अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फिर बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही हैं। हाल के दिनों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण महंगाई, रुपये और आर्थिक वृद्धि पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव सीधे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
20 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया, जबकि देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें पिछले करीब एक सप्ताह में अपेक्षाकृत स्थिर बताई गईं। आगे कच्चे तेल और रुपये की चाल घरेलू ईंधन लागत के लिए अहम रहेगी।






