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ग्वालियर के मदरसे में छापेमारी, 7 बच्चियों समेत 22 बच्चे रेस्क्यू; बाल आयोग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई

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Gwalior Madrasa Raid: ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसा दारुल उल कुरान में बाल आयोग, बाल कल्याण समिति, बाल कल्याण विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई की। टीम ने मदरसे में रह रहे 22 बच्चों को रेस्क्यू किया, जिनमें 7 बच्चियां भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों के रहने, पढ़ाई और अन्य सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। वहीं, मदरसे के शिक्षक ने कमियां मिलने पर उन्हें दूर करने की बात कही है।

एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसे में अचानक पहुंची संयुक्त टीम

ग्वालियर। शहर में एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसा दारुल उल कुरान में संयुक्त टीम की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। बाल आयोग, बाल कल्याण समिति, बाल कल्याण विभाग, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मदरसे का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रहे 22 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इनमें 7 बच्चियां भी शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मदरसे में बच्चों के रहने, पढ़ने और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। टीम ने बच्चों से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ उनकी सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की।

रहने और पढ़ाई की व्यवस्थाओं में कमियां मिलने का दावा

बाल आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच के दौरान मदरसे में बच्चों के रहने, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी कुछ कमियां सामने आई हैं। अधिकारियों ने यह भी जांच शुरू की है कि बच्चों को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखा जा रहा था या नहीं।

हालांकि, मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। मदरसे में पाई गई कमियों की प्रकृति और नियमों के कथित उल्लंघन की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्वालियर-चंबल के अलावा राजस्थान के बच्चे भी मिले

अधिकारियों के अनुसार, मदरसे में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अलावा राजस्थान के कुछ बच्चे भी रह रहे थे। संयुक्त टीम बच्चों की पहचान, उनके निवास स्थान और अभिभावकों से संबंधित जानकारी जुटा रही है।

बच्चों को रेस्क्यू किए जाने के बाद उनकी सुरक्षा, देखभाल और आगे की व्यवस्था को लेकर बाल कल्याण समिति आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रही है। साथ ही, अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों से जुड़े दस्तावेजों और उनकी सहमति की भी जांच की जा रही है।

मदरसे के शिक्षक बोले- कमियां हैं तो दूर करेंगे

कार्रवाई के बाद मदरसे से जुड़े लोगों ने व्यवस्थागत कमियां होने की बात स्वीकार की है। मदरसे के शिक्षक मोहम्मद साकिर ने कहा कि यदि कोई कमी पाई गई है तो उसे दूर किया जाएगा।

उन्होंने दावा किया कि मदरसे में रह रहे सभी बच्चे अपने माता-पिता की सहमति से यहां आए थे और पढ़ाई कर रहे थे। मदरसे से जुड़े इस पक्ष की भी जांच की जा रही है कि बच्चों के अभिभावकों की सहमति से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।

बच्चों के परिजनों ने जताई चिंता

मदरसे में प्रशासनिक कार्रवाई और बच्चों को रेस्क्यू किए जाने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में चिंता बढ़ गई। कुछ अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे मदरसे में रहकर पढ़ाई कर रहे थे और उन्हें वहां किसी तरह की परेशानी की जानकारी नहीं थी।

परिजनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है। ऐसे में बच्चों की वर्तमान स्थिति और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है।

बाल आयोग ने बताया- बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई

बाल आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त टीम ने कार्रवाई की है।

उन्होंने बताया कि मदरसे में बच्चों को किन परिस्थितियों में रखा जा रहा था और वहां निर्धारित नियमों का पालन हो रहा था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। जांच के दौरान बच्चों से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल प्रशासन, बाल आयोग और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। बच्चों के अभिभावकों की सहमति, मदरसे में रहने की व्यवस्था, शिक्षा और सुरक्षा से संबंधित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मदरसे में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चों की सुरक्षा और उनके हितों को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रहा है।

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