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मोदी कैबिनेट के तीन बड़े फैसले: ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिज और सांख्यिकी सुधार पर ₹21,685 करोड़ खर्च करेगी सरकार

केंद्रीय कैबिनेट के ऊर्जा भंडारण, महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण और VISTAR योजना से जुड़े फैसले।
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HIGHLIGHTS

कैबिनेट ने 92 GWh ऊर्जा भंडारण, लिथियम-निकल प्रसंस्करण और VISTAR योजना के लिए कुल ₹21,685.1 करोड़ मंजूर किए। जानिए तीनों योजनाओं का उद्देश्य।

Cabinet Decisions 2026: 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़, लिथियम-निकल प्रसंस्करण के लिए ₹2,814 करोड़ और VISTAR योजना के लिए ₹4,371.1 करोड़ मंजूर

मृदुभाषी, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण और सरकारी सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने से जुड़े तीन बड़े फैसले लिए गए। सरकार ने ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए ₹14,500 करोड़ की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को मंजूरी दी है। इसके अलावा लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ तथा देश की आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था में बदलाव के लिए VISTAR योजना के तहत ₹4,371.1 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

इन तीनों योजनाओं पर कुल ₹21,685.1 करोड़ खर्च किए जाएंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी।

92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित होगी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए ₹14,500 करोड़ की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding-VGF) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी।

इसके तहत देश में कुल 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें तीन तरह की प्रौद्योगिकियां शामिल हैं:

  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): 30 GWh
  • पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): 60 GWh
  • उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीकें: 2 GWh

VGF के माध्यम से उन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिन्हें शुरुआती लागत और अन्य आर्थिक चुनौतियों के कारण लागू करना मुश्किल हो सकता है। इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी मदद

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से बिजली का उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर जरूरत के समय उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।

बैटरी और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विस्तार से बिजली ग्रिड की स्थिरता बेहतर करने, नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग करने और बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।

लिथियम और निकल के प्रसंस्करण के लिए ₹2,814 करोड़

कैबिनेट ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की पूंजीगत व्यय सहायता योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल चलेगी।

इसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना और उनसे जुड़ी आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है। लिथियम और निकल जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में इन खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योजना के तहत सहायता पाने की विस्तृत पात्रता और अन्य शर्तों का विवरण अलग से जारी किया जाना है।

VISTAR योजना के लिए ₹4,371.1 करोड़ मंजूर

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च (VISTAR) योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर पांच वर्षों में ₹4,371.1 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसका कार्यकाल वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक रहेगा।

योजना का उद्देश्य देश में ऐसा आधुनिक सांख्यिकीय ढांचा तैयार करना है, जो अधिक गतिशील, समयानुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। इसके तहत सरकारी आंकड़ों की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार, डेटा के अधिक विस्तृत विश्लेषण तथा विभिन्न विभागों के आंकड़ों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा।

VISTAR योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • सरकारी आंकड़ों को अधिक समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना।
  • डेटा की विस्तृत और सूक्ष्म जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ाना।
  • अलग-अलग विभागों के डेटा सेट के बीच बेहतर तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करना।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग के अनुकूल डेटाबेस तैयार करना।
  • सांख्यिकीय विश्लेषण और शोध की व्यवस्था को मजबूत करना।

इससे सरकारी योजनाओं के मूल्यांकन, नीतिगत फैसलों और विकास कार्यक्रमों की निगरानी के लिए अधिक उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

कैबिनेट के ये तीनों फैसले अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं, लेकिन इनका साझा उद्देश्य देश की दीर्घकालिक क्षमता को मजबूत करना है। ऊर्जा भंडारण योजना से नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली ग्रिड की स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की योजना घरेलू विनिर्माण और रणनीतिक संसाधनों की आपूर्ति शृंखला को मजबूती दे सकती है।

वहीं, VISTAR योजना सरकारी आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय, समयबद्ध और विश्लेषण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम करेगी। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन, निवेश और तय लक्ष्यों की प्राप्ति पर निर्भर करेगा।

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