8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली, इंदौर में शाम 6:10 से 8:08 बजे तक लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ समय; जानिए रामायण से लेकर भगवान महावीर के निर्वाण तक इस पर्व का धार्मिक महत्व और पांच दिवसीय दीपोत्सव का पूरा कैलेंडर।
मृदुभाषी डेस्क, नई दिल्ली/इंदौर। दीपावली केवल दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और घरों को रोशनी से सजाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपरा और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है। अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का संदेश देने वाला यह पर्व देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशयुक्त तथा सकारात्मक वातावरण वाले घरों में निवास करती हैं।
इस बार दीपावली पर पूजा के शुभ मुहूर्त, अमावस्या तिथि और पांच दिवसीय दीपोत्सव को लेकर लोगों में उत्सुकता है। आइए जानते हैं दीपावली क्यों मनाई जाती है, इसके पीछे कौन-कौन सी धार्मिक मान्यताएं हैं और इस दिन क्या करना चाहिए तथा किन बातों से बचना चाहिए।
1. दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए इसके पीछे की प्रमुख धार्मिक मान्यताएं
दीपावली मनाने के पीछे भारतीय धर्म और संस्कृति में अनेक पौराणिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने के कारण और परंपराएं भी कुछ अलग हैं।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में जले थे दीप
दीपावली से जुड़ी सबसे लोकप्रिय मान्यता रामायण से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूरा किया और अयोध्या लौटे थे।
भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। अमावस्या की अंधेरी रात में हजारों दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया। तभी से कार्तिक अमावस्या को दीप जलाने और दीपावली मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।
यह कथा संदेश देती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की अंततः विजय होती है।
समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं मां लक्ष्मी
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
मां लक्ष्मी को धन, वैभव, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। इसी कारण दीपावली की अमावस्या पर उनके स्वागत और पूजन की परंपरा है।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना गया है। मान्यता है कि लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा करने से जीवन में धन के साथ सद्बुद्धि और शुभता भी बनी रहती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
दक्षिण भारत की कई परंपराओं में दीपावली का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से भी जोड़ा जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने लोगों को अत्यधिक परेशान कर रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी और दीपोत्सव मनाने की परंपरा प्रचलित है।
जैन धर्म में भगवान महावीर के निर्वाण का दिन
दीपावली का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। जैन धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं।
जैन मान्यता के अनुसार, 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने कार्तिक अमावस्या के दिन बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया था। उनके निर्वाण की स्मृति में दीप जलाने की परंपरा है।
सिख धर्म में मनाया जाता है बंदी छोड़ दिवस
सिख समुदाय के लिए भी यह दिन विशेष महत्व रखता है। इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मान्यता के अनुसार, छठे सिख गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त कराकर अमृतसर लौटे थे। उनकी वापसी की खुशी में दीप जलाए गए थे। आज भी इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष प्रकाश व्यवस्था और धार्मिक आयोजन होते हैं।
इस प्रकार दीपावली अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मुक्ति, विजय, ज्ञान, सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देती है।
2. दीपावली 2026: कब है लक्ष्मी पूजन? जानिए शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है।
इंदौर के लिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त:
- दीपावली: रविवार, 8 नवंबर 2026
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
- सूर्यास्त: शाम लगभग 5:45 बजे
- प्रदोष काल: शाम 5:45 बजे से रात 8:19 बजे तक
- वृषभ स्थिर लग्न: शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक
- लक्ष्मी-गणेश पूजन का प्रमुख मुहूर्त: शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक।
यह मुहूर्त इंदौर के स्थानीय पंचांग के अनुसार है। अन्य शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय गणना के कारण पूजा के समय में अंतर हो सकता है।
दिल्ली में लक्ष्मी पूजन का समय शाम 5:54 से 7:50 बजे तक बताया गया है। इसलिए पूजा का समय तय करते समय अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
रात्रि में विशेष तांत्रिक परंपराओं के अनुसार महानिशीथ काल में भी पूजा की जाती है। इंदौर में इसके लिए रात 11:45 बजे से 12:36 बजे तक का समय बताया गया है। सामान्य गृहस्थ लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न का समय प्रमुख माना जाता है।
3. दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कैसे करें?

दीपावली की शाम घर के मंदिर या पूजा स्थल को स्वच्छ करके मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है।
परंपरागत रूप से पूजा में निम्न सामग्री रखी जाती है:
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर।
- पूजा की चौकी और स्वच्छ वस्त्र।
- रोली, कुमकुम, अक्षत और चंदन।
- पुष्प और पुष्पमाला।
- फल और मिठाई।
- धूप और दीप।
- कलश और पूजन के लिए स्वच्छ जल।
- नई बहीखाता या व्यापारिक लेखा पुस्तिका, जहां यह परंपरा प्रचलित हो।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की सामान्य विधि
पहला चरण: पूजा स्थल की तैयारी
पूजा स्थल को स्वच्छ करके चौकी पर साफ वस्त्र बिछाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें।
दूसरा चरण: संकल्प और पूजन
परिवार के साथ भगवान गणेश का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को पुष्प, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
तीसरा चरण: मां लक्ष्मी का पूजन
मां लक्ष्मी को पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। उनके मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की प्रार्थना करें।
चौथा चरण: कुबेर पूजन
धन के अधिपति भगवान कुबेर का स्मरण कर परिवार और व्यापार में ईमानदारी, उन्नति और आर्थिक स्थिरता की कामना करें।
पांचवां चरण: आरती
अंत में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य पूजा में शामिल हों और प्रसाद ग्रहण करें।
पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग हो सकती है।
4. दीपावली पर क्या करना चाहिए? इन शुभ कार्यों का है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ दीपावली सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर है।
1. घर और कार्यस्थल की सफाई करें
दीपावली से पहले घर, दुकान और कार्यालय की सफाई करना शुभ माना जाता है। इसका उद्देश्य स्वच्छता और नए आरंभ का संदेश देना है।
2. घर को दीपों और रोशनी से सजाएं
दीपावली पर मिट्टी के दीपक और बिजली की सजावटी लाइटों से घर को रोशन किया जाता है। दीप जलाना प्रकाश, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है।
3. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करें
दीपावली की शाम श्रद्धापूर्वक लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें। परिवार की खुशहाली और सद्बुद्धि की कामना करें।
4. जरूरतमंदों की सहायता करें
दीपावली पर गरीबों और जरूरतमंद परिवारों को भोजन, कपड़े, मिठाई या अन्य उपयोगी वस्तुएं देना अच्छा सामाजिक कार्य है।
5. परिवार और मित्रों के साथ खुशियां बांटें
रिश्तेदारों और मित्रों को शुभकामनाएं दें। पुराने मनमुटाव दूर करने और संबंधों में मिठास लाने का प्रयास करें।
6. व्यापार में ईमानदारी और पारदर्शिता रखें
व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली नए आर्थिक वर्ष और नई शुरुआत का प्रतीक भी है। इस अवसर पर बहीखातों का पूजन और कारोबार में उन्नति की कामना की जाती है।
7. पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाएं
दीपावली पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी का ध्यान रखें। कम प्रदूषण वाली और सुरक्षित सजावट को प्राथमिकता दें।
5. दीपावली पर क्या नहीं करना चाहिए? इन बातों का रखें ध्यान
दीपावली खुशियों का पर्व है। इस दौरान कुछ ऐसी बातों से बचना चाहिए, जो धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं हैं।
1. घर में गंदगी न रखें
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान पर निवास करती हैं। इसलिए घर और पूजा स्थल को साफ रखें।
2. किसी का अपमान या अपशब्दों का प्रयोग न करें
दीपावली के दिन परिवार और समाज में प्रेम तथा सौहार्द बनाए रखना चाहिए। किसी के साथ कटु व्यवहार करने से बचें।
3. नशे और अनुचित व्यवहार से दूर रहें
त्योहार के दौरान संयम और मर्यादा बनाए रखें। नशे के कारण दुर्घटना और पारिवारिक विवाद की आशंका बढ़ सकती है।
4. दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च न करें
दीपावली का अर्थ अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करना नहीं है। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार ही खरीदारी करें।
5. आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण और दुर्घटनाओं से बचें
पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और पशु-पक्षियों को परेशानी हो सकती है। सुरक्षित विकल्प के रूप में बिजली की सजावटी लाइटों और पारंपरिक रोशनी को प्राथमिकता दें।
6. भोजन की बर्बादी न करें
त्योहार पर जरूरत से अधिक भोजन बनाकर उसे बर्बाद करने से बचें। जरूरतमंदों के साथ भोजन साझा करना बेहतर है।
7. किसी के साथ भेदभाव न करें
दीपावली का मूल संदेश प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता है। इस दिन सभी के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करें।
6. दीपावली पर दीपक जलाते समय रखें ये सावधानियां
दीप जलाने की परंपरा दीपावली की सबसे सुंदर विशेषताओं में से एक है। हालांकि, घर में खुली लौ के कारण दुर्घटना की आशंका भी रहती है।
- दीपक को सुरक्षित और स्थिर स्थान पर रखें।
- पर्दे, कागज, कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
- बच्चों को जलते दीपक और लौ से दूर रखें।
- घर में सजावटी बिजली की लाइटों के तारों को सुरक्षित रखें।
- बिजली के उपकरणों पर अनावश्यक भार न डालें।
- पूजा स्थल पर दीपक की निगरानी किसी बड़े व्यक्ति द्वारा की जाए।
- पालतू पशुओं और छोटे बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
त्योहार की खुशी तभी सार्थक है, जब सभी लोग सुरक्षित रहें।
7. दीपावली 2026: पांच दिवसीय दीपोत्सव का पूरा कैलेंडर
दीपावली का उत्सव केवल एक दिन नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला पर्व है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर होता है।
| पर्व | तारीख 2026 | धार्मिक महत्व |
|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर, शुक्रवार | भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर का पूजन |
| नरक चतुर्दशी / छोटी दीपावली | 8 नवंबर, रविवार | भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की स्मृति |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजन | 8 नवंबर, रविवार | मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर, मंगलवार | भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत का पूजन |
| भाई दूज | 11 नवंबर, बुधवार | भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का पर्व |
विशेष: वर्ष 2026 में नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली एक ही नागरिक तारीख यानी 8 नवंबर को पड़ रही हैं। तिथियों के सूर्योदय और प्रदोष काल में पड़ने के आधार पर ऐसा संयोग बन सकता है।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन स्वास्थ्य, आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
नरक चतुर्दशी का महत्व
इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने की मान्यता जुड़ी हुई है। यह बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
गोवर्धन पूजा का महत्व
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा का स्मरण किया जाता है। कई स्थानों पर अन्नकूट का आयोजन होता है और भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
भाई दूज का महत्व
भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों के प्रति स्नेह और सुरक्षा का संकल्प व्यक्त करते हैं।
8. दीपावली का आध्यात्मिक संदेश: केवल घर नहीं, मन भी रोशन करें
दीपावली का सबसे बड़ा संदेश यह है कि मनुष्य को अपने भीतर के अंधकार को दूर करना चाहिए।
मन में मौजूद ईर्ष्या, अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मकता को दूर करके प्रेम, करुणा, सत्य और सद्भाव को अपनाना ही इस पर्व की वास्तविक भावना है।
दीपक की छोटी-सी लौ यह सिखाती है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक किरण उसे दूर करने की क्षमता रखती है।
इसलिए दीपावली पर केवल घरों को ही नहीं, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार को भी प्रकाशमय बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
निष्कर्ष
दीपावली भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, पारिवारिक प्रेम और सकारात्मक जीवन का संदेश देता है। वर्ष 2026 में 8 नवंबर को मनाई जाने वाली दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और आपसी सद्भाव को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस दीपावली पर संकल्प लें कि घर में रोशनी के साथ जीवन में भी ज्ञान, प्रेम, ईमानदारी और खुशियों का उजाला फैलाएंगे।
मृदुभाषी की ओर से सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपका जीवन सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रकाश से आलोकित रहे।


