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करें बजरंगबाण का पाठ, इन समस्याओं से मिलेगा छुटकारा

बजरंगबाण के पाठ से शत्रुपीड़ा का नाश होता है।

मृदुभाषी न्यूज। कलयुग में देव आराधना का विशेष महत्व बतलाया गया है। इसके लिए भक्त अपने कष्टों के निवारण के लिए और मनोकामनाओं की पूर्ति करने के लिए अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं। देव आराधना की विभिन्न स्तुतियां, सूक्त और चालीसा के पठन-पाठन से ईश्वर का ध्यान किया जाता है। कलयुग में हनुमानजी ऐसे देव हैं जो भक्तों की मनोकामना को शीघ्र पूरी करते हैं और उनके कष्टों का हरण करते हैं। हुनुमानजी की आराधना के अनेक तरीके हैं। इनमें से एक बजरंगबाण का पाठ है।

बजरंगबाण का पाठ करने के नियम

बजरंगबली धरती पर अनेकों स्वरूप में विद्यमान है इनके वज्र रूप वाले स्वरूप को बजरंगबली कहा जाता है। हनुमानजी के इस स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। बजरंग बाण के पाठ में नियम और संयम रखना आवश्यक है। ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक दिनचर्या के साथ समय व्यतीत करें। कार्यसिद्धि के लिए मंगलवार या शनिवार से बजरंग बाण के पाठ का प्रारंभ करें। बजरंगबली के चित्र या मूर्ति के सामने लाल ऊन के या कुशासन पर बैठे। लाल वस्त्र धारण करें और धूप, दीप लगाकर पाठ का प्रारंभ करें।

बजरंगबाण करने के फायदे

बजरंगबाण के पाठ से शत्रुपीड़ा का नाश होता है। विरोधी ज्यादा परेशान कर रहे हैं तो मंगलवार से संकल्प लेकर लगातार 11 मंगलवार तक बजरंगबाण का पाठ करें। इसके नियमित पाठ से आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है। बजरंगबाण का पाठ आरोग्यदायक भी है। इसके पाठ से ह्दय रोग और ब्लड प्रेशर में फायदा मिलता है। कार्य में यदि बाधा आ रही है तो बजरंगबाण का पाठ शनिवार के दिन से प्रारंभ कर 21 शनिवार तक लगातार करें। कारोबारी दिक्कतों को दूर करने में भी बजरंग बाण का पाठ काफी फलदायी माना जाता है। लगातार 8 मंगलवार बजरंगबाण का पाठ करने से व्यापार में सफलता मिलती है। बच्चे यदि किसी कार्य को करने से घबराते हैं या डरते हैं तो उनसे बजरंगबाण का पाठ करवाना चाहिए, जिससे उनके साहस में वृद्धि होगी।