भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब के प्रभाव से प्रदेश के मौसम में अचानक बदलाव आया है। कहीं तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है, तो कहीं आसमान में बादल छाए रहने से धूप की तपिश कम हो गई है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना जताई है।

शुक्रवार को ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और गुना समेत 33 जिलों में आंधी और हल्की बारिश की चेतावनी जारी की गई है। दूसरी ओर, बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम का बदला मिजाज जहां लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं खेतों और मंडियों में रखी फसलों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है।
MP Weather Alert: इन 33 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश के 33 जिलों में मौसम बिगड़ने की संभावना है। इन जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
अलर्ट वाले जिले: राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी।
वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, शाजापुर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने की संभावना जताई गई है।
बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
प्रदेश में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलों और मंडियों में खुले में रखी कृषि उपज पर बारिश का असर पड़ने की आशंका है।
पांढुर्णा की मंडी में खुले में रखे मक्के के ढेर बारिश में भीग गए। इससे हजारों क्विंटल मक्का प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में बारिश के कारण धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
रायसेन के दशहरा मैदान में धान लेकर करीब 200 ट्रॉलियों से पहुंचे किसानों को भी अपनी उपज को बारिश से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
गुरुवार को भोपाल, सागर, सिंगरौली, पांढुर्णा, मैहर, दमोह, सीहोर और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई।
हालांकि, मौसम की इस गतिविधि से कुछ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद भी है। तुअर, कपास और संतरे की फसलों के लिए बारिश अनुकूल साबित हो सकती है। इसका वास्तविक असर क्षेत्र, फसल की अवस्था और बारिश की मात्रा पर निर्भर करेगा।
पचमढ़ी में रात का तापमान 15.2 डिग्री, बढ़ने लगी ठंडक
बारिश और बादलों की वजह से प्रदेश के कई शहरों में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर रात के मौसम पर भी दिखाई देने लगा है।
गुरुवार रात दर्ज न्यूनतम तापमान के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार रहे:
- पचमढ़ी: 15.2 डिग्री सेल्सियस
- नौगांव: 15.6 डिग्री सेल्सियस
- अमरकंटक: 16.1 डिग्री सेल्सियस
- खरगोन: 17 डिग्री सेल्सियस
- दमोह: 17 डिग्री सेल्सियस
- धार: 17.1 डिग्री सेल्सियस
तापमान में गिरावट के कारण सुबह और रात के समय ठंडक महसूस होने लगी है। यदि बारिश और बादलों का असर जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान और नीचे जा सकता है।
3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी थी। इसके बावजूद प्रदेश में बारिश का दौर जारी है। इसकी वजह मानसून की सामान्य गतिविधियों से अलग बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात और अन्य मौसमी प्रणालियां हैं, जो वातावरण में नमी बढ़ाकर बारिश के अनुकूल परिस्थितियां बना सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिला है। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में तेज धूप रही, जबकि रात में ठंडक और बीच-बीच में बारिश का दौर देखने को मिला।
मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि इसके बाद बारिश पूरी तरह बंद हो जाती है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसमी प्रणालियां मानसून के बाद भी मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश करा सकती हैं।
इस साल मानसून में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश

मध्य प्रदेश में जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके मुकाबले प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है।
इस तरह पूरे मानसून सीजन में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।
जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश होने का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर पड़ा। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन बाद में मानसून की सक्रियता दो बार कमजोर पड़ गई।
अगले कुछ दिनों तक कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश में 2 नवंबर तक अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कुछ जिलों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना है, जबकि अन्य क्षेत्रों में मौसम साफ रहने के आसार हैं।
किसानों के लिए सलाह: खुले में रखी मक्का, धान और अन्य कृषि उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें। खेतों में तैयार फसल की स्थिति पर नजर बनाए रखें और स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतें।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का उतार-चढ़ाव जारी है। एक ओर तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है, तो दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
