अक्टूबर की शुरुआत के साथ बैंकिंग और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कई नियमों में बदलाव हुआ है। इनका असर बैंक ग्राहकों, निवेशकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पर पड़ सकता है। बदलावों में ATM से जुड़े शुल्क, बल्क FD की दरों और LPG सब्सिडी के लिए KYC जैसे विषय शामिल हैं।
ऐसे में ग्राहकों के लिए अपने बैंक के संशोधित शुल्क और नियमों को देखना महत्वपूर्ण है। खासतौर पर ATM का अधिक इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को लागू ट्रांजैक्शन लिमिट और शुल्क की जानकारी रखनी चाहिए। वहीं FD में बड़ी रकम निवेश करने वाले लोगों को नई ब्याज दरों और बैंक की शर्तों की तुलना करने की जरूरत पड़ सकती है।
अक्टूबर में UPI मर्चेंट पेमेंट से जुड़ा नया MDR फ्रेमवर्क भी चर्चा में रहेगा। इसका प्रस्तावित क्रियान्वयन 15 अक्टूबर से है और मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने भी पहुंच चुका है। इसलिए डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियम इस महीने आम लोगों और कारोबारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।







