बारिश, भ्रामक घोषणा और सुरक्षा इंतजामों में कथित चूक से मची भगदड़; VIP एंट्री पर रोक की तैयारी, जांच के घेरे में पूजा आयोजक
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने उत्सव के बीच मातम पसरा दिया। हादसे में 19 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने राहत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये और हादसे में घायल लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घटना की जांच के बीच पूजा आयोजकों और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, मृतकों में 18 लोग पश्चिम बंगाल के निवासी थे। हादसे के बाद शवों को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि परिवारों को आवश्यक सहायता मिल सके। प्रशासन के अनुसार, शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान भी अधिकारियों की मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
VIP प्रवेश पर लग सकती है रोक, भीड़ नियंत्रण के लिए नए कदम
हादसे के बाद राज्य सरकार दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बरतने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर पंडालों में दर्शकों के प्रवेश को सीमित किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने VIP प्रवेश की अनुमति नहीं देने की बात कही है।
इस कदम का उद्देश्य पंडालों में अनियंत्रित भीड़ को रोकना और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते, पर्याप्त पुलिस बल, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों, एंबुलेंस तथा आपातकालीन निकासी व्यवस्था की अहमियत को सामने ला दिया है।
कैसे बेकाबू हुए हालात? बारिश और घोषणा से बढ़ी घबराहट
प्रारंभिक जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार शाम अचानक हुई बारिश के बाद पंडाल के बाहर इंतजार कर रहे लोग भीगने से बचने के लिए अंदर जाने की कोशिश करने लगे। दूसरी ओर, पंडाल के भीतर मौजूद लोग बारिश के कारण बाहर निकलने से बच रहे थे। इससे प्रवेश और निकास के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ गया।
इसी दौरान पंडाल का ढांचा गिरने की आशंका से जुड़ी एक घोषणा किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस घोषणा से लोगों में घबराहट और बढ़ गई। बाहर निकलने की कोशिश में कई लोग तेजी से प्रवेश द्वार की ओर बढ़े, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई।
पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजामों और मौके पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
छह या सात गिरफ्तार? आरोपियों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी
घटना के बाद पुलिस ने पूजा आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारियों और सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक, छह लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में रखा गया है। वहीं, पुलिस कार्रवाई से जुड़ी एक अन्य जानकारी में सात लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत मामला दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर केस दर्ज किया है और घटना के दौरान सुरक्षा इंतजामों, आयोजकों की भूमिका तथा कथित लापरवाही की जांच की जा रही है।
गिरफ्तार लोगों की संख्या को लेकर सामने आए इस अंतर की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।
हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में होगी तथ्य-जांच
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि घटना की जांच के लिए गठित तथ्य-जांच टीम की अगुवाई उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश करेंगे। सरकार ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
जांच में भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन निकासी, पुलिस और निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती तथा आयोजकों की तैयारियों जैसे पहलुओं की पड़ताल किए जाने की संभावना है।
ममता बनर्जी की पार्टी ने सरकार और पुलिस पर उठाए सवाल
हादसे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और कोलकाता पुलिस की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि हादसे के समय पंडाल में पर्याप्त पुलिसकर्मी, नागरिक स्वयंसेवक और एंबुलेंस मौजूद नहीं थे।
टीएमसी ने चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के मुख्य संरक्षक के रूप में सूचीबद्ध मुख्यमंत्री के भतीजे देबदीप अधिकारी का नाम भी उठाया है। पार्टी ने प्रशासन की तैयारियों और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था पर जवाब मांगा है।
हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।
25 घायलों को मिलेगी आर्थिक सहायता, दो ICU में भर्ती
मुख्यमंत्री के अनुसार, हादसे में घायल हुए 25 लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विजय सम्मेलन कार्यक्रम में मृतकों को श्रद्धांजलि देने और घायलों के परिवारों को मुआवजे के चेक सौंपने की योजना है।
घायलों में से दो को गंभीर स्थिति के कारण आईसीयू में रखा गया है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को कोलकाता के एक निजी अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती घायलों का हालचाल जाना। अस्पताल में भर्ती 14 घायलों में से एक को छोड़कर बाकी लोगों की हालत काफी हद तक स्थिर बताई गई है।
बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
कोलकाता के इस हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप प्रवेश और निकास द्वार, भीड़ की आवाजाही पर निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
फिलहाल, मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचाने और घायलों के उपचार पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, हादसे के कारणों की जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में किन खामियों की पुष्टि होती है और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।