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3 Idiots: की कहानी के तर्ज पर , इंदौर के तीन दोस्तों ने कर दिखाया ये कमाल

3 इडियट्स ने इंस्टॉल कर दिए सौ वेंटिलेटर

इंदौर। कोरोना संक्रमण के इस दौर में जहां रेमडेसीविर इंजेक्शन आवश्यक दवाएं और ऑक्सीजन का संकट गहरा चुका है, ऐसे में अस्पतालों में एक बड़ी समस्या उभर कर आई वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं या इंस्टॉल ही नहीं किए गए । ऐसे में इंदौर के कुछ युवा इंजीनियर ने आगे आकर अस्पतालों में बिना किसी शुल्क के वेंटिलेटर इंस्टॉल करने का कार्य किया। आश्चर्य की बात यह है कि इससे पहले उन्होंने कभी वेंटिलेटर करीब से देखा तक नहीं था।

फिल्म 3 ईडियट्स का पूरा सीन आपको जरूर याद होगा जब आमिर खान अपने दोस्तों के साथ एक महिला की डिलीवरी करवाने में जुट जाते हैं और जुगाड़ से वे सफलता भी हासिल करते हैं। ऐसा ही कुछ अलग वाकिया इंदौर में देखने को मिला। इंदौर के कुछ युवा इंजीनियर जिन्होंने कभी वेंटिलेटर को करीब से भी नहीं देखा था। लेकिन उन्होंने इस आपदा के काल में ना सिर्फ प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एमवाय अस्पताल में वेंटिलेटर इंस्टॉल कर दिए बल्कि लगातार अपने जज्बे से कार्य करते हुए अब तक 100 से अधिक वेंटिलेटर मशीन इंस्टॉल चुके है। अभी इन इंजिनयर दोस्तों को बिहार उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी ऑफर मिलने लगे हैं ।

धनबाद आईआईटी वाराणसी और अन्य प्रदेशों के लोग भी जुड़ने लगे

इन दोस्तों का किस्सा भी बड़ा रोचक है। वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन करने की कहानी कुछ 3 ईडियट्स के सीन की तरह है। इंदौर के एमटीएस अस्पताल में पीएम केयर से आए वेंटीलेटर इंस्टॉल करने के बाद शहर के इंजीनियर चिराग शाह, पंकज शिरसागर, शैलेंद्र सिंह लगातार इस कार्य में जुटे हैं। यही नहीं इंदौर के इन युवाओं के साथ अब धनबाद आईआईटी वाराणसी और अन्य प्रदेशों के लोग भी जुड़ने लगे हैं। टीम के साथी पंकज शिरसगर बताते हैं कि वे अलग-अलग शहरों में अस्पतालों में जाकर निशुल्क तकनीकी सहयोग करना शुरू कर चुके हैं और कई राज्यों से उनके पास लगातार फोन आ रहे हैं।

पिता को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद उठाया ये कदम

पंकज शिरसगर ने बताया कि इन सब चीजों की शुरुआत कुछ इस प्रकार हुई कि पंकज के एक दोस्त की बेटी ने फोन लगाकर बताया कि पिता को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, अस्पताल में जब दोस्तों ने संघर्ष करते देखा तो रूह कांप गई। अगले दिन अस्पताल के अधीक्षक पी एस ठाकुर से मुलाकात की तो वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन करने की समस्या पता चली। पंकज ने इस बात पर वेंटिलेटर इंस्टॉल करने की बात कही और अपने मैकेनिकल इंजीनियर चिराग शाह और शैलेंद्र सिंह को बुलाकर पास में खड़ी गाड़ी से औजार निकाले और तीनों जुट गए। हालांकि तीनों ने वेंटिलेटर पाट्स पहली बार देखे थे तो उन्होंने वेंटिलेटर असेंबली की ड्राइंग को दीवार पर चिपकाया और काम को शुरू कर दिया और आज सफलतापूर्वक 100 से अधिक वेंटिलेटर स्टॉल कर चुके हैं।

स्वस्थ हुए मरीजों से मिलकर खुशी होती है

चिराग शाह ने बताया कि पहली शुरुआत में 4 घंटे वेंटिलेटर को इंस्टॉल करने में जरूर लगे पर देर रात तक 8 से 9 वेंटिलेटर इंस्टॉल कर चुके थे। शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि अब इंस्टॉल किए गए वेंटिलेटर की मदद से स्वस्थ हुए मरीजों को मिलने से राहत मिल रही है और उन लोगों को देखकर मन में अलग सुकून मिल रहा है। कुल मिलाकर अस्पतालों में अब वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन की जो दिक्कत है उसे भी इन थ्री ईडियट्स ने मिलकर कुछ राहत जरूर दी है लेकिन यदि इसी प्रकार युवा साथी मिलकर आगे आए तो कई लोगों की जान बच सकती है।