आज 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर मनाई जा रही दीपावली; इंदौर में शाम 6:10 से 8:08 बजे तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, घर की सजावट से लेकर पूजा की तैयारी तक जानिए हर जरूरी बात। अयोध्या में दीपोत्सव, कोलकाता में काली पूजा और अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस रहेगा विशेष आकर्षण।
मृदुभाषी डेस्क नई दिल्ली। रोशनी, खुशियों और समृद्धि का महापर्व दीपावली आज रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और पकवान बनाने का सिलसिला जारी है। बाजारों में मिठाइयों, फूलों, पूजन सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। शाम होते ही घरों, मंदिरों, बाजारों और प्रतिष्ठानों में दीपों की रोशनी बिखरेगी।
दीपावली का पर्व केवल मां लक्ष्मी की पूजा और धन-समृद्धि की कामना तक सीमित नहीं है। यह अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक भी है। इस दिन भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा से की गई पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
इस बार दीपावली की तारीख को लेकर भी लोगों के बीच उत्सुकता रही। पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर ही मुख्य दीपावली और लक्ष्मी पूजन किया जा रहा है। आइए जानते हैं आज का शुभ मुहूर्त, पूजा की पूरी विधि, देशभर में होने वाले विशेष आयोजन और दीपावली से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें, जिन्हें जानना हर किसी के लिए दिलचस्प होगा।

1. दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। सूर्यास्त के बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस दौरान स्थिर लग्न में पूजा करना शुभ माना जाता है।
इस वर्ष 8 नवंबर को अमावस्या तिथि सुबह 11:27 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। दिल्ली की पंचांग गणना के अनुसार लक्ष्मी पूजन का मुख्य मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| दीपावली | रविवार, 8 नवंबर |
| इंदौर में लक्ष्मी पूजन | शाम 6:10 से 8:08 बजे |
| इंदौर में प्रदोष काल | शाम 5:45 से 8:19 बजे |
| दिल्ली में लक्ष्मी पूजन | शाम 5:54 से 7:50 बजे |
| अमावस्या प्रारंभ | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
| अमावस्या समाप्त | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
इंदौर में लक्ष्मी पूजन के लिए लगभग एक घंटा 58 मिनट का शुभ समय बताया गया है। भोपाल सहित अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग और सूर्यास्त के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय मुहूर्त को प्राथमिकता दें। Drikpanchang+1
2. घर पर कैसे करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा?

दीपावली की शाम घरों में विशेष लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं।
पूजा के लिए बहुत अधिक जटिल विधि की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव से की गई पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
पूजा से पहले इन चीजों की करें तैयारी
- घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
- मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और फूलों से सजावट करें।
- पूजा स्थल पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं।
- मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई, कलश और पंचामृत तैयार रखें।
- चांदी के सिक्के, बहीखाते और तिजोरी की पूजा की तैयारी भी कर सकते हैं।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि
- सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर बैठकर भगवान गणेश का स्मरण करें।
- कलश स्थापित करें और भगवान गणेश का पूजन करें।
- इसके बाद मां लक्ष्मी को फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
- मां सरस्वती और भगवान कुबेर का भी स्मरण करें।
- लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीप जलाएं।
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
पूजा के समय मन शांत रखें। घर में कलह और नकारात्मकता से बचें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें। दीपावली पर धन की पूजा के साथ ईमानदारी, परिश्रम और अच्छे कर्मों का संकल्प लेना भी इस पर्व के संदेश को सार्थक बनाता है।
3. दीपावली पर झाड़ू, कौड़ी और कमल के फूल का क्या है महत्व?
दीपावली की पूजा से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका पालन देश के अलग-अलग हिस्सों में किया जाता है।
झाड़ू की परंपरा: धनतेरस या दीपावली पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इसे स्वच्छता और घर से नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि स्वच्छ घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
कौड़ी का महत्व: पीली या सफेद कौड़ियों को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। कई परिवार पूजा के समय कौड़ियां रखते हैं और पूजा के बाद इन्हें अपनी तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं।
कमल का फूल: कमल को मां लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी कमल पर विराजमान रहती हैं। कमल का फूल पवित्रता और सकारात्मकता का भी प्रतीक है।
दीपक जलाने की परंपरा: दीपक ज्ञान, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है। घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीप जलाने की परंपरा इसी भावना से जुड़ी है।
ये सभी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, जिन्हें श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
4. देशभर में दीपावली पर क्या रहेगा खास?

भारत में दीपावली एक ऐसा त्योहार है, जिसे अलग-अलग राज्यों में अपनी विशिष्ट परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। कहीं भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का उत्सव है तो कहीं मां काली की आराधना और कहीं गुरु हरगोबिंद साहिब जी की स्मृति में बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है।
अयोध्या: रामनगरी में दीपोत्सव का आकर्षण
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीपावली का विशेष महत्व है। यहां दीपोत्सव के अवसर पर सरयू नदी के घाटों, मंदिरों और प्रमुख मार्गों को दीपों से सजाया जाता है। रामायण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरयू आरती और धार्मिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
अयोध्या का दीपोत्सव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है। देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं।
कोलकाता: दीपावली के साथ मां काली की आराधना
पश्चिम बंगाल में दीपावली के अवसर पर काली पूजा का विशेष महत्व है। कोलकाता में मां काली के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं। रातभर पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। यहां दीपावली का उत्सव मां काली की आराधना के साथ विशेष रूप ले लेता है।
अमृतसर: बंदी छोड़ दिवस की विशेष परंपरा
सिख समुदाय के लिए दीपावली का दिन बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी महत्वपूर्ण है। यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई और उनके साथ 52 राजाओं की मुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में रोशनी और धार्मिक आयोजन विशेष आकर्षण रहते हैं।
मध्यप्रदेश: दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा की तैयारी
मध्यप्रदेश में दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर गौपूजन और सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
दक्षिण भारत: नरकासुर पर भगवान कृष्ण की विजय का उत्सव
दक्षिण भारत में दीपावली की परंपराओं में नरकासुर वध की कथा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी और दीपावली के आयोजन किए जाते हैं।
5. दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए पांच प्रमुख धार्मिक मान्यताएं

दीपावली के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। अलग-अलग धर्मों और क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने के अलग-अलग कारण बताए गए हैं।
1. भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी
मान्यता है कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे थे। नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे। इसी परंपरा को दीपावली से जोड़ा जाता है।
2. भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय
दक्षिण भारत की धार्मिक परंपराओं में नरकासुर वध को दीपावली से जोड़ा जाता है। यह अन्याय और अत्याचार पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
3. मां लक्ष्मी का प्राकट्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी कारण दीपावली पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
4. भगवान महावीर का निर्वाण
जैन धर्म में दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में महत्वपूर्ण है। जैन परंपरा में इसे आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति के प्रकाश से जोड़कर देखा जाता है।
5. सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस
गुरु हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई की स्मृति में सिख समुदाय इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। यह स्वतंत्रता, न्याय और मानवता का संदेश देता है।
6. दीपावली पर क्या करें और किन बातों से बचें?
दीपावली खुशियों का पर्व है, लेकिन उत्सव के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।
ये काम जरूर करें
- घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
- बच्चों को दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताएं।
- जरूरतमंद परिवारों को मिठाई, कपड़े या आवश्यक वस्तुएं दें।
- मिट्टी के दीये और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता दें।
- पर्यावरण के अनुकूल सजावट करें।
- परिवार और पड़ोसियों के साथ खुशियां साझा करें।
इन बातों से बचें
- तेज आवाज और धुएं से होने वाले प्रदूषण से बचें।
- दीपक और मोमबत्तियां पर्दों तथा ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
- जलते दीपकों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
- बिजली की सजावटी लाइटों में खराब तारों और ओवरलोडिंग से बचें।
- मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का ध्यान रखें।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चिंता, पर्यावरण अनुकूल दीपावली पर जोर
दीपावली के समय उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की समस्या भी चिंता का विषय बनी हुई है। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण वायु गुणवत्ता को और खराब कर सकते हैं।
ऐसे में इस बार दीयों, सजावटी लाइटों और पर्यावरण अनुकूल तरीकों से दीपावली मनाने पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए धुएं और तेज आवाज से बचना बेहतर है।
7. दीपावली से जुड़ी 7 रोचक जानकारियां, जो शायद आप नहीं जानते होंगे
1. दीपावली का अर्थ क्या है?
दीपावली शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ और ‘आवली’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है दीपों की पंक्ति।
2. हर जगह दीपावली एक ही तरह नहीं मनाई जाती।
उत्तर भारत में भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी, दक्षिण भारत में नरकासुर वध और पश्चिम बंगाल में मां काली की पूजा का विशेष महत्व है।
3. दीपावली पांच दिनों का उत्सव है।
धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज इस उत्सव के प्रमुख पड़ाव हैं।
4. दीपावली का संबंध केवल धन से नहीं है।
यह ज्ञान, सद्भाव, परिवार, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक प्रकाश का भी पर्व है।
5. दुनिया के कई देशों में मनाई जाती है दीपावली।
नेपाल, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, मॉरीशस, फिजी, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों में भारतीय समुदाय दीपावली मनाता है।
6. जैन धर्म में भी दीपावली का विशेष स्थान है।
जैन परंपरा में भगवान महावीर के निर्वाण की स्मृति में दीप जलाने का महत्व है।
7. दीपावली के बाद आता है देव दीपावली का पर्व।
वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाई जाती है। इस अवसर पर गंगा के घाटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं। यह दीपावली से अलग एक विशेष धार्मिक आयोजन है।
8. दीपावली के बाद कौन-कौन से त्योहार आएंगे?
दीपावली के साथ शुरू हुआ उत्सवों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
| पर्व | महत्व |
|---|---|
| गोवर्धन पूजा | भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, अन्नकूट और गौपूजन |
| भाई दूज | भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व |
| देव दीपावली | कार्तिक पूर्णिमा पर वाराणसी में दीपोत्सव |
गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीखों के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
9. दीपावली का असली संदेश: घर ही नहीं, मन भी रोशन करें
दीपावली का महत्व केवल घरों को सजाने, नए कपड़े पहनने और मिठाइयां बांटने तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, ईर्ष्या, अहंकार और द्वेष को दूर करने की प्रेरणा देता है।
जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक अंधेरे को दूर करने का संदेश देता है, उसी प्रकार जीवन में प्रेम, सहयोग और सद्भाव का एक छोटा-सा प्रयास भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
इस दीपावली पर संकल्प लें कि किसी जरूरतमंद के घर भी खुशियों का दीप जलेगा। किसी उदास चेहरे पर मुस्कान आएगी और परिवारों के बीच प्रेम और विश्वास का रिश्ता और मजबूत होगा।
मृदुभाषी परिवार की ओर से सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आपका जीवन सुख, शांति, समृद्धि और खुशियों के प्रकाश से आलोकित रहे।
