---Advertisement---

कैंसर की 397 दवाओं के दाम घटे, कुछ की कीमत में 90% से ज्यादा कटौती; 9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें

---Advertisement---

मृदुभाषी, डेस्क। कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के फैसले के बाद कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें 397 यानी करीब 73 प्रतिशत दवाओं के दाम घटाए गए हैं। कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कटौती हुई है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। हालांकि, कीट्रूडा समेत कुछ महंगी कैंसर दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कैंसर की 397 दवाओं की कीमतों में कटौती, जानिए कितनी मिली राहत

कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। कई आधुनिक कैंसर दवाओं और इंजेक्शन की कीमतें इतनी अधिक हैं कि उनका नियमित इस्तेमाल कराना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कटौती को मरीजों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें से 397 की कीमतें कम हुई हैं, जबकि 146 ब्रांड-पैक की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

दवाओं की कीमतों में कटौती के प्रमुख आंकड़े

विवरणआंकड़े
जिन ब्रांडों और पैक की कीमतों की समीक्षा हुई543
कीमतें घटाई गईं397
कीमतों में कमी वाले ब्रांड-पैक का हिस्सालगभग 73%
जिनकी कीमतों में बदलाव नहीं हुआ146
आधे से भी कम हुई कीमतों वाले दवा ब्रांड-पैक217
70% से अधिक कटौती वाले ब्रांड97
80% से अधिक कटौती वाले ब्रांड50
90% से अधिक कटौती वाले ब्रांड5

इन आंकड़ों से पता चलता है कि कई कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़ी कमी की गई है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज कौन-सी दवा इस्तेमाल कर रहा है और उसके पैक की नई निर्धारित कीमत कितनी है।

एक इंजेक्शन की कीमत ₹80 हजार से घटकर ₹7,150

दवाओं की कीमतों में कटौती के कुछ उदाहरण चौंकाने वाले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सैमटेपा इंजेक्शन की कीमत ₹80,071.86 से घटाकर ₹7,150.33 कर दी गई है।

इस तरह इसकी कीमत में लगभग 91 प्रतिशत की कमी हुई है। वहीं, पैलबोप्रो दवा के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत ₹40,421 से घटकर ₹2,720 हो गई है। यह करीब 93 प्रतिशत की कटौती है।

दवापुरानी कीमतनई कीमतअनुमानित कटौती
सैमटेपा इंजेक्शन₹80,071.86₹7,150.33लगभग 91%
पैलबोप्रो, 21 कैप्सूल₹40,421₹2,720लगभग 93%

ध्यान दें: ये कीमतें उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। मरीजों को दवा खरीदने से पहले संबंधित पैक पर दर्ज नई अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और लागू होने की तारीख की पुष्टि करनी चाहिए।

सरकार ने क्यों घटाईं कैंसर की दवाओं की कीमतें?

कैंसर की दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 137 कैंसर-रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (TMR) व्यवस्था लागू की थी। इसका उद्देश्य दवाओं की सप्लाई चेन में होने वाले मुनाफे को नियंत्रित करना और मरीजों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराना है।

इस व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर ट्रेड मार्जिन की सीमा 30 प्रतिशत तय की गई थी। इसके बाद कंपनियों ने संशोधित कीमतें जारी की हैं।

नई दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। इसलिए मरीजों को इस तारीख से संबंधित दवाओं की संशोधित कीमतों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

कीट्रूडा समेत कई महंगी कैंसर दवाओं के दाम नहीं बदले

कैंसर की कई दवाओं की कीमतें घटने के बावजूद कुछ बेहद महंगी दवाओं के दाम स्थिर बने हुए हैं। इनमें कीट्रूडा जैसी इम्यूनोथेरेपी की दवा भी शामिल है।

कीट्रूडा का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसकी कीमत ₹2,16,500 पर ही बनी हुई है।

इसके अलावा ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसाइक्लिब की कीमत ₹24,435 बताई गई है। टैग्रिसो, टेसेंट्रिक, डार्जालेक्स और इम्फिंजी जैसी दवाओं की कीमतों में भी बदलाव नहीं होने की जानकारी दी गई है।

हालांकि, इन दवाओं की कीमतें किस पैक, खुराक या प्रस्तुति के लिए लागू हैं, इसकी पुष्टि आधिकारिक मूल्य सूची से करना जरूरी है।

कैंसर की दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी चिंता

कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी उठ चुका है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 29 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली रकम के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाए थे।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दवाओं की कीमतों, जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता और मरीजों पर इलाज के बढ़ते आर्थिक बोझ से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई की थी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मौजूद थे।

सुनवाई के दौरान कैंसर की दवाओं की कीमतों और उन पर लगाए जाने वाले मार्जिन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि दवाओं की कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों है और मरीजों को राहत देने के लिए प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

क्या दवाओं की कीमत घटने से इलाज सस्ता होगा?

दवाओं की कीमतों में कटौती से उन मरीजों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है जो संबंधित दवाओं का नियमित इस्तेमाल करते हैं। महंगे इंजेक्शन और कैप्सूल की कीमतों में बड़ी कमी होने पर परिवारों का इलाज संबंधी खर्च कम हो सकता है।

हालांकि, कैंसर के कुल इलाज का खर्च केवल दवाओं तक सीमित नहीं होता। अस्पताल में भर्ती, जांच, सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी और अन्य चिकित्सा सेवाओं पर भी खर्च होता है। इसलिए दवाओं की कीमतों में कटौती से कुल इलाज का खर्च कितना घटेगा, यह मरीज की बीमारी और उपचार योजना पर निर्भर करेगा।

दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी

दवाओं की कीमतें कम करने के साथ उनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे मरीजों को राहत मिले और कंपनियों के लिए दवाओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना भी संभव हो।

विशेष रूप से पेटेंट वाली आधुनिक कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी लाना जटिल हो सकता है। इनके विकास, पेटेंट अधिकारों और उत्पादन से जुड़ी लागत का भी असर पड़ता है। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण के साथ दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता की निगरानी भी जरूरी है।

मरीजों को क्या करना चाहिए?

  • 9 नवंबर 2026 से संबंधित दवाओं की संशोधित MRP की जांच करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा या उसकी खुराक में बदलाव न करें।
  • दवा खरीदते समय बिल लें और पैक पर दर्ज MRP देखें।
  • कीमत में अंतर होने पर संबंधित दवा कंपनी या औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त करें।
  • किसी दवा की उपलब्धता में समस्या होने पर अपने डॉक्टर से उपयुक्त विकल्प के बारे में सलाह लें।

निष्कर्ष

कैंसर की 397 दवाओं की कीमतों में कटौती का फैसला मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। खासकर उन दवाओं के मामले में, जिनकी कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक कमी बताई गई है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नई कीमतें प्रभावी ढंग से लागू हों, मरीजों तक दवाएं उचित दरों पर पहुंचें और उनकी उपलब्धता बनी रहे।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a comment