Mradubhashi, Israel Election Results: इजराइल के संसदीय चुनाव के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विदेशी फंडिंग के जरिए चुनाव को प्रभावित करने के आरोपों की जांच के आदेश दिए गए हैं। शुरुआती रुझानों में बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें, जबकि गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाती दिख रही हैं।

यरुशलम। इजराइल में संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक अनिश्चितता गहरा गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत के आंकड़े से दूर है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रहा। इस बीच चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप और कथित फंडिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने चुनाव में विदेशी संस्थाओं की कथित फंडिंग के जरिए अनुचित प्रभाव डालने के आरोपों की जांच के लिए सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को निर्देश दिया है। एजेंसी से एक सप्ताह के भीतर जांच के निष्कर्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। हालांकि, चुनाव समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकते।
चुनाव में विदेशी दखल के आरोप, कतर और तुर्किये पर भी संदेह
चुनाव के बाद सामने आए आरोपों में दावा किया गया है कि विदेशी संस्थाओं से मिले धन का इस्तेमाल इजराइल और वेस्ट बैंक में चुनावी गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए किया गया हो सकता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने कतर और तुर्किये से कथित तौर पर धन भेजे जाने को लेकर संदेह जताया है। हालांकि, इन देशों की भूमिका या कथित फंडिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
केंद्रीय चुनाव समिति ने विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े संदेहों को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अब शिन बेट की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत मिलता है या नहीं।
गौरतलब है कि चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर पुलिस ने भी निष्पक्ष जांच की बात कही है। इससे पहले पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि व्यापक स्तर पर चुनावी धांधली के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत सामने नहीं आया है।
नेतन्याहू को 53, विपक्ष को 48 सीटें मिलने का अनुमान

इजराइल की 120 सदस्यीय संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
28 अक्टूबर को उपलब्ध मतगणना के आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान था। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने का अनुमान था।
इन आंकड़ों से साफ है कि किसी भी पक्ष के लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं है। नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से आठ सीटें दूर है, जबकि विपक्षी गठबंधन को बहुमत तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।
अरब पार्टियों की सीटें इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, विपक्षी गठबंधन के कई नेताओं ने इन पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर पहले आपत्तियां जताई थीं। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति अहम रहने वाली है।
अरब पार्टी के नेता ने नेतन्याहू पर साधा निशाना

चुनाव परिणामों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बलाद पार्टी के प्रमुख सामी अबू शहादेह ने नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें चुनावी नतीजों को स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी हस्तक्षेप और वोट खरीदने से जुड़े आरोपों का इस्तेमाल चुनाव परिणामों पर सवाल उठाने के लिए किया जा रहा है।
दूसरी ओर, नेतन्याहू के गठबंधन से जुड़े कुछ नेताओं ने कथित विदेशी फंडिंग के मामले में अरब पार्टियों के नेताओं से पूछताछ और कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, आरोपों और राजनीतिक बयानों को जांच में साबित हुए तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही सामने आएंगे।
वोट खरीदने के आरोप में चार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
चुनाव के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं को पैसे देने के मामले में राअम पार्टी से जुड़े चार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, पुलिस को संदेह है कि ये लोग चुनाव के दौरान मतदाताओं को पैसे देने की योजना में शामिल थे। यह मामला मतदान के दिन गिरफ्तार किए गए तीन बेदुइन लोगों से जुड़ा बताया गया है।
राअम पार्टी ने गिरफ्तार लोगों को अपने कार्यकर्ता बताया, लेकिन उन पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
इस मामले में भी आरोपों की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
विपक्षी नेता आइजनकोट बोले- जांच के बहाने शपथ ग्रहण में देरी न हो

विपक्षी याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जांच के नाम पर नई संसद के शपथ ग्रहण में देरी नहीं होनी चाहिए।
आइजनकोट के मुताबिक, चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब चुनावी नतीजों ने सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। दोनों प्रमुख गठबंधन बहुमत से दूर हैं और आगे की राजनीतिक रणनीति काफी हद तक अन्य दलों के रुख पर निर्भर करेगी।
सैनिकों ने किया 79.9 प्रतिशत मतदान
इजराइल के चुनाव में इस बार सेना के जवानों की भागीदारी भी चर्चा में रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सैनिकों के बीच मतदान प्रतिशत 79.9 रहा, जो पिछली बार की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
सेना के जवानों के अलावा राजनयिकों, पुलिसकर्मियों, जेलों में बंद मतदाताओं और कुछ अन्य श्रेणियों के मतदाताओं के वोटों की गिनती अलग प्रक्रिया के तहत की जाती है। ऐसे मतपत्रों को डबल-एनवेलप बैलेट कहा जाता है।
इन मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद ही अंतिम चुनावी तस्वीर स्पष्ट होगी। हालांकि, उपलब्ध शुरुआती अनुमानों में सीटों के बंटवारे में बड़े बदलाव की संभावना कम बताई गई थी।
बाढ़ के बीच हेलीकॉप्टर से पहुंचाई गईं मतपेटियां
इजराइल में चुनाव के दौरान दक्षिणी इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कुछ सड़कों के बंद होने से मतपेटियों को समय पर केंद्रीय चुनाव समिति तक पहुंचाना चुनौती बन गया।
ऐसी स्थिति में सेना ने हेलीकॉप्टर की मदद से कुछ मतपेटियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, ताकि मतगणना प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ सके।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि चुनाव के दौरान मौसम की खराब स्थिति ने भी प्रशासन के सामने चुनौतियां खड़ी कीं।
अब आगे क्या होगा?
इजराइल के चुनाव परिणामों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी।
नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे होने के बावजूद बहुमत से दूर है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों को भी सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। अरब पार्टियों को मिली अनुमानित 19 सीटें इस राजनीतिक गणित में अहम हो सकती हैं।
इसके साथ ही विदेशी फंडिंग और चुनाव में संभावित हस्तक्षेप की जांच भी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। शिन बेट की जांच रिपोर्ट से आरोपों की पुष्टि या खंडन करने में मदद मिल सकती है।