बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हृदय व सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत; हर साल फ्लू का टीका लगवाने, मास्क पहनने और शुरुआती लक्षणों पर डॉक्टर से संपर्क करने की अपील
मृदुभाषी डेस्क, भोपाल। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही खांसी, जुकाम और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। आमतौर पर लोग इन लक्षणों को मौसम में बदलाव का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लापरवाही गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है। सांस संबंधी वायरस का संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। इसे देखते हुए एम्स भोपाल ने लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
एम्स भोपाल के चिकित्सकों के मुताबिक, तापमान में गिरावट और नमी में बदलाव के कारण सर्दियों में इन्फ्लूएंजा सहित कई श्वसन वायरस का प्रसार बढ़ जाता है। इस मौसम में लोग अधिक समय बंद कमरों और कम हवादार स्थानों पर बिताते हैं। ऐसे में एक-दूसरे के संपर्क में आने से संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा दिखने वाला संक्रमण भी कुछ लोगों के लिए गंभीर साबित हो सकता है।

इन लोगों को निमोनिया और फ्लू का ज्यादा खतरा
चिकित्सकों के अनुसार, कुछ आयु वर्ग और बीमारियों से पीड़ित लोगों को सर्दियों में संक्रमण से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- बुजुर्ग और छोटे बच्चे।
- गर्भवती महिलाएं।
- धूम्रपान करने वाले लोग।
- अस्थमा और सीओपीडी के मरीज।
- मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित लोग।
- कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति।
इन लोगों में वायरल संक्रमण पहले से मौजूद बीमारी को गंभीर बना सकता है। संक्रमण के फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया का खतरा भी बढ़ जाता है।
हर साल फ्लू का टीका लगवाने की सलाह
एम्स भोपाल ने इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए हर साल फ्लू का टीका लगवाने पर जोर दिया है। विशेष रूप से बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।
इसके अलावा, उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार निमोनिया से बचाव के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाने के संबंध में भी चिकित्सक से परामर्श लिया जा सकता है। टीकाकरण संक्रमण के जोखिम और गंभीरता को कम करने में मददगार हो सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
इन्फ्लूएंजा संक्रमण होने पर अचानक बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिनके सामने आने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
- तेज बुखार लगातार बना रहना।
- सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना।
- सीने में दर्द होना।
- भ्रम या असामान्य व्यवहार की स्थिति।
- होंठों का नीला पड़ना।
- रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होना।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन संकेतों को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर टालना खतरनाक हो सकता है।
मास्क पहनने और घर में हवा की आवाजाही बनाए रखने की सलाह
सर्दियों में संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास के वातावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। एम्स भोपाल ने भीड़भाड़ और कम हवादार स्थानों पर अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनने की सलाह दी है।
इसके साथ ही घर और कार्यस्थल के कमरों में हवा की पर्याप्त आवाजाही बनाए रखें। नियमित रूप से हाथ धोएं और खांसते या छींकते समय मुंह व नाक को ढकें। धूम्रपान और घर के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण से बचना भी जरूरी है।
संतुलित खानपान, पर्याप्त पानी और पूरी नींद लेने से शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।
वायरल संक्रमण में खुद से न लें एंटीबायोटिक
एम्स ने स्पष्ट किया है कि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण पर प्रभावी नहीं होती हैं। इसलिए खांसी-जुकाम या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है।
इन्फ्लूएंजा के कुछ मामलों में एंटीवायरल दवाएं शुरुआती समय में शुरू करने पर अधिक प्रभावी हो सकती हैं। विशेष रूप से जोखिम वाले और अस्पताल में भर्ती मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार दिया जाना जरूरी है।
सर्दियों में छोटी दिखने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को हल्के में लेने के बजाय शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना, समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना और जरूरी टीकाकरण कराना ही गंभीर संक्रमण से बचाव का बेहतर तरीका है।