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CJP बोली- ‘आज 10 आए हैं, कल 10,000 आएंगे’

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बैन के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता: पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को लिया हिरासत में

नई दिल्ली। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के सरकार के फैसले के ठीक अगले ही दिन राजधानी दिल्ली में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका अपने समर्थकों के साथ मंगलवार को तमाम बंदिशों को दरकिनार करते हुए जंतर-मंतर पहुंच गए। केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे इन नेताओं को दिल्ली पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया।

‘ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा प्रदर्शन’
हिरासत में लिए जाने के बाद CJP ने अपने आधिकारिक हैंडल से नेताओं का एक वीडियो जारी किया। पुलिस वैन के अंदर से हुंकार भरते हुए पार्टी नेता आशुतोष रांका ने कहा:

“मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक हमारा विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर ही जारी रहेगा। आज हम 10 लोग आए हैं, कल 1000 आएंगे और परसों 10,000 लोग यहां पहुंचेंगे।”

CJP मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में सड़कों पर उतरी हुई है।

33 साल पुराना ऐतिहासिक धरना स्थल बैन
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सोमवार को ही जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है। 33 साल पहले इसे आधिकारिक धरना स्थल घोषित किया गया था, जो ऐतिहासिक अन्ना आंदोलन, पहलवानों के प्रदर्शन और खुद कॉकरोच जनता पार्टी के कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है।

नए प्रदर्शन स्थल: गृह मंत्रालय की सिफारिश पर अब दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और ईस्ट दिल्ली का CBD ग्राउंड ही नए आधिकारिक प्रदर्शन स्थल होंगे।

बैन की वजह: हालांकि सरकार ने कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन संसद भवन से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी और सुरक्षा कारणों को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।

2 दिन पहले ही 50-50 हजार के मुचलके पर छूटे थे टॉप लीडर्स
CJP नेताओं और पुलिस के बीच यह खींचतान पिछले कुछ दिनों से चरम पर है। 10 अक्टूबर को CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में लिया गया था।

11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों नेताओं को 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा किया था। कोर्ट ने शर्त रखी थी कि नेताओं को एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी। लेकिन रिहाई के महज दो दिन बाद ही CJP नेताओं के फिर से जंतर-मंतर पर उतरने से पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

क्या आप इस खबर से संबंधित कोई अन्य पहलू (जैसे सोशल मीडिया रिएक्शन्स या CJP की अगली योजना) भी शामिल करना चाहते हैं?

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