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उज्जैन में श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली सांदीपनि आश्रम में फलों से होगी सजावट

इंदौर। उज्जैन में शहर के बीचोंबीच स्थित गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दिन विशेष आरती की जाएगी, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस अवसर पर गोपाल मंदिर ट्रस्ट और व्यापारियों के सहयोग से मंदिर की पुताई और लाइट डेकोरेशन किया गया है। 30 अगस्त की रात को ही मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। भगवान के जन्म के अवसर पर भी नहीं खोला जाएगा।

मंदिर के पुजारी और अन्य लोग आरती करेंगे। मंदिर के पट 31 अगस्त की सुबह 4.30 बजे खोले जाएंगे और रात 9 बजे तक दर्शन किया जा सकेगा। पुजारी अर्पित जोशी ने बताया कि कोविड-19 की गाइडलाइन के चलते इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है। पांच हजार साल पुरानी भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली महर्षि सांदीपनि के आश्रम में इस बार भी जन्माष्टमी का पर्व साधारण तरीके से ही मनाया जाएगा।

कोरोना के चलते श्रद्धालुओं को सीमित संख्या में ही प्रवेश दिया जाएगा

उज्जैन में भगवान श्री कृष्ण 11 साल की उम्र में ही शिक्षा प्राप्त करने आ गए थे। यहां फलों से सजावट की जाएगी। यहां के पुजारी और महर्षि सांदीपनि के वंशज पं. रूपम व्यास ने बताया कि कोरोना के चलते श्रद्धालुओं को सीमित संख्या में ही प्रवेश दिया जाएगा। यहां हर साल की तरह उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव रात की आरती में शामिल होंगे। भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली होने के कारण जन्माष्टमी पर इसका विशेष महत्व है। पं. व्यास ने बताया कि चूंकि यह श्री कृष्ण की शिक्षास्थली है और वे यहां गुरु के थे, इसलिए हम गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार ही जन्माष्टमी मनाते हैं। महाकाल का लड्‌डू गोपाल का शृंगार किया जाएगा। महाकाल के पुजारी पं. आशीष शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर में जन्माष्टमी पर्व भी विशेष रूप से मनाया जाता है। हर साल की तरह इस साल भी महाकाल का लड्‌डू गोपाल शृंगार किया जाएगा। यह शृंगार संध्या आरती के समय होगा। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।