मृदुभाषी डेस्क, उज्जैन। मां की ममता का कोई मोल नहीं होता, लेकिन जब एक बेटा अपनी मां की सलामती और लंबी उम्र के लिए हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा का संकल्प ले ले, तो यह प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल बन जाती है, जो हर किसी को भावुक कर देती है। बिहार के पटना जिले की चिल्बिली पंचायत के 19 वर्षीय मोनू राज चौहान इन दिनों अपनी इसी अनूठी भक्ति और मातृ-सेवा के संकल्प को लेकर चर्चा में हैं। मां के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के साथ 15 हजार किलोमीटर की धार्मिक यात्रा पर निकले मोनू राज 236 दिनों की लगातार दौड़ और पैदल यात्रा पूरी कर धर्मनगरी उज्जैन पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
मां की बीमारी ने बेटे को दिलाया कठिन संकल्प
मोनू राज की इस असाधारण यात्रा के पीछे मां के प्रति उनका गहरा प्रेम और एक भावुक कर देने वाली कहानी है। कुछ वर्ष पहले उनकी मां के गले में मछली का कांटा फंस गया था, जिसके बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। परिवार ने मां के इलाज के लिए छह वर्षों तक काफी प्रयास किए। महंगे उपचार और भारी कर्ज के बावजूद जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो मोनू ने भगवान शिव की शरण ली।
उन्होंने अपने घर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित एक शिव मंदिर में मन्नत मांगी कि यदि उनकी मां पूरी तरह स्वस्थ हो जाती हैं, तो वे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धामों की दौड़ते हुए पैदल यात्रा करेंगे। मां की सेहत में सुधार होने के बाद मोनू ने अपने संकल्प को पूरा करने का फैसला किया और 15 मार्च 2026 को इस कठिन यात्रा की शुरुआत कर दी।
236 दिनों से जारी है आस्था और संकल्प का सफर
सोशल मीडिया पर ‘ब्लैक पैंथर’ के नाम से पहचाने जाने वाले मोनू राज अब तक लगातार 236 दिनों की यात्रा पूरी कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों और ज्योतिर्लिंगों में दर्शन किए हैं।
अपनी यात्रा के दौरान वे बाबा बैद्यनाथ, जगन्नाथ पुरी, मल्लिकार्जुन, रामेश्वरम, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, परली वैजनाथ, औंढा नागनाथ और ओंकारेश्वर सहित अनेक तीर्थस्थलों तक पहुंचे।
उज्जैन पहुंचने पर मोनू ने सबसे पहले प्राचीन शनि मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने भगवान शिव से अपनी मां के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की।
‘पढ़ा-लिखा नहीं हूं, लेकिन माता-पिता की सेवा करना जानता हूं’
अपनी यात्रा के उद्देश्य और संकल्प के बारे में मोनू राज कहते हैं, ”मैं बहुत पढ़ा-लिखा नहीं हूं, लेकिन माता-पिता और अपने धर्म की सेवा करना अच्छी तरह जानता हूं।” उनके ये शब्द बताते हैं कि उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का सफर नहीं, बल्कि मां के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और अपने वचन को निभाने का प्रयास भी है।
अब गुजरात के ज्योतिर्लिंगों की ओर बढ़ेंगे कदम
बाबा महाकाल के दर्शन और उज्जैन में श्रद्धालुओं से मिले स्नेह के बाद मोनू राज अब अपनी अगली मंजिल गुजरात की ओर रवाना होने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धामों की यात्रा का संकल्प पूरा करना है।
आज के दौर में जहां अक्सर रिश्तों में स्वार्थ और अपेक्षाओं की चर्चा होती है, वहीं 19 वर्षीय मोनू राज चौहान की यह यात्रा याद दिलाती है कि माता-पिता के प्रति प्रेम केवल शब्दों से नहीं, बल्कि समर्पण और जिम्मेदारी से भी व्यक्त होता है। मां की खुशहाली के लिए हजारों किलोमीटर का यह सफर निश्चित ही मातृ-भक्ति की एक प्रेरक मिसाल है।


