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BCCI चयन समिति की रेस में वसीम जाफर की एंट्री, पार्थिव पटेल ने नहीं किया आवेदन; पांचवें चयनकर्ता पर जल्द फैसला

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अजीत अगरकर के बाद खाली पद भरने की प्रक्रिया तेज, रमेश पोवार और सलिल अंकोला समेत कई पूर्व क्रिकेटरों के नाम चर्चा में; नए चयनकर्ता की नियुक्ति से मुख्य चयनकर्ता के पद को लेकर भी बदल सकते हैं समीकरण

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सीनियर पुरुष चयन समिति में पांचवें चयनकर्ता की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर की दावेदारी ने इस प्रक्रिया को दिलचस्प बना दिया है। जाफर उन पूर्व क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिनका क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने वर्चुअल इंटरव्यू लिया है। वहीं, इस पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने आवेदन नहीं किया है। अब क्रिकेट सलाहकार समिति को चयन प्रक्रिया पूरी कर नए सदस्य के नाम पर फैसला करना है।

इस पद के लिए पूर्व भारतीय स्पिनर रमेश पोवार, पूर्व तेज गेंदबाज सलिल अंकोला और बड़ौदा के पूर्व क्रिकेटर जैकब मार्टिन तथा कॉनर विलियम्स के नाम भी सामने आए हैं। नए चयनकर्ता की नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे चयन समिति के नेतृत्व और मुख्य चयनकर्ता के पद को लेकर समीकरण बदल सकते हैं।

अजीत अगरकर के जाने के बाद खाली हुआ पद

सीनियर पुरुष चयन समिति में यह पद अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता पद से हटने के बाद खाली हुआ। इसके बाद बीसीसीआई ने नए चयनकर्ता की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए। फिलहाल पूर्व भारतीय बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर चयन समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

हालांकि, यह नियुक्ति केवल समिति में एक खाली स्थान भरने तक सीमित नहीं है। नए सदस्य के आने के बाद समिति की वरिष्ठता और नेतृत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है। बीसीसीआई के संविधान में चयन समिति के अध्यक्ष के निर्धारण के लिए टेस्ट क्रिकेट में खेलने के अनुभव को महत्व दिया गया है। ऐसे में नए सदस्य के रूप में किसी अनुभवी टेस्ट क्रिकेटर की नियुक्ति का असर समिति की कमान पर भी पड़ सकता है।

कैसे चुना जाता है मुख्य चयनकर्ता?

बीसीसीआई के संविधान के मुताबिक, पांच सदस्यीय सीनियर चयन समिति में सबसे अधिक टेस्ट मैच खेलने वाले चयनकर्ता को अध्यक्ष बनाया जाता है। इसी नियम के कारण वसीम जाफर की दावेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जाफर ने भारतीय टीम की ओर से 31 टेस्ट मैच खेले हैं, जबकि प्रज्ञान ओझा के नाम 24 टेस्ट मैच हैं। यदि जाफर को चयन समिति में शामिल किया जाता है, तो टेस्ट मैचों में उनके अनुभव के आधार पर वह ओझा से आगे होंगे। हालांकि, नए चयनकर्ता की नियुक्ति और समिति के नेतृत्व को लेकर अंतिम स्थिति बीसीसीआई की आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

घरेलू क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज हैं वसीम जाफर

वसीम जाफर को भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिना जाता है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 19 हजार से अधिक रन बनाए हैं। मुंबई और विदर्भ की ओर से खेलते हुए उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

जाफर का अनुभव केवल खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि कोचिंग और मार्गदर्शन के क्षेत्र में भी रहा है। वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोचिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा भारत और बांग्लादेश की अंडर-19 टीमों के साथ भी काम कर चुके हैं। वह विदर्भ के सलाहकार रहे हैं और 2026-27 के घरेलू सत्र में हैदराबाद टीम के मेंटर की भूमिका निभा रहे हैं।

घरेलू क्रिकेट की गहरी समझ, खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करने का अनुभव और कोचिंग से जुड़ाव उनकी दावेदारी को मजबूती देने वाले पहलू माने जा रहे हैं। चयनकर्ता की भूमिका में इन अनुभवों का इस्तेमाल खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने और टीम संयोजन तैयार करने में किया जा सकता है।

रमेश पोवार और सलिल अंकोला भी दौड़ में

वसीम जाफर के अलावा रमेश पोवार और सलिल अंकोला भी सीनियर चयन समिति के खाली पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं।

रमेश पोवार: पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर पोवार ने भारत के लिए दो टेस्ट और 31 वनडे मैच खेले हैं। वह दो अलग-अलग कार्यकाल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इससे पहले उन्हें जूनियर पुरुष चयन समिति के प्रमुख पद के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। ऐसे में सीनियर चयन समिति में उनकी संभावित नियुक्ति पर भी नजर बनी हुई है।

सलिल अंकोला: मुंबई के पूर्व तेज गेंदबाज अंकोला ने भारत के लिए एक टेस्ट और 20 वनडे मैच खेले हैं। वह जनवरी 2023 से अगस्त 2024 तक राष्ट्रीय चयनकर्ता रहे थे। बाद में क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उनकी जगह अजय रात्रा को चयन समिति में शामिल किया गया था। राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में पहले काम कर चुके होने के कारण अंकोला का अनुभव भी इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इनके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन और कॉनर विलियम्स के नाम भी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल बताए गए हैं। मार्टिन भारतीय टीम की ओर से 10 वनडे मैच खेल चुके हैं।

जूनियर चयन समिति के समीकरण भी बदल सकते हैं

सीनियर चयन समिति की नियुक्ति का असर जूनियर पुरुष चयन समिति पर भी पड़ सकता है। रमेश पोवार को पहले जूनियर चयन समिति के शीर्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। यदि उन्हें सीनियर चयन समिति में जगह मिलती है, तो जूनियर पैनल के लिए दूसरे नामों पर विचार किए जाने की संभावना बन सकती है।

इस संदर्भ में पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज डोड्डा गणेश और अर्जुन यादव के नाम भी जूनियर चयन समिति में शामिल किए जाने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों को लेकर अंतिम तस्वीर संबंधित चयन प्रक्रिया और बीसीसीआई के फैसले के बाद ही साफ होगी।

2027 वनडे विश्व कप से पहले क्यों अहम है नियुक्ति?

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वर्ष 2027 में होने वाला वनडे विश्व कप एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। ऐसे में सीनियर चयन समिति में खाली पद को भरना और उसके नेतृत्व को स्पष्ट करना बीसीसीआई के लिए अहम माना जा रहा है।

आने वाले समय में चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करने, टीम संयोजन तय करने, युवा प्रतिभाओं को अवसर देने और बड़े टूर्नामेंट की तैयारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे। ऐसे में चयन समिति में अनुभवी सदस्यों की भूमिका और उनके बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण होगा।

नए चयनकर्ता की नियुक्ति के साथ यह भी देखना होगा कि समिति का मौजूदा नेतृत्व बरकरार रहता है या वरिष्ठता के आधार पर कोई बदलाव होता है। फिलहाल क्रिकेट सलाहकार समिति पांचवें सीनियर चयनकर्ता के नाम को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

वसीम जाफर की दावेदारी, रमेश पोवार और सलिल अंकोला जैसे अनुभवी क्रिकेटरों के नाम तथा पार्थिव पटेल का आवेदन नहीं करना इस चयन प्रक्रिया को चर्चा में बनाए हुए है। अब सभी की नजर बीसीसीआई के अंतिम फैसले पर है, जिससे न केवल पांचवें चयनकर्ता का नाम स्पष्ट होगा, बल्कि सीनियर चयन समिति के नेतृत्व को लेकर भी स्थिति साफ हो सकती है।

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