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उज्जैन में मंत्री प्रतिनिधि पर अस्पताल प्रभारी ने बेड्स पर कब्जा करने के लगाए गंभीर आरोप, MLAने की रासुका लगाने की मांग

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उज्जैन। माधवनगर कोविड अस्पताल के प्रभारी रहे डॉ संजीव कुमरावत ने अस्पताल की अव्यवस्थाओ को लेकर सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि खुद को मंत्री मोहन यादव का प्रतिनिधि बताने वाले अभय विश्वकर्मा नामक युवक ने अस्पताल के पूरे सिस्टम को हाईजैक कर रखा है और अस्पताल के बेड पर कब्जा जमा रखा है। डॉक्टर्स की जगह वह डिसाइड करता है कि कौन मरीज कहाँ और कब भर्ती होगा। इसमें माधवनगर कोविड अस्पताल के स्टाफ की भी संलिप्तता है।

माधवनगर कोविड अस्पताल का मामला

उन्होंने इस संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पूर्व में ही सूचित कर दिया था और जब उन्होंने इस पूरे सिस्टम को बदलने की कोशिश की और जिस माधवनगर अस्पताल की बेड क्षमता 120 थी उसे बढाकर वे 206 तक लेकर गये। पर इसी बीच उन्हें माधवनगर कोविड अस्पताल के प्रभारी पद से हटा दिया गया और नागदा भेज दिया गया। हालांकि माधवनगर कोविड अस्पताल में जो हो रहा है वो अमानवीय है। यहां ऐसे मरीज जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 90 से 95 है उन्हें डीलक्स रूम दे दिया जाता है और ऐसे मरीज जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 50-60 रहता है उन्हें बेड और ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसलिये माधवनगर अस्पताल में आमूलचूल बदलाव किए जाने की आवश्यकता है।

अस्पताल में मरीजों की मौत पर हो चुका है हंगामा

यहाँ आपको बता दें कि करीब एक महीने पहले डॉ संजीव कुमरावत को माधवनगर अस्पताल का प्रभारी तब बनाया गया था जब माधवनगर अस्पताल में लगातार मरीजों की मौत हो रही थी, कोई ऑक्सीजन की कमी से मर रहा था तो कोई बेड नहीं मिलने की वजह से। ऐसे में हर रोज माधवनगर अस्पताल में हंगामा हो रहा था और मरीजों की मौत से गुस्साए परिजनों ने यहाँ पहुंचे अपर कलेक्टर और यूडीए के सीईओ एसएस रावत तक को घेर लिया था।

विधायक महेश परमार ने कहा अभय पर हो कार्रवाई

इधर इस पूरे मामले में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने भाजपा सहित मंत्री मोहन यादव और उनके प्रतिनिधि होने का रौब दिखाकर माधवनगर अस्पताल के पूरे सिस्टम को हाईजैक करने वाले अभय विश्वकर्मा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा महामारी के इस दौर में भाजपा के लोग ऑक्सीजन बेच रहे हैं बेड बेच रहे हैं यहां तक की रेमडिसिवर इंजेक्शन तक बेच रहे हैं। जिन लोगों की इसमें संलिप्तता है उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की जानी चाहिए और रासुका की कार्रवाई की जानी चाहिए।