नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अहम बदलाव किए हैं। आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं को पुराने रिकॉर्ड से मैप नहीं होने या डेटा में तार्किक विसंगति के कारण नोटिस मिला है, उन्हें अब सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए निर्वाचन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटा सकेंगे। असाधारण मामलों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत पड़ेगी।
इसके साथ ही दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि संबंधित फैसलों को आयोग की पूर्ण बैठक में मंजूरी मिली। SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है।