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पीड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की राह में आई फंड की कमी

घरेलु हिंसा का शिकार हुई महिलाओं को बनाया जा रहा है आत्मनिर्भर

इंदौर। इंदौर में घरेलु हिंसा व महिला अपराधों से पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम जारी है। 1998 से अभी तक आत्मनिर्भर सेंटर द्वारा 12 सौ से अधिक महिलाओं को काउंसलिंग के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है, लेकिन अब यह संस्था फंड की कमी से जुझ रही है।

एक ओर जहां मध्यप्रदेश में महिला अपराधों में बढ़ोतरी हुई है वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भर सेंटर द्वारा पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर भी बनाया जा रहा है। 1998 से वामा जन कल्याण सेवा संस्थान घरेलु हिंसा का शिकार हुई महिलाओं के लिए काम कर रही है। संस्था इन महिला की काउंसलिंग के अलावा इनके हुनर को तरासने का काम भी कर रही है। शुरुआत में 2008 से 2011 तक सरकार के द्वारा उन्हें खर्चा दिया गया लेकिन 2011 के बाद में सरकार द्वारा उन्हें फंड देना बंद कर दिया गया जिसके बाद में संस्था द्वारा खुद ही अपना भार उठाया जा रहा है।

सेंटर के माध्यम से ही पीड़ित महिलाओं को नई राह देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं।
घरेलु हिंसा का शिकार हुई एक महिला ने मृदुभाषी से बातचीत में बताया कि वह करीब 5 साल पहले अपने पति की हिंसा का शिकार होकर इस संस्था में आई थी तब से ही वह आत्मनिर्भर बनकर आश्रम में ही आचार पापड़ और अन्य उत्पादन का निर्माण कर अपना खर्च चलाती आ रही है।
संस्था में मौजूद महिलाओं का कहना है कि सरकार को महिला अपराधों के प्रति कड़े कानून बनाने के साथ-साथ समाजिक संस्थाओं की आर्थिक मदद करने की मांग भी की है।