5 साल में सबसे ज्यादा बच्चों को मिला परिवार, 57% बेटियां, वेटिंग 3 साल तक
मध्य प्रदेश में बच्चों को गोद लेने के प्रति परिवारों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और बीते पांच साल में वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा 221 बच्चों को नया परिवार मिला है। इनमें 125 बेटियां और 96 बेटे शामिल हैं, यानी गोद लिए गए हर 100 बच्चों में करीब 57 बेटियां हैं और लगातार दूसरे साल बेटियों की संख्या बेटों से ज्यादा रही है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 133 बच्चों को गोद लिया गया था, जो इस बार 88 बढ़कर 221 हो गया है। इनमें 207 बच्चों को देश में और 14 बच्चों को विदेश में परिवार मिला है, जिसके चलते दत्तक ग्रहण के मामले में मध्य प्रदेश देश में 13वें से छलांग लगाकर अब नौवें स्थान पर पहुंच गया है।
बेटियों को अपनाने में परिवारों की बढ़ती दिलचस्पी के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता प्रीति साहू बताती हैं कि पहले कई परिवार सिर्फ बेटा गोद लेने की इच्छा रखते थे, लेकिन अब लोग बेटियों को लेकर भी आगे आ रहे हैं। कारा के पंजीयन में मिलने वाले विकल्पों के तहत कई ऐसे परिवार भी हैं जिनके यहां पहले से बेटा है और वे परिवार पूरा करने के लिए बेटी गोद लेना चाहते हैं, जबकि कई ऐसे दंपती भी हैं जिनके बच्चे नहीं हैं और वे बेटी को ही अपनाने की इच्छा लेकर आते हैं। हालांकि, बच्चे को गोद लेने के इच्छुक परिवारों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी होने के कारण अब प्रतीक्षा अवधि भी काफी लंबी हो गई है और नए पंजीयन के बाद प्रतीक्षा सूची में करीब 1500 के आसपास परिवार हो सकते हैं। मातृ छाया सेवा भारती के अनुसार, पहले पंजीयन के बाद एक से डेढ़ साल में बच्चा मिल जाता था, लेकिन अब छोटे बच्चों के लिए परिवारों को ढाई से तीन साल और कुछ मामलों में साढ़े तीन से चार साल तक इंतजार करना पड़ रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम बात यह भी है कि संस्थान में रहने वाला हर बच्चा तत्काल दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध नहीं होता, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बच्चे को कानूनी रूप से मुक्त घोषित किया जाता है, साथ ही बच्चों की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों की प्राथमिकताएं भी वेटिंग पीरियड को प्रभावित करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 792 बच्चों को गोद लिया गया, जबकि गुजरात में 547, तमिलनाडु में 501, कर्नाटक में 377, ओडिशा में 308, तेलंगाना में 307, पश्चिम बंगाल में 237 और उत्तर प्रदेश में 231 बच्चों को परिवार मिला, जिसके बाद 221 बच्चों के साथ मध्य प्रदेश नौवें और 172 दत्तक ग्रहण के साथ राजस्थान दसवें स्थान पर रहा है।







