मृदुभाषी, इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने युवाओं के मुद्दों, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, आरक्षण, नक्सलवाद और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे विषयों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इन मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण रखा। बैठक में संगठन के विस्तार और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर भी चर्चा हुई।

होसबाले ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने और व्यवस्था से सवाल पूछने का अधिकार है। उन्हें देशविरोधी मानना उचित नहीं है, लेकिन अराजक तत्वों द्वारा युवाओं को भड़काकर हिंसा और अशांति फैलाना गलत है। उन्होंने युवाओं के साथ सकारात्मक संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।
जेन-जी के सवालों को देशविरोधी नहीं समझना चाहिए
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि नई पीढ़ी में व्यवस्था के प्रति असंतोष और सवाल पूछने की प्रवृत्ति स्वाभाविक है। युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके सवालों को दबाने या उन्हें देशविरोधी मानने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ अराजक शक्तियां युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल कर उन्हें भड़काने और हिंसा फैलाने का प्रयास कर सकती हैं। ऐसी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं। युवाओं के मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने के बजाय उनसे संवाद करना और समस्याओं का समाधान निकालना जरूरी है।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर परिवार और संस्कारों पर जोर
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर होसबाले ने कहा कि केवल कानून बनाकर इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण करना आसान नहीं है। भारत में टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इस तरह की रोक से डिजिटल माध्यमों से जुड़ी सभी चुनौतियों का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि कई देशों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नियम बनाए जा रहे हैं। भारत में भी इस विषय पर चर्चा और नियमन की मांग उठ रही है। हालांकि, संघ का मानना है कि सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए पारिवारिक मूल्यों, संस्कारों और सामाजिक जागरूकता की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आरक्षण को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए
आरक्षण के मुद्दे पर संघ ने कहा कि इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। जिन वर्गों को आरक्षण की आवश्यकता है, उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए। होसबाले के अनुसार आरक्षण एक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद वर्गों को अवसर उपलब्ध कराना है।
संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव, अब बनेंगे 88 संभाग
आरएसएस ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की घोषणा की है। अब क्षेत्रीय व्यवस्था को समाप्त कर संगठन का काम 88 संभागों के माध्यम से संचालित करने की योजना है। संभाग स्तर पर ही संगठनात्मक जिम्मेदारियों और नियुक्तियों की व्यवस्था की जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य संगठन के कामकाज को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित करना और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया संगठनात्मक चुनाव और नई समितियों के गठन के बाद आगे बढ़ेगी।
एक लाख नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने की योजना
होसबाले ने संगठन के विस्तार की योजना का भी उल्लेख किया। संघ देशभर में एक लाख नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने की दिशा में काम करेगा। इन शाखाओं का स्वरूप केवल दैनिक नहीं होगा, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार साप्ताहिक या पाक्षिक मिलन के रूप में भी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं।
संघ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 1,01,151 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन और अन्य गतिविधियों को मिलाकर संघ का कार्य लगभग 1,10,849 स्थानों तक पहुंच चुका है। संगठन की योजना इन गतिविधियों का विस्तार करने और नई शाखाओं को नियमित व प्रभावी बनाने की है।
शताब्दी वर्ष में हुए बड़े स्तर पर सामाजिक कार्यक्रम
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में सामाजिक संपर्क और जनभागीदारी से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। संघ के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों सहित देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
युवाओं के बीच भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा सामाजिक नेतृत्व से जुड़े लोगों, विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया गया। बैठक में इन कार्यक्रमों की समीक्षा और आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
एसआईआर पर क्या बोले दत्तात्रेय होसबाले?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर होसबाले ने कहा कि मतदाता का नाम उसी स्थान की मतदाता सूची में होना चाहिए, जहां वह वास्तव में रहता है।
उन्होंने गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने को देश की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं बताया। संघ का कहना है कि मतदाता सूची में सही और पात्र मतदाताओं का नाम दर्ज होना जरूरी है।
विदेशों में स्वयंसेवक, लेकिन संगठन का विस्तार भारत तक सीमित
संघ के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को लेकर होसबाले ने स्पष्ट किया कि दुनिया के कई देशों में आरएसएस के स्वयंसेवक मौजूद हैं, लेकिन संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शाखाओं या संगठनात्मक ढांचे का विस्तार करने की योजना नहीं बना रहा है।
उन्होंने कहा कि संघ का कार्यक्षेत्र भारत की भौगोलिक सीमाओं तक ही सीमित रहेगा। विदेशों में रहने वाले स्वयंसेवकों की मौजूदगी के बावजूद संगठन का औपचारिक विस्तार भारत के भीतर ही रहेगा।
निष्कर्ष
इंदौर की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में आरएसएस ने युवाओं से संवाद, सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल, आरक्षण, एसआईआर और संगठनात्मक विस्तार जैसे मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण रखा। साथ ही 88 संभागों के नए ढांचे और एक लाख नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने की योजना से संगठन के आगामी विस्तार की दिशा भी सामने आई है।
