया और अर्टिका कार एमपी 09 सीवी 8062 को रोकने के बजाए आगे भगा ली गई। बाद में दोनों के हाथ में हथकड़ी डाली गई और फिर सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर को विजयनगर थाने लाकर और तुरंत लॉकअप में बंद कर दिया।

गोली कांड घटना क्रम

गौरतलब है कि विजयनगर थाने के समीप सत्य साईं चौराहे स्थित पॉश कॉलोनी में बने सिंडिकेट का ऑफिस की है। जहां 19 जुलाई की दोपहर को गांधीनगर स्थित शराब दुकान व अहाते को लेकर बैठक रखी गई थी। जहां कॉन्फ्रेंस रूम में सभी गए और चर्चा करने लगे। इसके कुछ दिन पहले गांधीनगर शराब दुकान पर लगी स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह ठाकुर का फोटो निकालकर फेंकने की बात पर सुबह गांधी नगर पर हुए विवाद को लेकर बहस हुई। इसी दौरान चिंटू ठाकुर ने पिस्टल निकालकर अर्जुन ठाकुर पर चला दी। बताया गया कि गोली दीवार से लगकर अर्जुन को लगी। अर्जुन के साथी कुछ समझ पाते, तब तक सतीश भाऊ, चिंटू ठाकुर और हेमू ठाकुर कॉन्फ्रेंस रूम से भाग निकले। सूत्रों की मानें तो अर्जुन ठाकुर के एक साथी ने कॉन्फ्रेंस रूम में लगे 16 कैमरे के डीवीआर को निकालकर अपने साथ ले गया।

उज्जैन के पत्रकारों का हस्तक्षेप

गैंगस्टर सतीश भाऊ व चिंटू ठाकुर की इस तरह की गिरफ्तारी के पीछ उज्जैन के पत्रकार का नाम काफी चर्चा में है। वहीं सुबह जब दोनों आरोपियों को विजयनगर थाने लेकर आए तो सुबह से उज्जैन के कई पत्रकार सक्रिय नजर आए और कनाड़िया से लेकर विजयनगर तक लगातार पुलिस वाहन का पीछा करते नजर आए। एसपी आषुतोष बागरी ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया जिसमें सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर को भोपाल बायपास से पकड़ा गया। सुबह इन्हें इंदौर लाया गया, पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की गई। वहीं इनका एक और साथी हेमू ठाकुर की गिरफ्तारी के लिए पांच-छह टीम अलग-अलग दिशा में भेजी गई है।

आहतों का बड़ा खेल, वहीं बना विवाद की जड़

विजयनगर स्थित सिंडिकेट ऑफिस पर हुए गोलीकांड का मुख्य कारण गांधी नगर शराब दुकान के अहाते को लेकर हुआ विवाद था। जब से सिंडिकेट का निर्माण हुआ है, तब से कई कुख्यात बदमाश व उनके गुर्गे शहर की शराब दुकान और उसके पास संचालित हो रहे अहातों को चलाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हंै, जिसके चलते गांधी नगर शराब दुकान पर स्थित अहाते पर तीन दिन से लगातार विवाद की स्थिति बन रही थी।

संपत्ति की जुटाई जा रही जानकारी

एसपी पूर्व आशुतोष बागरी हाल ही में निगम को एक पत्र लिखकर मुक्त बदमाशों की चल-अचल संपत्ति का विवरण मांग चुके हैं, जिसके बाद आरोपियों द्वारा किए गए कब्जे व अवैध निर्माणों को निगम की मदद से धराशायी भी किया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में भी इसी तरह बदमाशों के हौसलों को पस्त किया गया था, उसी मुहिम को एक बार फिर शुरू करते हुए शहर को शांत और बेखौफ माहौल देने की कोशिश की जा रही है। एक बार फिर पुलिस अपने पुराने पैटर्न पर काम करेगी, जिसके बाद बदमाशों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ी जाएगी।

लाइन अटैच सिपाही की गाड़ी

जिस अर्टिका कार में गैंगस्टर संतोष भाऊ और चिंटू ठाकुर को लाया गया। वह कार विजयनगर थाने पर पूर्व में पदस्थ सिपाही कुलपति गरकल की है, जो कि ड्रग्स वाले मामले में मीडिया की नजर आया था और उच्च अफसरों ने कार्रवाई की थी। वर्तमान में बड़े अस्पताल में आमद दे रहा है।