सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा से पहले संतों का प्रदर्शन; प्रशासन पर अनुमति नहीं देने और कारण स्पष्ट नहीं करने का आरोप, 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होगी दिग्विजय सिंह की 930 किलोमीटर की यात्रा
उज्जैन। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू होने से पहले विवाद सामने आया है। कम्प्यूटर बाबा उर्फ नामदेव दास त्यागी अन्य साधु-संतों के साथ कलेक्टर बंगले के सामने धरने पर बैठ गए हैं। संतों की मांग है कि यात्रा की शुरुआत के अवसर पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने की अनुमति दी जाए।
कम्प्यूटर बाबा का आरोप है कि जिला प्रशासन न तो पुष्पवर्षा की अनुमति दे रहा है और न ही इसकी मनाही का कारण बता रहा है। उन्होंने इसे सरकार की मनमानी बताया। धरनास्थल पर साधु-संत नारेबाजी कर रहे हैं, जबकि मौके पर मौजूद अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
पुष्पवर्षा की अनुमति पर अटका मामला
संतों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह की यात्रा की शुरुआत पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने की योजना है। इसके लिए अनुमति मांगी गई, लेकिन अनुमति नहीं मिलने से नाराज संतों ने कलेक्टर बंगले के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
फिलहाल विवाद का केंद्र पुष्पवर्षा की अनुमति है। संत प्रशासन से अपने फैसले का कारण स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के संबंध में विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
20 अक्टूबर से महाकाल की नगरी से शुरू होगी यात्रा
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, यह यात्रा करीब 930 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश भाटी के अनुसार, दिग्विजय सिंह यात्रा के दिन सुबह सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर जाएंगे। इसके बाद बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण का कार्यक्रम होगा। फिर महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद दोपहर करीब दो बजे यात्रा शुरू करने की योजना है।
उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिन का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कानीपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी।
70 दिन में 930 किलोमीटर का सफर, रोज 15 किलोमीटर चलने का लक्ष्य
इस यात्रा को करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के मुताबिक, प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की तैयारी है। यात्रा की तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल अभ्यास कर रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में करीब तीन हजार लोगों के शामिल होने की तैयारी है। इसका ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ रखा गया है।
दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2017 में अपनी नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत भी विजयादशमी के दिन की थी। इस बार भी यात्रा के लिए विजयादशमी का दिन चुना गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था पर भी सवाल
यात्रा से पहले उज्जैन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी और गैर-राजनीतिक यात्रा है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित चोरी और कमीशन की शिकायत करने वाले लोगों पर कार्रवाई की गई, जबकि जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने आरोप लगाए, उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कोषाध्यक्ष महिपाल सिंह और इंजीनियर दीनानाथ वर्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिकायतों के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग करने और मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी रामालय ट्रस्ट को सौंपने की मांग भी की।
प्रधानमंत्री और संघ पर भी लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों में कथित कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए इंजीनियर दीनानाथ वर्मा की शिकायतों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि बिल पास करने के लिए 40 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने की शिकायत की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को बचाने के प्रयास किए गए। ये आरोप दिग्विजय सिंह की ओर से लगाए गए हैं; संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
एक ओर 20 अक्टूबर से प्रस्तावित यात्रा की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की अनुमति को लेकर संतों का धरना चर्चा में है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन संतों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और यात्रा की शुरुआत से पहले इस विवाद का समाधान निकल पाता है या नहीं।