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इंदौर सेंट्रल जेल के बाहर हुआ हंगाम,पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

इंदौर सेंट्रल जेल के बाहर हुआ हंगाम

इंदौर। कोरोना महामारी के कारण देश में हुए लॉकडाउन से मध्यमवर्गीय और गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति अब काफी खराब हो रही है। जनता सरकार के खिलाफ खड़ी हो गई है,और उनका कहना है कि महीनों से घरों में बंद है और अब कमाने निकल रहे है तो पुलिस फल सब्जी बेचने वालो को भी जेल पंहुचा रही है । जल्द ही सरकार का इन लोगों पर ध्यान नहीं गया तो वो खुद पुरे परिवार के साथ जेल में जाने के लिए तैयार है ।

हज़ार लोगों में से कुछ चंद लोगों को छोड़ दिया गया है।

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निर्देशानुसार अनलॉक कि प्रक्रिया की जा रही है। वही शहर में अब शराब की दुकाने भी खोली जा रही है। लेकिन वही प्रशासन और निगमकर्मचारियों द्वारा उन लोगों को परेशान किया जा रहा है,जो फल ,सब्जी बेचने का काम करते है। ऐसे लोगों पर प्रशासन कानूनी कार्रवाई करने से भी बाज नहीं आरहा है। शहर में आए दिन हो रही लूट ,मर्डर की वारदात करने वालो की जगह प्रशासन अब गरीब लोगों को जेल भेज रहा है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला इंदौर के सेंटर जेल के बाहर जनता कर्फ्यू का सख्ती से पालन करवाते हुए, नियमों का उल्लंघन करने वालों को अस्थाई जेल भेजा गया था। लेकिन अब परिजनों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए, मंगलवार देर रात सेंट्रल जेल के बाहर जमकर हंगामा किया है, परिजनों का आरोप है की हज़ार लोगों में से कुछ चंद लोगों को छोड़ दिया गया है, लेकिन गरीब होने के कारण हमारे परिजन को नहीं छोड़ा जा रहा है ।

रोते हुए लोग बोले उनके घर में एक ही इंसान कमाने वाला वो भी अब जेल में है

इंदौर सेंट्रल जेल के बाहर हंगामे के यह दृश्य काफी चिंताजनक है, जिसमे लोगों का कहना है कि पुलिस ने दादागिरी दिखाते हुए उनके परिजनों को जेल में बंद कर दिया है। साथ ही कई परिवारों का यह भी कहना है की उनके परिवार में केवल एक व्यक्ति ही कमाने वाला है, उसे भी पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है, जिसके कारण परिवार को भूखे मरने की नौबत आ गई है। महिलाएं भी मीडिया से बात करने में आखों में आशु आते हुए बोली कि उनके बच्चों को घर अकेला छोड़ कर वो जेल के बाहर अपने पति को छुड़वाने आ रहे है , और यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही ।