नई दिल्ली। देश की राजनीति में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ और मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है और मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखे राजनीतिक हमले किए। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है, तब मॉक पार्लियामेंट के जरिए देश को संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
खरगे का आरोप- प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देश पर चल रहा चुनाव आयोग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम कर रहा है।
खरगे ने कहा कि वर्ष 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए तमाम राजनीतिक हथकंडे अपनाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सांसदों की खरीद-फरोख्त, राजनीतिक दलों को तोड़ने और चुनी हुई सरकारों को गिराने की राजनीति हुई और अब वोटों की चोरी की जा रही है।
उन्होंने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम का भी उल्लेख किया। खरगे ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यह कानून विपक्ष के 145 सांसदों के निलंबन के बाद संसद में पारित किया गया था।
193 सांसदों के प्रस्ताव का भी किया जिक्र
खरगे ने दावा किया कि करीब सात महीने पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था, लेकिन उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर विचार नहीं किया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शनिवार को आयोजित प्रतीकात्मक कार्यक्रम किसी व्यक्ति के प्रति व्यक्तिगत विरोध का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाना है।
खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। उन्होंने विशेष रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मतदान अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।
खरगे ने पंजाब की राजनीति पर भी साधा निशाना
चुनाव आयोग को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करने के साथ खरगे ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार को निशाने पर लिया।
खरगे ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने बड़े-बड़े वादे करके जनता का भरोसा हासिल किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद पंजाब में कुशासन, भ्रष्टाचार, नशे के कारोबार, असुरक्षा और लोगों की टूटती उम्मीदों जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब की खोई हुई प्रतिष्ठा और गौरव को बहाल करने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में शांति, समृद्धि और विकास का नया दौर शुरू करना है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की बड़ी रैली
विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने विरोध को व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप देने की तैयारी भी की है। इसी क्रम में रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की बड़ी रैली आयोजित की जाएगी।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने रैली की तैयारियों को लेकर कहा कि विपक्ष भीड़ जुटाने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि लोग खुद इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि किसी पार्टी की ओर से भीड़ जुटाने के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मसूद ने अपने बयान में सरदार वल्लभभाई पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल भारत के पहले गृह मंत्री थे और उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने नेहरू की समावेशी राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सभी विचारधाराओं को साथ लेकर चलना चाहते थे।
यूपी से सबसे ज्यादा भागीदारी का दावा
रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने दावा किया कि इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश की भागीदारी सबसे अधिक होगी।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। उनके मुताबिक, अब आम लोग भी इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं और रैली को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार खो दिया है।
रैली से पहले रामलीला मैदान पहुंचे दिल्ली पुलिस कमिश्नर
INDIA गठबंधन की रैली से पहले दिल्ली पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने डीसीपी सेंट्रल के साथ रामलीला मैदान पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। पुलिस प्रशासन की कोशिश है कि कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
अखिलेश यादव बोले- मॉक पार्लियामेंट से देश को देंगे संदेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में विपक्ष के मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है, तब इस तरह के आयोजन के माध्यम से देश को संदेश दिया जाएगा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अखिलेश ने कहा कि विपक्षी सांसद लोकतंत्र और संविधान के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि महिला आरक्षण से संबंधित कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो उसे लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
उन्होंने संसद में लिए गए फैसलों को जमीन पर लागू करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अखिलेश यादव ने पिछले लोकसभा सत्र का जिक्र करते हुए धार्मिक आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं के चंदे और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए।
लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर केंद्रित होगी रैली
INDIA गठबंधन की इस पूरी राजनीतिक कवायद के केंद्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे हैं। विपक्ष इन विषयों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अब सभी की नजरें 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दलों की एकजुटता कितनी मजबूत दिखाई देती है और उनके आरोपों एवं मांगों पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
फिलहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ और आगामी रैली ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।


