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Stock Market: सेंसेक्स 1,225 अंक उछला, निफ्टी 23,800 के पार; लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में जोरदार तेजी, जानिए 6 बड़े कारण

शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी, सेंसेक्स 1,225 अंक उछलकर 76,917.85 पर और निफ्टी 370 अंक बढ़कर 23,810.85 पर पहुंचा।
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HIGHLIGHTS

शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी। सेंसेक्स 1,225 अंक उछलकर 76,917 पर और निफ्टी 23,810 पर बंद। जानिए तेजी के 6 बड़े कारण।

मृदुभाषी डेस्क, मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को तेजी का तूफान देखने को मिला। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार ने बढ़त दर्ज की। निवेशकों की जोरदार खरीदारी के चलते बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक उछलकर 76,917.85 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी में भी 370.05 अंकों की शानदार बढ़त रही और यह 23,810.85 पर पहुंच गया।

शेयर बाजार

बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। खास बात यह रही कि व्यापक बाजार के सूचकांकों में भी मजबूती देखने को मिली। सीमेंट और एफएमसीजी शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को मजबूती दी। हालांकि, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयर इस तेजी में शामिल नहीं हो सके और लाल निशान में कारोबार करते रहे।

आखिर क्यों दौड़ा शेयर बाजार? ये रहे तेजी के 6 बड़े कारण

भारतीय शेयर बाजार में आई इस जोरदार तेजी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों की भूमिका रही। निवेशकों की धारणा मजबूत होने से बाजार में खरीदारी का माहौल बना।

1. LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स के नियमों में संभावित बदलाव की चर्चाओं ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। निवेशकों को उम्मीद है कि टैक्स संबंधी राहत मिलने से शेयर बाजार में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।

2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।

3. AI ट्रेड में बदलाव: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में निवेश के रुझान में बदलाव के कारण निवेशकों ने दूसरे क्षेत्रों में भी अवसर तलाशे। इससे बाजार के अन्य सेक्टरों में खरीदारी को समर्थन मिला।

4. विदेशी निवेशकों की खरीदारी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से लगातार खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को सहारा दिया। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

5. रुपये में मजबूती: भारतीय रुपये की स्थिति में सुधार से भी बाजार की धारणा को समर्थन मिला। रुपये में मजबूती से आयात पर निर्भर कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद रहती है।

6. आकर्षक कीमतों पर खरीदारी: बाजार के कुछ शेयरों में उपलब्ध वैल्यूएशन को आकर्षक मानते हुए निवेशकों ने खरीदारी की। इससे विभिन्न सेक्टरों में तेजी का माहौल बना।

सीमेंट, FMCG और वित्तीय शेयरों में अच्छी खरीदारी

मंगलवार के कारोबार में बाजार की तेजी कई सेक्टरों तक पहुंची। सीमेंट और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई।

इसके विपरीत फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में कमजोरी रही। इन क्षेत्रों के सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इससे साफ रहा कि बाजार में तेजी व्यापक थी, लेकिन सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।

भारतीय बाजार में तेजी, वैश्विक बाजारों में कमजोरी

भारतीय शेयर बाजार में जहां चौथे दिन भी तेजी जारी रही, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेत कमजोर रहे।

लंदन समयानुसार सुबह 8:32 बजे तक यूरोप के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक स्टॉक्स यूरोप 600 में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों के वायदा कारोबार में भी कमजोरी रही। S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत और डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत नीचे थे। नैस्डेक 100 फ्यूचर्स में मामूली बदलाव देखने को मिला।

एशियाई बाजारों की बात करें तो MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत और MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस तरह वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत मिलने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी ने भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और टैक्स नियमों में संभावित बदलाव की उम्मीदों ने बाजार को मजबूती दी है।

हालांकि, वैश्विक बाजारों की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आगे भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की तेजी को देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और जोखिम का आकलन करें।

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