देश में दवाओं की बढ़ती कीमतों का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट में गंभीर बहस का विषय बन गया है। केंद्र सरकार ने अदालत के सामने अत्यधिक दवा कीमतों की समस्या को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है। खासकर गरीब मरीजों पर महंगी दवाओं के आर्थिक बोझ को लेकर शीर्ष अदालत ने चिंता जताई है।
सुनवाई के दौरान कैंसर और दूसरी जरूरी दवाओं पर भारी मार्जिन का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने सवाल किया कि दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य को नियंत्रित करने के लिए अधिक समान और प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा सकती। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने रिटेलर प्राइस के ऊपर MRP में 16 प्रतिशत की सीमा के विचार पर भी सवाल-जवाब किए।
यदि सरकार दवा मूल्य निर्धारण व्यवस्था में बदलाव करती है तो इसका सीधा असर करोड़ों मरीजों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में दवाओं की कीमत परिवारों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बनती है। अब निगाहें सरकार द्वारा अदालत के सामने पेश किए जाने वाले समाधान पर रहेंगी।







