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Sonia Gandhi X Post: राजीव गांधी से पहली मुलाकात, प्यार की शुरुआत और जिंदगी के अनकहे किस्से; सोनिया गांधी की किताब में क्या है खास?

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Sonia Gandhi Book Belonging: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पहला पोस्ट साझा कर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपनी प्रेम कहानी की शुरुआत से जुड़ी यादें ताजा कीं। उन्होंने कैम्ब्रिज के उस ग्रीक रेस्तरां का जिक्र किया, जहां दोनों की पहली मुलाकात हुई थी। उनकी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ में बचपन से लेकर नेहरू-गांधी परिवार में बिताए वर्षों और जीवन की बड़ी त्रासदियों तक का वर्णन किया गया है।

सोनिया गांधी ने X पर साझा किया पहला पोस्ट

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पहला पोस्ट साझा किया है। इसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपनी पहली मुलाकात और प्यार की शुरुआत से जुड़ी यादें साझा कीं। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने अपनी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ की झलक भी दिखाई।

सोनिया गांधी ने वीडियो में बताया कि जब वह इंग्लैंड में थीं, तब अपनी पसंद का खाना मिलने वाली जगह तलाश रही थीं। इसी दौरान उन्हें कैम्ब्रिज में एक ग्रीक रेस्तरां मिला। यहीं एक मित्र ने पहली बार उनका परिचय राजीव गांधी से कराया था।

अपनी यादों को साझा करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यहीं से उनके प्यार की शुरुआत हुई और दोनों ने मिलकर यादों की एक खूबसूरत दुनिया बनाई।

पहली मुलाकात में ही राजीव गांधी पसंद आ गए थे

सोनिया गांधी ने राजीव गांधी के साथ अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें लगभग तुरंत महसूस हो गया था कि राजीव ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपनी जिंदगी बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव गांधी भी उनके बारे में ऐसा ही महसूस करते थे।

उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई। वे पार्टियों में जाते, घूमते और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताते थे।

राजीव गांधी के व्यक्तित्व के बारे में सोनिया गांधी ने कहा कि वह बेहद सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व आकर्षक था और उनके व्यवहार में सहजता साफ दिखाई देती थी।

10 नवंबर को लॉन्च होगी ‘Belonging: A Journey of Love’

सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों, बचपन की यादों, राजीव गांधी से मुलाकात और भारत में जीवन की नई शुरुआत के अनुभवों को साझा किया है।

पुस्तक की शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में बीते उनके बचपन से होती है। इसके बाद इसमें कैम्ब्रिज में बिताए दिनों और वर्ष 1965 में राजीव गांधी से हुई मुलाकात का वर्णन है।

किताब में राजीव गांधी से शादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात और नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने के अनुभवों का भी जिक्र किया गया है।

इटली से भारत तक का सफर और नई संस्कृति को अपनाने की कहानी

सोनिया गांधी के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू इटली से भारत आने के बाद यहां की संस्कृति के साथ तालमेल बैठाना रहा। पुस्तक में हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय खानपान व परंपराओं को अपनाने के उनके अनुभवों का उल्लेख है।

यह सिर्फ एक राजनीतिक परिवार में प्रवेश की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के जीवन का विवरण भी है, जिसने अलग भाषा, संस्कृति और सामाजिक परिवेश में अपनी जगह बनाई।

संजय गांधी की मौत से लेकर इंदिरा और राजीव गांधी की हत्या तक का जिक्र

पुस्तक में गांधी परिवार को झकझोर देने वाली कई बड़ी त्रासदियों का भी वर्णन किया गया है। इनमें विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत, वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं।

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। पुस्तक में इस दौर के अनुभवों और परिवार पर पड़े प्रभावों का उल्लेख भी किया गया है।

1998 में बनीं कांग्रेस अध्यक्ष, 2017 तक संभाली कमान

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने तत्काल राजनीति में प्रवेश नहीं किया। हालांकि, 1990 के दशक में कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ने लगीं।

वर्ष 1997 में उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और वर्ष 1998 में पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वह 2017 तक इस पद पर रहीं। उनका कार्यकाल कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे अध्यक्षीय कार्यकालों में से एक रहा।

सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की और बाद के वर्षों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी UPA के गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

2004 में प्रधानमंत्री बनने से किया था इनकार

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को सफलता मिली। चुनाव के बाद सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग उठी और गठबंधन के कई सहयोगियों ने उनके नेतृत्व का समर्थन किया।

हालांकि, सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। 18 मई 2004 को उन्होंने इस पद से पीछे हटने का फैसला किया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता साफ हुआ।

इस फैसले को भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। उस समय सोनिया गांधी की विदेशी मूल की पृष्ठभूमि को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई थी।

मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने पर लिखी गई किताब

डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी पुस्तक ‘The Accidental Prime Minister’ में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने और तत्कालीन सत्ता व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रम का वर्णन किया था। बाद में इसी नाम से फिल्म भी बनी।

सोनिया गांधी की नई पुस्तक में उनके व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक सफर के विभिन्न पहलुओं को उनके अपने नजरिए से जानने का अवसर मिलेगा।

निजी यादों से राजनीतिक सफर तक की कहानी

सोनिया गांधी की ‘Belonging: A Journey of Love’ उनके जीवन के निजी और सार्वजनिक दोनों पहलुओं को सामने लाने वाली पुस्तक है। राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्रेम की शुरुआत से लेकर परिवार की त्रासदियों और भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका तक, पुस्तक में जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं।

X पर साझा किए गए पहले पोस्ट के जरिए सोनिया गांधी ने अपनी कहानी के उस भावनात्मक हिस्से की झलक दिखाई है, जिसकी शुरुआत कैम्ब्रिज के एक ग्रीक रेस्तरां में हुई मुलाकात से हुई थी।

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