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सलाखों के पीछे सजा काट रहे कैदियों का जीवन बनाया जा रहा है उन्नत

कैदी

उज्जैन. केंद्रीय जेल भैरवगढ में सलाखों के पीछे सजा काट रहे कैदियों के जीवन में बदलाव लाने के सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। यही वजह है कि उज्जैन की केंद्रीय जेल सुधार गृह के रूप में तब्दील होती जा रही है। कैदियों को यहां न केवल उनका जीवन उन्नत बनाने का कौशल सिखाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने जेल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री मोहन यादव ने न केवल जेल की तमाम बैरकों, महिला वार्ड, चिकित्सालय का निरीक्षण किया, बल्कि भोजनशाला, बुटीक सेंटर सहित मूर्तिकला, हस्तशिल्प कला कार्य का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कैदियों द्वारा बनाई गई एक मूर्ति भी खरीदी और जेल के कैदियों द्वारा बनाये गए बुध्द स्थल को देखकर उनके कला कौशल की सराहना की। गौर करने की बात यह रही उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव के निरीक्षण के दौरान यहां कुल बंदी संख्या 1947 रही, उन्होंने इसे संयोग मानते हुए कैदियों के लिए अतिरिक्त बैरक बनवाने के साथ ही खुली जेल बनवाने की भी बात कही।

जेल अधीक्षक अमिता सोनकर के मुताबिक जेल में सजा काट रहे कैदियों की मानसिकता में बदलाव के लिए उन्हें जेल की सलाखों के भीतर ही कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि जब वे जेल की सलाखों से सजा पूरी कर बाहर जाएं तो वे अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें और जेल की सजा काटना भी उनके लिए सार्थक सिध्द हो सके।

उज्जैन से मृदुभाषी के लिए अमृत बैंडवाल की रिपोर्ट