मृदुभाषी डेस्क, भोपाल। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने से ज्यादा जरूरी है जनता का भरोसा जीतना। पुलिस अधिकारी रील बनाने के बजाय रियल प्रॉब्लम सुलझाने पर ध्यान दें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नए पुलिस अधिकारियों को यह नसीहत देते हुए साफ संदेश दिया कि वर्दी की असली पहचान सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और समस्याओं का समाधान है।
मुख्यमंत्री भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों (DSP) की पासिंग आउट परेड में शामिल हुए। उन्होंने परेड की सलामी ली, निरीक्षण किया और प्रशिक्षण पूरा करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। इस बैच के 48 अधिकारियों में 20 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस के सामने आने वाली नई चुनौतियों का जिक्र करते हुए वर्ष 2029 तक प्रदेश से ड्रग्स की समस्या खत्म करने के लिए निर्णायक कार्रवाई का लक्ष्य भी दिया।
रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम पर ध्यान दें पुलिस अधिकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और पुलिस अधिकारियों का इस माध्यम पर सक्रिय रहना गलत नहीं है, लेकिन उनकी प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। सोशल मीडिया पर चर्चा और लोकप्रियता से ज्यादा जरूरी है कि पुलिस अधिकारी लोगों की वास्तविक परेशानियों को समझें और उनका समाधान करें।
उन्होंने कहा कि नए अधिकारी ऐसे बनें, जिनका समाज के हर वर्ग में सम्मान हो। कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए पुलिस अधिकारी देवदूत की तरह काम करें। जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति हमेशा गंभीर और संवेदनशील रहना चाहिए।
डाकुओं और नक्सलवाद के बाद अब नशे के खिलाफ लड़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने अतीत में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की है। चंबल और रीवा अंचल में डाकुओं का उन्मूलन किया गया, वहीं आदिवासी क्षेत्रों के विकास में बाधा बने नक्सलवाद को भी प्रदेश से समाप्त करने में पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब पुलिस के सामने नशे का बढ़ता कारोबार एक बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वर्ष 2029 तक प्रदेश में ड्रग्स की समस्या के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने अवैध शराब के कारोबार और शराब माफिया के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पुलिस अकादमी में 12 करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य कराने की घोषणा की। इसके तहत तीन प्रमुख कार्य किए जाएंगे।
- पुलिस अकादमी में ऑडिटोरियम का निर्माण।
- विद्युत सब स्टेशन की स्थापना।
- एक किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण।
इन सुविधाओं से अकादमी में प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
नक्सल विरोधी अभियान के 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
नक्सल विरोधी अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया है। मुख्यमंत्री ने जवानों के साहस, समर्पण और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सरकार उनकी सेवाओं और बलिदान को हमेशा याद रखेगी।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में पुलिस विभाग में 17 हजार 710 पदों पर भर्ती की गई है। सरकार का लक्ष्य कुल 22 हजार 500 पदों पर भर्ती करने का है। पुलिसकर्मियों के कल्याण और विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
48 नए DSP तैयार, 20 महिला अधिकारी भी शामिल
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने बताया कि वर्ष 2014 से डीएसपी स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में कराया जा रहा है। इस बैच के 48 अधिकारियों ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया है, जिनमें 20 महिला अधिकारी शामिल हैं।
इस बार पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। ये अधिकारी पुलिस की तकनीकी व्यवस्था और साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले अधिकारियों में 22 इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। डीजीपी ने बताया कि युवाओं के बीच नशे का बढ़ता चलन और साइबर अपराध पुलिस के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए पुलिस विभाग ने ‘नशे से दूरी है जरूरी’ और ‘सेफ क्लिक’ जैसे जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।
उन्होंने नए अधिकारियों को विभाग की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन करने और ड्यूटी के दौरान अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखने की सलाह दी।
वर्दी की असली पहचान जनता का भरोसा
मुख्यमंत्री का नए पुलिस अधिकारियों को दिया गया संदेश साफ है कि पुलिस की सफलता केवल अपराधियों पर कार्रवाई या सोशल मीडिया पर दिखाई देने से नहीं मापी जाएगी। असली सफलता तब होगी, जब आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे और जरूरत के समय पुलिस से उसे मदद मिले।
अब नए डीएसपी के सामने कानून-व्यवस्था संभालने के साथ नशे और साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी भी होगी। वर्ष 2029 तक नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का लक्ष्य इस दिशा में पुलिस की बड़ी परीक्षा साबित होगा।

