Mradubahshi | Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत पर लोकायुक्त ने वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के निवास पर मंगलवार सुबह छापेमारी की। सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई में अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन और बीमा पॉलिसियों से जुड़ी जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त की शुरुआती जांच के अनुसार, अधिकारी की कुल आय करीब 1.03 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि खर्च लगभग 3.78 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच में सामने आया खर्च उनकी कुल आय का करीब 264.64 प्रतिशत है। फिलहाल लोकायुक्त की टीमें संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
1.03 करोड़ की आय, 3.78 करोड़ का खर्च; कैसे बढ़ीं मुश्किलें?
लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आए शुरुआती आंकड़े मामले को महत्वपूर्ण बना रहे हैं। जांच के मुताबिक, मनीष कुमार जैन की कुल आय करीब 1.03 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि उनके द्वारा करीब 3.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी मिली है।
इस तरह शुरुआती गणना में खर्च और आय के बीच लगभग 2.75 करोड़ रुपये का अंतर सामने आता है। हालांकि, यह अंतर अपने आप में अवैध संपत्ति का अंतिम प्रमाण नहीं है। संपत्तियों के वैध स्रोत, पारिवारिक आय और अन्य वित्तीय विवरणों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और उसका स्रोत क्या था।
जबलपुर से भोपाल तक संपत्तियों की जानकारी
छापेमारी के दौरान अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर जमीन और मकान होने की जानकारी सामने आई है।
लोकायुक्त के मुताबिक, मनीष कुमार जैन के नाम पर जबलपुर में 278.74 वर्गमीटर का भूखंड मिला है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है।
वहीं, उनकी पत्नी निधि जैन के नाम पर भी जबलपुर में भूखंड होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा भोपाल में पत्नी के नाम पर 180 वर्गमीटर जमीन पर बना बंगला और एक फ्लैट होने की बात सामने आई है। पत्नी के नाम पर 402.41 वर्गमीटर का एक अन्य भूखंड भी दर्ज बताया गया है।
इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद की तारीख, मूल्य और भुगतान के स्रोत से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
परिवार के सदस्यों के नाम पर भी मकान और भूखंड
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में अधिकारी के परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्तियों का विवरण भी सामने आया है।
जांच के अनुसार, अधिकारी की मां शशि जैन के नाम पर सागर जिले के बंडा में 92.93 वर्गमीटर के भूखंड पर मकान होने की जानकारी मिली है।
वहीं, अधिकारी के पिता कोमलचंद जैन के नाम पर भी बंडा में दो भूखंडों पर मकान बनाए जाने की बात सामने आई है।
लोकायुक्त की टीम इन संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संपत्तियां कब खरीदी गईं, उनके निर्माण पर कितना खर्च हुआ और उनके लिए धन की व्यवस्था किस प्रकार की गई।
कार, स्कूटर और बीमा पॉलिसियों पर भी जांच
जांच के दायरे में केवल जमीन और मकान ही नहीं, बल्कि वाहन और बीमा पॉलिसियां भी शामिल हैं।
लोकायुक्त के अनुसार, अधिकारी की पत्नी के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस स्कूटर खरीदे जाने की जानकारी मिली है। दोनों वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 5.10 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अलावा अधिकारी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों के लिए करीब 33.93 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब जांच एजेंसी इन खर्चों और संपत्तियों को अधिकारी की ज्ञात आय तथा अन्य वैध वित्तीय स्रोतों से जोड़कर देखेगी।
शिकायत के सत्यापन के बाद दर्ज हुआ मामला
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले को मनीष कुमार जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी।
शिकायत का सत्यापन निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया ने किया। शुरुआती जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद 27 अक्टूबर की सुबह अधिकारी के जबलपुर स्थित निवास पर छापेमारी कर जांच शुरू की गई।
कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश और पुलिस उपमहानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की जा रही है।
अब किन बिंदुओं पर होगी जांच?
लोकायुक्त की टीम फिलहाल संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। आगे की जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
- अधिकारी और परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों का सत्यापन।
- जमीन, मकान और फ्लैट की खरीद तथा निर्माण पर हुए खर्च का आकलन।
- वाहनों और बीमा पॉलिसियों पर किए गए भुगतान की जांच।
- संपत्तियों के लिए धन के स्रोत और वैध आय का मिलान।
- ज्ञात आय और कुल खर्च के बीच अंतर का विस्तृत आकलन।
जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
जबलपुर में लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने वाणिज्यिक कर अधिकारी की संपत्तियों को लेकर जांच तेज कर दी है। शुरुआती आंकड़ों में आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आने के बाद अब एजेंसी दस्तावेजों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
फिलहाल छापेमारी और जांच जारी है। संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, धन के स्रोत और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में अंतिम निष्कर्ष आने तक संबंधित अधिकारी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
