भारतीय रुपये पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.8750 के स्तर पर बंद हुआ और पूरे सप्ताह में करीब 0.3 प्रतिशत कमजोर रहा। वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व से जुड़ी अनिश्चितताओं को रुपये की चाल के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
बाजार की नजर अब 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेडर्स इस स्तर को महत्वपूर्ण मान रहे हैं और बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित मौजूदगी पर भी नजर रखी जा रही है। कमजोर रुपया आयात को महंगा कर सकता है, विशेषकर कच्चे तेल जैसी डॉलर में खरीदी जाने वाली वस्तुओं की लागत पर इसका असर पड़ता है।






