फांसी की सजा के बाद हाईकोर्ट जाएंगे, जेल में बढ़ाई गई निगरानी
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत और अमित कश्यप हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए चारों दोषी अब अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। मुस्कान-साहिल और रविता-अमरदीप के वकील दशहरे के बाद अपील दाखिल कर सकते हैं। इस बीच जेल प्रशासन ने चारों की निगरानी बढ़ा दी है। उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जा रही है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, अमरदीप और साहिल के परिजनों ने शनिवार को उनसे मुलाकात की थी। मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद चारों दोषियों की बेचैनी बढ़ने की जानकारी सामने आई है। उनकी सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित बैरकों के बाहर अतिरिक्त जेल स्टाफ तैनात किया गया है। जेल अस्पताल के डॉक्टरों से उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी दशहरे के बाद चारों की काउंसलिंग करेंगे।
दो हत्याकांड, चार दोषी और मृत्युदंड की सजा
मेरठ के इन दोनों चर्चित हत्याकांडों में अदालत ने पतियों की हत्या के मामलों में उनकी पत्नियों और उनके प्रेमियों को मृत्युदंड सुनाया है। सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया गया, जबकि बहसूमा क्षेत्र के अमित कश्यप उर्फ मिक्की हत्याकांड में रविता और अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई। अब चारों दोषी निजी वकीलों के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील करना चाहते हैं। अपील में वे निचली अदालत के फैसले को चुनौती देंगे। हालांकि, अपील दाखिल होने और उस पर सुनवाई की आगे की स्थिति अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
अमित कश्यप हत्याकांड: मौत को सर्पदंश दिखाने की कोशिश
मेरठ जिले के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में 13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित कश्यप उर्फ मिक्की (31) का शव घर में बिस्तर पर मिला था। मामले को स्वाभाविक मौत या सर्पदंश का रूप देने की कोशिश किए जाने का आरोप सामने आया था।
शव के नीचे एक जीवित घोड़ा पछाड़ सांप (रेट स्नेक) दबा हुआ मिला था। शरीर पर सांप के काटने जैसे निशान भी बताए गए। अमित के भाई मोनू उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मौत को सर्पदंश मानने के बजाय पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी।
परिजनों के अनुसार, रविता पोस्टमार्टम कराने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन मोनू ने पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में मौत का कारण गला, नाक और मुंह दबाने से दम घुटना बताया गया। रिपोर्ट में गर्दन की हायोइड बोन और थायरॉइड कार्टिलेज टूटने का भी उल्लेख किया गया।
जांच के दौरान पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप की भूमिका सामने आई। अदालत ने मामले में दोनों को हत्या का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। इसके साथ ही साक्ष्य मिटाने और अपराधी को संरक्षण देने से संबंधित अपराधों में भी सजा और जुर्माना लगाया गया।
सौरभ राजपूत हत्याकांड: नीले ड्रम में मिला था शव के टुकड़ों का मामला
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने भी मेरठ ही नहीं, बल्कि देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। इंद्रानगर निवासी सौरभ ने वर्ष 2016 में ब्रह्मपुरी निवासी मुस्कान से प्रेम विवाह किया था। वह पहले मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे और बाद में लंदन में नौकरी करने लगे थे। मुस्कान मेरठ में रहती थी। अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान मुस्कान की अपने पुराने परिचित साहिल शुक्ला से नजदीकियां बढ़ गईं। 24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी पत्नी और छह साल की बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से भारत आए थे।
आरोप है कि संबंधों में बाधा बनने के कारण मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या की। जांच में सामने आया कि शव के टुकड़ों को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया था। इसके बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली और कसौल जाने की बात भी सामने आई।
पुलिस ने 18 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया।
मुस्कान ने 24 नवंबर 2025 को जेल में दूसरी बेटी को जन्म दिया था। उसकी बड़ी बेटी अपने नाना-नानी के पास रहती है।
जेल में सुरक्षा बढ़ी, दूसरी जेलों में भेजने की तैयारी
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, साहिल और अमरदीप को आगरा जेल स्थानांतरित करने के लिए लखनऊ से पत्राचार किया गया है। वहीं, महिला दोषियों को लखनऊ स्थित नारी बंदी निकेतन भेजने की योजना है।
हालांकि, संबंधित जेलों में फिलहाल जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानांतरण में समय लग सकता है। तब तक चारों दोषियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए अतिरिक्त व्यवस्था जारी रहेगी।
हाईकोर्ट की अपील पर टिकी अगली कानूनी लड़ाई
दोनों हत्याकांडों में निचली अदालत से मृत्युदंड की सजा मिलने के बाद अब दोषियों के पास उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने का विकल्प है। दशहरे के बाद प्रस्तावित अपील से इन मामलों की कानूनी लड़ाई अगले चरण में पहुंचेगी।
मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। हाईकोर्ट में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि से संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, चारों दोषियों की जेल में सुरक्षा, काउंसलिंग और स्थानांतरण की प्रक्रिया पर जेल प्रशासन की नजर है।