SSR Schedule 2026-27: नवंबर में जारी होगी प्रारूप सूची, जानिए एसएसआर और एसआईआर में अंतर, फॉर्म 6, 7 और 8 का उपयोग
नई दिल्ली। मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision-SSR) कराने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत नवंबर 2026 में प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों में सुधार करने और नियमानुसार अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख निर्धारित की गई है। ऐसे में पात्र नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि एसएसआर क्या है, किन राज्यों में यह प्रक्रिया चलेगी, इसकी समय-सीमा क्या है और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या जानकारी में सुधार के लिए कौन-से फॉर्म भरने होंगे।
क्या है एसएसआर और क्यों कराया जाता है?
एसएसआर का पूरा नाम स्पेशल समरी रिवीजन यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण से वंचित न रहे। इसके अंतर्गत नए मतदाताओं के नाम शामिल किए जाते हैं, पहले से दर्ज विवरण में गलतियों को सुधारा जाता है और नियमों के अनुसार अपात्र या अनावश्यक प्रविष्टियों पर कार्रवाई की जाती है।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 25(1) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए गहन पुनरीक्षण, संक्षिप्त पुनरीक्षण और आंशिक गहन व आंशिक संक्षिप्त पुनरीक्षण जैसे तरीके निर्धारित हैं। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और विशेष अभियान जैसी गतिविधियां भी कराई जा सकती हैं।
किन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा एसएसआर?
चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस चरण में निम्नलिखित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराया जाना है:
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
- पंजाब
- राजस्थान
- बिहार
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- पश्चिम बंगाल
- केरल
- असम
- मणिपुर
- तमिलनाडु
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- लक्षद्वीप
- पुडुचेरी
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पूरी की जाएगी।
आयोग के मुताबिक, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, उनके लिए कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भी स्थानीय मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुनरीक्षण कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
एसएसआर 2026-27 का पूरा शेड्यूल
चुनाव आयोग की निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पुनरीक्षण की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
| तारीख | प्रमुख गतिविधि |
|---|---|
| 2 नवंबर 2026 | मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा |
| 12 नवंबर 2026 | प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन |
| 11 दिसंबर 2026 | दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख |
| 28 दिसंबर 2026 | दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई पूरी करने की समय-सीमा |
| 4 जनवरी 2027 | अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन |
ध्यान दें: मतदाताओं को अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट से संबंधित निर्देशों और स्थानीय स्तर पर जारी सूचनाओं की पुष्टि करते रहना चाहिए।
कैसे पूरी होगी एसएसआर की प्रक्रिया?
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में समझा जा सकता है। पहले चरण में प्रारूप मतदाता सूची जारी करने से पहले की तैयारियां होती हैं। दूसरे चरण में प्रारूप सूची प्रकाशित होने के बाद दावों और आपत्तियों के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।
पहला चरण: प्रारूप सूची से पहले की तैयारियां
इस चरण में चुनाव अधिकारियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। बूथ स्तर अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करते हैं। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान करना है, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।
सत्यापन के दौरान सूची में दर्ज संभावित विसंगतियों, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों, स्थान बदल चुके मतदाताओं और मृत मतदाताओं से संबंधित मामलों की पहचान की जाती है। इसके अतिरिक्त पतों को एक समान प्रारूप में दर्ज करने, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण करने और मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड अपडेट करने का काम भी किया जाता है।
इस प्रक्रिया में पूरक मतदाता सूचियों को एकीकृत करके प्रारूप सूची तैयार की जाती है, ताकि अगले चरण में नागरिक सूची देखकर अपने विवरण की जांच कर सकें।
दूसरा चरण: दावे, आपत्तियां और अंतिम मतदाता सूची
12 नवंबर 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को अपने नाम और विवरण की जांच करनी चाहिए। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है, तो वह नियमानुसार नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसी तरह, मतदाता अपने नाम, पते या अन्य विवरणों में त्रुटि होने पर सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मतदाता सूची में दर्ज किसी प्रविष्टि को लेकर निर्धारित आधार पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इन आवेदनों की जांच निर्धारित नियमों के अनुसार करेंगे। जांच पूरी होने के बाद नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में सुधार से संबंधित बदलाव दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम है।
मतदाता सूची में पारदर्शिता के लिए क्या व्यवस्था होगी?
चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और राजनीतिक दलों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कई व्यवस्थाएं निर्धारित की हैं।
- मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची की प्रतियां मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।
- दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि के दौरान राजनीतिक दलों को हर सप्ताह संबंधित सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
- प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
- मतदाता सूची को निर्धारित मतदान केंद्रों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित किया जाएगा।
- नियमित अद्यतन के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और सुधार से संबंधित मासिक सूचियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएंगी।
- आम नागरिक भी निर्धारित शुल्क देकर मतदाता सूची की प्रति प्राप्त कर सकेंगे।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और मतदाताओं तथा राजनीतिक दलों को सूची की जांच का अवसर देना है।
राजनीतिक दल और बूथ एजेंट क्या भूमिका निभाएंगे?
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के स्तर पर समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में पुनरीक्षण की प्रगति और प्रक्रिया से संबंधित जानकारी साझा की जाएगी।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बूथ स्तर एजेंट (BLA) नियुक्त कर सकते हैं। ये एजेंट मतदाता सूची में संभावित गलतियों और विसंगतियों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, उन्हें मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया या बूथ स्तर अधिकारी के आधिकारिक कामकाज में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी।
इसके अतिरिक्त, चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख के तुरंत बाद मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को चुनाव संचालन के लिए मतदाता सूची की प्रति मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी है।
एसएसआर में अधिकारियों की क्या होगी जिम्मेदारी?
चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त कर्मचारी तथा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बीएलओ पर्यवेक्षक और बूथ स्तर अधिकारी शामिल हैं।
मुख्य सचिवों को संबंधित अधिसूचित पद खाली न रहने देने के लिए भी कहा गया है। प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने से लेकर अंतिम सूची जारी होने तक पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी अधिकारी का तबादला जरूरी हो, तो कारण सहित प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से आयोग को भेजना होगा।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी हो। संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुरूप पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
एसएसआर और एसआईआर में क्या अंतर है?
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), दोनों का संबंध मतदाता सूची से है, लेकिन इनके काम करने के तरीके में अंतर है।
एसएसआर में क्या होता है?
इस प्रक्रिया में मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर उसे अपडेट किया जाता है। नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, दर्ज विवरणों में सुधार किया जाता है और नियमानुसार गलत या अपात्र प्रविष्टियों पर कार्रवाई होती है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाना है।
एसआईआर में क्या होता है?
विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाताओं के विवरण का अधिक व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसमें निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी जुटाने और उसकी जांच करने के बाद मतदाता सूची का प्रारूप तैयार किया जाता है। इसके बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं और जांच के आधार पर सूची को अंतिम रूप दिया जाता है।
इस प्रकार, एसएसआर में मौजूदा सूची को अपडेट करने पर जोर रहता है, जबकि एसआईआर में मतदाता विवरण के व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दोनों ही प्रक्रियाओं में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लेने की व्यवस्था होती है।
फॉर्म 6, 7 और 8 का क्या है काम?
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने या विवरण में सुधार करने के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित हैं। नागरिकों को अपनी जरूरत के अनुसार सही फॉर्म का उपयोग करना चाहिए।
फॉर्म 6: नया नाम जुड़वाने के लिए
पात्र भारतीय नागरिक इस फॉर्म के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते हैं या पात्र होने के बावजूद जिनका नाम सूची में दर्ज नहीं है।
फॉर्म 7: नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए
इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर निर्धारित आधार पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है या पहले से दर्ज नाम हटाने का अनुरोध किया जा सकता है। इसके संभावित आधारों में संबंधित व्यक्ति की मृत्यु, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना या नियमानुसार अपात्रता शामिल हो सकती है। ऐसे आवेदनों पर निर्णय संबंधित अधिकारी जांच के बाद करेंगे।
फॉर्म 8: विवरण में सुधार या बदलाव के लिए
पहले से मतदाता सूची में दर्ज नागरिक अपने विवरण में सुधार, पता बदलने या मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) से संबंधित निर्धारित सेवाओं के लिए फॉर्म 8 का उपयोग कर सकते हैं। इसके माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति के रूप में चिह्नित करने का अनुरोध भी किया जा सकता है।
नागरिकों को आवेदन करने से पहले संबंधित फॉर्म के नवीनतम निर्देश और पात्रता शर्तें निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लेनी चाहिए।
मतदाताओं को अभी क्या करना चाहिए?
एसएसआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले और प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- अपनी मौजूदा मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरण जांचें।
- घर-घर सत्यापन के दौरान बूथ स्तर अधिकारी को सही जानकारी उपलब्ध कराएं।
- नाम सूची में दर्ज नहीं होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भरें।
- नाम या पते में गलती होने पर फॉर्म 8 के जरिए सुधार का अनुरोध करें।
- किसी नाम को हटाने या प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए नियमों के अनुसार फॉर्म 7 का उपयोग करें।
- आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति और संबंधित अधिकारी से प्राप्त सूचना पर नजर रखें।
निष्कर्ष
चुनाव आयोग की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र नागरिकों के पंजीकरण का महत्वपूर्ण अवसर है। नवंबर 2026 में प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने और जनवरी 2027 में अंतिम सूची जारी होने के निर्धारित कार्यक्रम के बीच नागरिक अपने नाम और विवरण की जांच कर सकते हैं। समय पर आवेदन करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने से मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
महत्वपूर्ण: पुनरीक्षण की तारीखों, संबंधित राज्यों की सूची और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए चुनाव आयोग तथा संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक सूचनाओं को प्राथमिकता दें।
