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एक बोरी यूरिया अब छोटी सी बॉटल में मिलेगा, दुनिया में पहली बार भारत में बनी नैनो यूरिया तरल

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Liquid Urea: कभी एक बोरी में भरकर आने वाला यूरिया अब एक छोटी सी बॉटल में समा गया है। तकनीक के इस कमाल से अब किसानों को यूरिया को लाने ले जाने में तो सुविधाी होगी ही साथ में इसकी गुणवत्ता भी बेहतर मिलेगी। लिक्विड यूरिया को देश में इफको ने बनाया है और किसानों को इसकी सप्लाई भी शुरू कर दी है।

इफको ने बनाई तरल यूरिया

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी इफको ने देश में नैनो यूरिया तरल की उत्पादन और सप्लाई शुरू कर दी है। इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के साथ ही पर्यावरण दिवस के अवसर पर इसकी पहली खेप उत्तर प्रदेश के किसानों को सप्लाई की गई। नैनो यूरिया तरल को दुनिया मे पहली बाद तैयार किया गया है. जिसे इफको ने अपने गुजरात के कलोल स्थित नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में बनाया गया है। इसको पहली बार इफको के प्रबंध निदेशक डॉ उदय शंकर अवस्थी ने 31 मई को नई दिल्ली में पेश किया था।

पर्यावरण हितैषी है तरल यूरिया

इस अवसर पर इफको के उपाध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि वर्तमान में इस बात की जरूरत है कि पर्यावरण, मृदा, वायु और जल को बिना नुकसान पहुंचाए बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया तरल पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है. इसके प्रयोग से पर्यावरण और जलवायु में परिवर्तन के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यह उच्च पोषक तत्व उपयोग क्षमता वाला एक अनोखा उर्वरक है। जो वर्तमान में हो रहे प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने की दिशा में काम करेगा। इसके साथ ही यह मृदा, वायु इन जल निकायों को दूषित नहीं करता है।

पोषक तत्व प्रदान करती है

उपाध्यक्ष संघाणी के मुताबिक इस यूरिया का आकार करीब 30 नैनोमीटर है और दूसरी यूरिया के मुकाबले क्षेत्र एयर आयतन में करीब 10 हजार गुना अधिक है। अति सूक्ष्म होने की वजह से इनका छिड़काव करने पर पत्तियां इसको तुरन्त सोंख लेती है। इसके साथ ही पौधे में जहां पर नाइट्रोजन की सुविधा होती है वहां पर पहुंचकर सन्तुलित मात्रा में पोषक तत्व भी प्रदान करती है।