नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब वापसी की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिए थे कि उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी 19 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है। लेकिन इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश की कमी कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बन रही है।

इस मानसून सीजन में बारिश का वितरण काफी असमान रहा। जून में बड़ी कमी के बाद जुलाई अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जबकि अगस्त और सितंबर में फिर कमजोर बारिश देखने को मिली। सितंबर के मध्य तक देश के कई हिस्से वर्षा की कमी से जूझ रहे थे।
कम बारिश का सबसे सीधा असर खेती पर पड़ सकता है। धान, कपास, सोयाबीन और दाल जैसी खरीफ फसलों के लिए मानसूनी बारिश महत्वपूर्ण होती है। बारिश की कमी वाले इलाकों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका खाद्य कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ा सकती है।
हालांकि मानसून की औपचारिक वापसी शुरू होने का अर्थ बारिश का तुरंत पूरी तरह समाप्त होना नहीं है। मौसम प्रणालियों के कारण कई राज्यों में मानसून की वापसी के दौरान भी बारिश और गरज-चमक जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।







