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दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली आज: ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ के नारे के साथ जुटेंगे विपक्षी दल

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली। कांग्रेस, सपा और TMC समेत विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार, SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठाए सवाल। भाजपा ने किया पलटवार।

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HIGHLIGHTS

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली। कांग्रेस, सपा और TMC समेत विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार, SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठाए सवाल। भाजपा ने किया पलटवार।

मृदुभाषी, डेस्क नई दिल्ली। देश की चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहे विपक्षी दलों ने रविवार को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन किया है। ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ के नाम से आयोजित इस रैली में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत INDIA गठबंधन के कई घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। रैली के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदान के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए SIR प्रक्रिया का बचाव किया है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष का सवाल

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने रैली के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने की है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों को शामिल करते हुए पहले भी मॉक महाभियोग की प्रक्रिया आयोजित की गई थी।

भगत ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर जिम्मेदारी है, उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके मुताबिक, आज की रैली वास्तव में जनता की आवाज है और इसे जनता का अपना आंदोलन माना जाना चाहिए।

10 लाख लोगों के जुटने का दावा, संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा का मुद्दा

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राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि INDIA गठबंधन के नेतृत्व में 10 लाख से अधिक लोग दिल्ली में एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में आयोजित यह प्रदर्शन संविधान, देश और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए है।

डोटासरा ने दावा किया कि दिल्ली ने अपने इतिहास में इतनी बड़ी रैली नहीं देखी होगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण आंदोलन बताते हुए भाजपा और NDA के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष तेज करने की बात कही।

भाजपा ने SIR का किया बचाव, विपक्ष से पूछा- पहले और अब की प्रक्रिया में अंतर क्या?

विपक्ष की रैली और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए. शारदा देवी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पहली बार नहीं हो रहा है। करीब 20 साल बाद यह प्रक्रिया दोबारा की जा रही है, जबकि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी इस तरह के पुनरीक्षण हुए हैं।

उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि पहले कराए गए SIR और वर्तमान प्रक्रिया में आखिर क्या अंतर है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

अशोक गहलोत का आरोप- असहमति को भी नहीं किया जा रहा बर्दाश्त

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आज असहमति की आवाज को स्वीकार नहीं किया जा रहा और सवाल उठाने वालों को देशद्रोही तक करार दिया जाता है।

गहलोत ने न्यायपालिका, जांच एजेंसियों और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव होने का आरोप लगाया। उन्होंने युवा और जेन-जी पीढ़ी से कांग्रेस और भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों के बयानों की तथ्यों के आधार पर पड़ताल करने की अपील की। उनका कहना था कि इतिहास का अध्ययन और सच्चाई के साथ खड़ा होना ही देश की सेवा का सही रास्ता है।

प्रियंका गांधी ने देर रात पहुंचकर तैयारियों का लिया जायजा

रामलीला मैदान में होने वाली महारैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी सक्रिय नजर आईं। वह देर रात कार्यक्रम स्थल पहुंचीं और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। रविवार सुबह मैदान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सेवादल के सदस्यों की सक्रियता दिखाई दी। ठंड के बावजूद कार्यकर्ता बड़ी संख्या में आयोजन की तैयारियों में जुटे रहे।

अर्जुन राम मेघवाल ने रैली की तारीख पर उठाए सवाल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष की रैली के आयोजन और उसकी तारीख को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन के कुछ सहयोगी दल भी इस तारीख पर प्रदर्शन के पक्ष में नहीं हैं।

मेघवाल ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में हुए सिख विरोधी अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 नवंबर की तारीख संवेदनशील है। उन्होंने राहुल गांधी पर संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सिख प्रतिनिधियों और दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने दिवाली के व्यस्त कारोबारी समय को देखते हुए रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि लाखों लोगों की मौजूदगी से बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है और दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कई राज्यों के दिग्गज नेता दिल्ली पहुंचे

महारैली में भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से विपक्षी दलों के नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी चर्चा में है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की संभावित भागीदारी को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता शारदवत मुखर्जी ने ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच राजनीतिक नजदीकी पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राजनीतिक सहारा देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।

अभिषेक बनर्जी पर भी भाजपा नेता की विवादित टिप्पणी

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर पूछे गए सवाल पर शारदवत मुखर्जी ने बेहद तीखी और व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने अभिषेक बनर्जी के बयानों पर भरोसा नहीं करने की बात कहते हुए उनकी तुलना भगोड़े अपराधी दाऊद इब्राहिम से कर दी। उनके इस बयान से राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सियासी संघर्ष तेज

रामलीला मैदान की यह महारैली ऐसे समय हो रही है, जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।

विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का आंदोलन बता रहा है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक विरोध का हिस्सा मान रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि महारैली में विपक्षी दल आगे की रणनीति को लेकर क्या घोषणा करते हैं और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने के लिए उनका अगला कदम क्या होगा।

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