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Mahashivratri 2021: ये हैं भगवान भोलेनाथ के प्रमुख अवतार, जानिए इनके बारे में

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Mahashivratri 2021: शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की आराधना अनेकों स्वरूप में की जाती है। कभी भोलेनाथ ने रौद्र रूप में अवतरण किया, तो कभी शिव ने सौम्य स्वरूप में धरती पर अवतार लिया। कैलाशपति के सभी अवतार भक्तों के कल्याण और दुष्टों के अंत के लिए हुए थे। शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन है। शिव के कई अंशावतार भी है।

महाबली हनुमान

शिवमहापुराण के अनुसार देवताओं और दानवों में अमृत का वितरण करने के लिए भगवान लक्ष्मीनारायण ने मोहिनी स्वरूप धारण किया था। विष्णुजी को देखकर शिवजी कामासक्त हो गए और उन्होंने वीर्यपात कर दिया। सप्तऋषियों ने इस वीर्य को कुछ पत्तों में संग्रहित कर लिया। बाद में सप्तऋषियों ने भोलेनाथ के वीर्य को वानरराज केसरी की पत्नी अंजनी के कान के माध्यम से उनके गर्भ में स्थापित कर दिया, जिससे फलस्वरूप अत्यंत तेजस्वीऔर महाबली पुत्र हनुमान का जन्म हुआ।

भैरव

एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान उस स्थान पर तेज-पुंज की आकृति प्रकट हुई। यह देखकर ब्रह्माजी ने कहा कि हे! चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। इसलिए मेरी शरण में आ जाओ। ब्रह्मा की यह बात सुनकर भोलेनाथ क्रोधित हो गए। उन्होंने उस उत्पन्न पुरुषाकृति से कहा,’ काल की तरह शोभायमान होने के कारण साक्षात कालराज हैं, भीषण होने के कारण भैरव हैं। महादेव से वर प्राप्त होने के बाद कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवे सिर को काट दिया। इसलिए भैरवनाथ ब्रह्म हत्या के पाप के दोषी हो गए। इसके बाद भैरव को काशी में ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली। शिव महापुराण में भैरव को भगवान शंकर का पूर्ण रूप कहा गया है।

वीरभद्र

शास्त्रों में कहा गया है कि वीरभद्र भगवान शिव के वर हैं और यह शिव अवतार उनकी जटाओं से उत्पन्न हुआ है। जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपनी देह त्याग दी थी तब क्रोधित होकर भगवान भोलेनाथ ने अपने सिर से एक जटा उखाड़कर उसको पर्वत के उपर पटक दिया था। उस जटा के पूर्वभाग से वीरभद्र का प्राकट्य हुआ था। शिव के इस अवतार ने प्रकट होते ही दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और साथ ही दक्ष का सिर काटकर शिव के सम्मुख रख दिया । बाद में भगवान शिव ने राजा दक्ष के सिर पर बकरे का सिर लगा कर उन्हें फिर से जीवित कर दिया था।

अश्वत्थामा

धर्मशास्त्रों में अश्वत्थामा को यम, काल, क्रोध, और भगवान महादेव का अंशावतार माना गया है। महाभारत में गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को युद्ध का अंतिम सेनापति बनाया गया था। गुरु द्रोणाचार्य ने भगवान भोलेनाथ को पुत्र रूप में पाने की लिए कठोर तप किया था। तपस्या से प्रसन्न होकर कैलाशपति ने उन्हें वर दिया था कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे।