अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर रोक: टीसीएस ने दी सफाई, कहा- अमेरिकी भर्ती योजना पर नहीं पड़ेगा असर

टीसीएस का स्पष्ट संदेश: PERM रोक के बीच स्थानीय भर्ती पर जोर
टीसीएस ने अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। दरअसल, कंपनी ने अमेरिका में स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) पर रोक लगने के बावजूद अपनी कार्ययोजना पर स्पष्टता प्रदान कर दी है। कंपनी का कहना है कि इस निर्णय से अमेरिकी कार्यप्रणाली और ग्राहकों के कार्यों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही, टीसीएस ने अगले पांच वर्षों के भीतर अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करने की अपनी योजना पर पूर्ण गति से आगे बढ़ने की पुष्टि की है।

प्रमुख बिंदु
- PERM रोक के बावजूद प्रभाव नहीं: टीसीएस ने साफ किया कि स्थायी भर्ती प्रमाणन के वर्तमान निलंबन से उनकी अमेरिकी उन्नती और क्लाइंट प्रोजेक्ट्स के संचालन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
- स्थानीय भर्ती पर केंद्रित रणनीति: कंपनी की विस्तार योजना मुख्यतः अमेरिकी क्षेत्र के भीतर स्थानीय स्तर पर भर्ती पर निर्भर है, ताकि स्थानीय बाजार की मांगों के अनुरूप त्वरित और कुशल सेवाएं प्रदान की जा सकें।
- मजबूत संरचना और सुविधाएं: अमेरिका में टीसीएस के 31 कार्यालय एवं डिलीवरी केंद्र मौजूद हैं, जिनमें स्थानीय पेशेवरों के माध्यम से सेवाएं दी जाती हैं। कंपनी स्थानीय भर्ती प्रक्रियाओं के मजबूत संचालन पर जोर दे रही है।
- प्रतिबद्धता और अनुपालन: टीसीएस ने हर आधिकारिक निर्देश और नियम का पूर्ण पालन करने की प्रतिबद्धता दोहराई है और मानक प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठाए हैं।
PERM क्या है और क्यों रोक लगी
- PERM कार्यक्रम स्थायी श्रम प्रमाणन से जुड़ा एक अनिवार्य कदम है, जिसमें कंपनियाँ यह प्रमाणित करती हैं कि विदेशी नागरिक के नियुक्ति से अमेरिकी स्थानीय कर्मचारियों के वेतन, अवसर या अधिकार प्रभावित नहीं होते।
- हालिया प्रशासनिक कार्रवाई के तहत इस कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं की गहन जांच के कारण अस्थायी निलंबन किया गया है। इसके दायरे में कई बड़ी टेक कंपनियाँ आती हैं।
निष्कर्ष
- टीसीएस का संदेश स्पष्ट है: PERM निलंबन के बावजूद अमेरिकी संचालन, क्लाइंट प्रोजेक्ट्स और भर्ती रणनीति पर सकारात्मक बनाए रखा जाएगा।
- स्थानीय भर्तियों को प्राथमिकता देते हुए कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आगे भी स्थानीय प्रतिभाओं के चयन और विकास पर फोकस बना रहेगा, ताकि अमेरिकी बाजार की मांगों के अनुरूप उत्कृष्ट सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
नई दिल्ली। अमेरिका सरकार की ओर से स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) पर रोक लगाने के फैसले के बीच देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने अपनी कार्ययोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। कंपनी का कहना है कि इस फैसले से अमेरिकी कार्यप्रणाली और ग्राहकों के कामकाज पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। टीसीएस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त स्थानीय लोगों को नौकरी देने की अपनी योजना पर पूरी गति से आगे बढ़ने का ऐलान किया है।
स्थानीय भर्तियों पर जोर और मजबूत ढांचा
टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में उसकी व्यावसायिक रणनीति मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां करने पर आधारित है। कंपनी वर्तमान में अमेरिका के भीतर 31 अत्याधुनिक कार्यालयों और डिलीवरी केंद्रों का संचालन कर रही है, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय पेशेवर सेवाएं दे रहे हैं। टीसीएस परिसर स्तर पर मजबूत भर्ती प्रणालियों का उपयोग करती है, जिससे उसकी परिचालन क्षमता और अमेरिकी श्रम बाजार की आवश्यकताओं के बीच बेहतरीन तालमेल बना रहता है।
पीईआरएम रोक का मामूली असर
कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले दो वर्षों के दौरान पीईआरएम के तहत उसके आवेदनों की संख्या बहुत कम (इकाई के अंक में) रही है। इसी न्यूनतम निर्भरता के चलते टीसीएस आश्वस्त है कि इस कार्यक्रम के निलंबन से उसकी भर्ती रणनीति या क्लाइंट प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं आएगा। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के हर आधिकारिक निर्देश और नियम का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या है पीईआरएम कार्यक्रम और क्यों लगी रोक?
पीईआरएम (स्थायी श्रम प्रमाणन) अमेरिकी आव्रजन और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। इसके तहत कंपनियों को यह कानूनी रूप से साबित करना होता है कि किसी विदेशी नागरिक को नियुक्त करने से अमेरिकी स्थानीय कर्मचारियों के वेतन, कामकाज के अवसरों या अधिकारों को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की गहन जांच के तहत इस कार्यक्रम को अस्थायी रूप से निलंबित किया है।
इस प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में टीसीएस के अलावा इन्फोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी जैसी दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा है कि इन कंपनियों से जुड़े नए या लंबित आवेदनों पर फिलहाल विचार नहीं किया जाएगा।
आईटी सेक्टर पर असर और नैसकॉम का पक्ष
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा प्रणाली की आलोचना करते हुए इसे अमेरिकी नागरिकों के वेतन और रोजगार को प्रभावित करने वाला बताया है। इसके विपरीत, भारतीय आईटी उद्योग के शीर्ष संगठन ‘नैसकॉम’ ने स्पष्ट किया है कि आव्रजन नीति और कुशल तकनीकी प्रतिभा की आवाजाही को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। नैसकॉम के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में अपनी एच-1बी वीजा पर निर्भरता को काफी हद तक घटाकर स्थानीय प्रतिभाओं की नियुक्तियों को तेजी से बढ़ावा दिया है।







