मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह दबाव भरा रहा। प्रमुख सूचकांकों ने लगातार छठे सप्ताह गिरावट दर्ज की, जो 2020 के बाद सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला बताया गया है। निवेशकों के बीच महंगे कच्चे तेल, वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी 50 में 0.33 प्रतिशत की बढ़त जरूर देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह के आधार पर निफ्टी करीब 0.22 प्रतिशत नीचे रहा। सेंसेक्स ने सप्ताह के दौरान लगभग 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की।
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में कच्चे तेल की कीमतों का ऊंचे स्तर पर रहना शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेज उछाल महंगाई, रुपये और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है।
अमेरिकी मौद्रिक नीति भी निवेशकों की नजर में है। ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बना सकती हैं। इसी वजह से आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों के रुख पर बाजार की नजर रहेगी।







