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इंदौर लोकायुक्त रेड: हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान से जुड़ी 46 संपत्तियां, बाजार कीमत 64 करोड़ रुपये से ज्यादा

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस की जांच में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों के नाम पर बड़ी संख्या में संपत्तियों का पता चला है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, फिरोज खान, उनके परिजनों, सहयोगियों और संबंधित कंपनियों के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां सामने आई हैं। इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 64.01 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार इनका मूल्य लगभग 17.19 करोड़ रुपये आंका गया है।

लोकायुक्त की यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। जांच एजेंसी अब संपत्तियों के दस्तावेज, खरीद-बिक्री के सौदे, वित्तीय लेन-देन और आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और आगे नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

14 अक्टूबर को इंदौर और देवास में 15 ठिकानों पर छापेमारी

लोकायुक्त पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को फिरोज खान से जुड़े इंदौर और देवास के 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के बाद की गई।

प्रारंभिक जांच में मकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और व्यावसायिक प्लॉट सहित विभिन्न प्रकार की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज सामने आए। अधिकारियों के अनुसार, कुछ संपत्तियां परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और निजी कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और क्या इनका मूल्य संबंधित व्यक्ति की ज्ञात वैध आय के अनुरूप है।

64.01 करोड़ रुपये बाजार मूल्य, सरकारी गाइडलाइन में 17.19 करोड़

लोकायुक्त जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 46 अचल संपत्तियों का सरकारी गाइडलाइन मूल्य लगभग 17.19 करोड़ रुपये है, जबकि मौजूदा बाजार कीमत करीब 64.01 करोड़ रुपये आंकी गई है।

संपत्ति का विवरणअनुमानित मूल्य
अचल संपत्तियों की संख्या46
सरकारी गाइडलाइन मूल्य17.19 करोड़ रुपये
अनुमानित बाजार मूल्य64.01 करोड़ रुपये
संपत्तियों पर बताया गया कुल व्ययलगभग 18.80 करोड़ रुपये

ये आंकड़े प्रारंभिक जांच से संबंधित हैं। बाजार मूल्य, संपत्ति पर किए गए व्यय और वैध आय के बीच अंतर को समझने के लिए जांच एजेंसी द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना जरूरी है।

24 साल की सेवा और वैध आय की जांच

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, फिरोज खान ने पुलिस विभाग में लगभग 24 वर्ष तक सेवा की है। लोकायुक्त की प्रारंभिक गणना में वेतन से उनकी आय करीब 75 लाख रुपये बताई गई है, जबकि अन्य ज्ञात स्रोतों को शामिल करने पर कुल वैध आय लगभग 1.94 करोड़ रुपये आंकी गई है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत क्या थे। केवल संपत्ति का बाजार मूल्य अधिक होना अपने आप में किसी अपराध को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं करता; इसके लिए आय, व्यय, स्वामित्व और वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण आवश्यक है।

पत्नी से जुड़ी कंपनी के नाम पर कृषि भूमि

जांच में फिरोज खान की पत्नी हिना खान और उनसे जुड़े एक अन्य व्यक्ति के संयुक्त संचालन वाली कंपनी के नाम पर कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, कंपनी और उससे संबंधित जमीन के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कंपनी के जरिए किए गए सौदों में धन का स्रोत क्या था और संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व तथा वित्तीय संबंधों की स्थिति क्या है।

इस मामले में किसी भी व्यक्ति या कंपनी की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

विवादित जमीनों के कारोबार की शिकायत

लोकायुक्त को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहते हुए विवादित जमीनों के कारोबार में सक्रिय थे। शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की गई और आय से अधिक संपत्ति के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

अब जांचकर्ता जमीनों की रजिस्ट्रियों, खरीद-बिक्री के दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की पड़ताल कर रहे हैं। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित संपत्तियां किस परिस्थिति में खरीदी गईं और उनके लिए भुगतान कैसे किया गया।

आगे और खुलासे होने की संभावना

लोकायुक्त पुलिस की जांच अभी जारी है। अधिकारियों के सामने संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, धन के स्रोत, निजी कंपनियों की भूमिका और संबंधित वित्तीय लेन-देन को स्पष्ट करने की चुनौती है।

जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, मामले में सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए।

फिरोज खान का पैतृक गांव कहां है?

इस मामले को लेकर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि फिरोज खान मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं। फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में उनके पैतृक गांव की स्पष्ट और पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी पोस्टिंग इंदौर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में बताई गई है और जांच के दायरे में इंदौर तथा देवास सहित विभिन्न स्थानों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं।

इसलिए उनके मूल गांव या स्थायी निवास के बारे में बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई दावा करना उचित नहीं होगा।

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