मृदुभाषी डेस्क। असम में बाल विवाह के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। राज्यव्यापी अभियान के तहत अब तक 565 लोगों की गिरफ्तारी और 481 मामले दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नाबालिग बच्चियों का विवाह कराने, इसमें सहयोग देने या इस गैरकानूनी प्रथा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की कार्रवाई केवल कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों से विवाह करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि विवाह कराने और उसमें सहयोग देने के आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
524 से बढ़कर 565 हुई गिरफ्तारियां, अभियान जारी
असम में बाल विवाह के खिलाफ पुलिस अभियान ने तेजी पकड़ ली है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि राज्य में अब तक 565 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 481 मामले दर्ज हुए हैं।
इससे पहले मंगलवार शाम पांच बजे तक 524 गिरफ्तारियों और 441 मामलों की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही और गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़कर 565 तक पहुंच गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकार का लक्ष्य केवल गिरफ्तारियां करना नहीं, बल्कि बाल विवाह की प्रथा को जड़ से समाप्त करना है। उनका संदेश है कि बेटियों के सपनों, शिक्षा और भविष्य के साथ समझौता करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
श्रीभूमि में रातभर चला अभियान, 32 आरोपी गिरफ्तार
बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई के दौरान श्रीभूमि जिले में पुलिस ने 26 अक्टूबर की रात विशेष अभियान चलाया। इस दौरान 28 मामले दर्ज किए गए और 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रणब ज्योति कलिता के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 28 ऐसे आरोपी शामिल हैं जिन पर बाल विवाह में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है। वहीं, चार अन्य पर विवाह कराने या इसमें सहायता देने का आरोप लगाया गया है।
सभी आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने मामलों की जरूरत के अनुसार आरोपियों की हिरासत भी मांगी। अलग-अलग मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह कार्रवाई संकेत देती है कि पुलिस बाल विवाह के मामलों में केवल विवाह करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कथित रूप से इसमें सहयोग देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
धुबरी जिले में भी पुलिस की बड़ी कार्रवाई
असम के धुबरी जिले में भी अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जिले के नौ थाना क्षेत्रों में कुल 63 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें बाल विवाह में कथित रूप से शामिल लोग और ऐसे मामलों में भूमिका निभाने के आरोप झेल रहे माता-पिता तथा अभिभावक भी शामिल हैं।
पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई इस प्रकार रही:
- धुबरी सदर थाना क्षेत्र से 18 लोग
- गौरिपुर से 8 लोग
- गोलकगंज से 15 लोग
- अगोमोनी से 1 व्यक्ति
- तमरहाट से 2 लोग
- बिलासीपाड़ा से 9 लोग
- चापर से 5 लोग
- फकीरगंज से 5 लोग
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस अभियान जिले के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
नगांव में 43 गिरफ्तार, 36 मामले दर्ज
नगांव जिले में भी पुलिस ने बाल विवाह के मामलों में कार्रवाई तेज की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां 43 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 36 मामले दर्ज किए गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में 22 ऐसे पति शामिल हैं जिन पर नाबालिग लड़कियों से विवाह करने का आरोप है। शेष 21 लोगों पर कथित तौर पर इन विवाहों में सहयोग देने का आरोप लगाया गया है।
ढिंग थाना क्षेत्र से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार कथित पति और चार सहयोगी बताए गए हैं। वहीं, नगांव थाना क्षेत्र से सात गिरफ्तारियां हुईं। इनमें छह कथित पति और एक अन्य आरोपी शामिल बताया गया है।
मामलों की जांच के दौरान पुलिस संबंधित साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
बाल विवाह निषेध कानून और POCSO के तहत कार्रवाई
बाल विवाह के मामलों में पुलिस बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी POCSO और लागू अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, किसी मामले में कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार तय होता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रभावित बच्चियों की काउंसलिंग और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चिकित्सकीय जांच भी कराई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाल विवाह रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। बच्चियों की शिक्षा जारी रखना, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, परिवारों में जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद परिवारों को सहायता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पहले भी चला था अभियान, अब फिर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार इससे पहले भी असम में बाल विवाह के खिलाफ व्यापक अभियान चला चुकी है। उस दौरान भी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई थीं और कथित रूप से बाल विवाह में शामिल पतियों, परिवार के सदस्यों तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
मौजूदा अभियान को सरकार की उसी नीति की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत बाल विवाह को पारिवारिक सहमति या सामाजिक परंपरा के नाम पर स्वीकार करने से इनकार किया गया है।
यह मुद्दा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। बाल विवाह जहां भी होता है, वहां नाबालिगों के अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है।
विपक्ष ने भी कार्रवाई का समर्थन किया
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने भी बाल विवाह में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई को उचित बताया है। इसे बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर राजनीतिक स्तर पर समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का कहना है कि अभियान में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अब आगे की कार्रवाई, जांच और अदालतों में चलने वाली कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
क्या केवल गिरफ्तारियों से खत्म हो जाएगा बाल विवाह?
असम में 565 गिरफ्तारियों और 481 मामलों का आंकड़ा सरकार के अभियान का दायरा जरूर दिखाता है, लेकिन बाल विवाह की समस्या के स्थायी समाधान का आकलन केवल गिरफ्तारियों से नहीं किया जा सकता।
असली सफलता तब होगी, जब नाबालिग बच्चियों के विवाह रोके जा सकें, उन्हें शिक्षा और सुरक्षा मिले, कानून के तहत मामलों की प्रभावी जांच हो और दोष सिद्ध होने पर न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल असम सरकार का संदेश स्पष्ट है—बाल विवाह के मामलों में कानून के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस अभियान के साथ-साथ समाज में ऐसा स्थायी बदलाव कितना आता है, जिससे हर बच्ची को अपना बचपन जीने, पढ़ने और अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अवसर मिल सके।