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छात्र नेता से एमपी के सीएम तक शिव का राज, कहानी एमपी के मुखिया की

शिवराज सिंह चौहान

भोपाल. मध्यप्रदेश पर सालों से राज करने वालें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्होंने छात्र राजनिति से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया। ऐसे बहुत कम राजनेता होते है जिनका इस तरह का राजयोग भी होता हैं।

चौथी बार बने एमपी के मुख्यमंत्री

मध्यप्रदेश के चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च, 1959 को प्रदेश के सीहोर जिले के जैतगांव में हुआ। चौहान के पिता का नाम प्रेम सिंह चौहान और माता का नाम सुंदर बाई चौहान हैं। उनका पूरा परिवार खेती करता हैं। साल 1992 में उनका साधना सिंह से विवाह हुआ और उनके दो बेटे कार्तिकेय और कुणाल हैं। बचपन से ही चौहान के अंदर राजनिति का जुनुन सवार था और यही जुनुन आज उन्हें मुख्यमंत्री पद तक लेकर आय़ा। अपनी भाषा शैली से वह आज भी हर किसी को अपनी और आकर्षित कर लेते है। उनके चेहरे पर दिखाई देने वाला तेज उनके कार्य के प्रति जागरुक होना दिखाता हैं। छात्र राजनिति से शुरु किया यह सियासी सफर उन्हें कई बार जेल तक भी लेकर गया, लेकिन चौहान डरे नही हर कठनाई का डटकर सामना किया। घर वालों के विरोध में जाकर भी चौहान ने कई बार आंदोलन किए।

आपातकाल का विरोध करने के बाद चमके थे चौहान

शिवराज सबकी नज़रों में तब आए जब उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार के आपातकाल का विरोध किया जिसके लिए साल 1976-77 में भोपाल जेल में बंद भी रहे। चौहान साल 1972  में आरएसएस से जुड़ गए थे। साल 2000 – 2003  तक शिवराज भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहें और साल 2005 में इन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। शिवराज सिंह चौहान पहली बार 1990 में बुधनी विधानसभा से चुनाव जीते थे, बस यहीं से उनके चुनाव जीतने का भी सिलसिला शुरु हो गया था। चौहान को चुनाव जीतने में उस समय हार का सामना करना पड़ा था जब वह तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ राघौगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़े थे, इस दौरान उन्हें यहां से हार मिली थी।

सिंधिया को भाजपा में शामिल करने में हुए सफल

भाजपा सरकार बनने के पहले चौहान का एक ऑडियों भी काफी वायरल हुआ था जिसमें वह कह रहे थे केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया कि सरकार गिरनी चाहिए। यह बर्बाद कर देगी, तबाह कर देगी। और आप बताओ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसी भाई के बिना सरकार गिर सकती थी क्या‌? और कोई तरीका नहीं था। ये तो मंत्री वहां भी थे। जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध भी किया था। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद चौहान ने सरकार गिराने के तमाम प्रयास किए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में लेकर आ गए और आखिर सफल भी हुए।

व्यापम और डंपर घोटाले में आया था नाम

शिवराज सिंह चौहान के ऊपर बड़े-बड़े आरोप भी लगे है जिसमें कांग्रेस नेता और वकील रमेश साहू ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी साधना सिंह के खिलाफ 2 करोड़ रुपये में चार डंपर्स खरीदने की शिकायत की थी। इसके साथ ही इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ आनंद राय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने व्यापम भर्ती घोटाले पर प्रकाश डाला। उस जनहित याचिका के सन्दर्भ में शिवराज सिंह चौहान ने एक जांच समिति की स्थापना की। जिसने वर्ष 2011 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसके चलते उच्च न्यायालय की देखरेख में विशेष कार्य बल का गठन भी किया गया था।