मृदुभाषी, नई दिल्ली। भारत में जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां चर्चा में हैं। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, 10 से 24 जनवरी 2027 तक नागरिकों को ऑनलाइन जानकारी स्वयं भरने का विकल्प मिलेगा, जबकि 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर विवरण दर्ज करेंगे। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक दर्ज जानकारी की जांच और सुधार का चरण प्रस्तावित है। वर्ष 2011 के बाद होने वाली इस जनगणना से देश की आबादी और परिवारों की स्थिति से जुड़े नए आंकड़े सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, प्रकाशन से पहले इन तारीखों की नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना से पुष्टि करना जरूरी है।
डिजिटल तरीके से होगी जनगणना, घर-घर पहुंचेंगे कर्मचारी
जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। नागरिकों को निर्धारित अवधि में ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर आवश्यक विवरण जुटाएंगे और जानकारी का सत्यापन करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने में डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाना है।
ऑनलाइन जानकारी भरने से क्या होगा फायदा?
ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा से नागरिकों को निर्धारित समय के भीतर स्वयं जानकारी दर्ज करने का अवसर मिल सकता है। इससे घर-घर गणना की प्रक्रिया में सहयोग मिलेगा।
हालांकि, ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि घर पर सत्यापन की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। जनगणना के निर्धारित नियमों के अनुसार कर्मचारियों द्वारा विवरण जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
क्या चुनाव वाले और बर्फीले क्षेत्रों में अलग होगी जनगणना?
जनगणना के लिए सभी राज्यों और क्षेत्रों में एक ही समय-सारणी लागू होना जरूरी नहीं है। बर्फबारी, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के कारण कुछ क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया जा सकता है।
इसलिए चुनाव वाले या बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना नहीं होने की बात कहने के बजाय यह देखना जरूरी है कि संबंधित क्षेत्रों के लिए सरकार ने कौन-सी समय-सारणी अधिसूचित की है।
2011 के बाद अब क्यों हो रही है जनगणना?
भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना महामारी के कारण टाल दी गई थी। इसी वजह से देश की नई जनगणना लंबे समय से प्रतीक्षित है।
नई जनगणना के आंकड़ों से देश की जनसंख्या की मौजूदा स्थिति समझने में मदद मिलेगी। इससे विभिन्न क्षेत्रों में आबादी के बदलाव, परिवारों की स्थिति और विकास की जरूरतों का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जनगणना के आंकड़ों से सरकार को क्या मिलेगा?
जनगणना केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इसके आंकड़े सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाएं तैयार करने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, जनसंख्या के वितरण और विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की जरूरतों को समझने के लिए भी ये आंकड़े उपयोगी होते हैं। इसलिए जनगणना से मिलने वाली जानकारी भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
जनगणना के दौरान नागरिक किन बातों का ध्यान रखें?
नागरिकों को जनगणना से संबंधित आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए। ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी भरें और सत्यापन के लिए आवश्यक सहयोग दें।
जनगणना की तारीखों, ऑनलाइन पोर्टल और अन्य निर्देशों की पुष्टि के लिए भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
