Mradubhashi | Sultanpur News: Rahul Gandhi Convoy Accident | कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के सुल्तानपुर दौरे के दौरान सोमवार सुबह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनके काफिले की कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसा कूरेभार के पास 89.5 माइलस्टोन पर हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार के कारण गाड़ियां आपस में भिड़ गईं। हादसे में कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर है, जबकि राहुल गांधी सुरक्षित हैं। राहुल गांधी अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होने पहुंचे हैं। इस मामले में अदालत सोमवार को फैसला सुना सकती है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा, राहुल गांधी सुरक्षित
राहुल गांधी सोमवार सुबह दिल्ली से लखनऊ पहुंचे थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, राज्यसभा में उपनेता प्रमोद तिवारी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राहुल गांधी सड़क मार्ग से सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए।
सुल्तानपुर जाते समय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनके काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शुरुआती जानकारी में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की बात सामने आई है। हालांकि, राहुल गांधी सुरक्षित बताए गए हैं।
मानहानि मामले में आज आ सकता है फैसला
राहुल गांधी सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में भाजपा नेता विजय मिश्रा की ओर से दर्ज कराए गए मानहानि मामले में पेश होने पहुंचे हैं। शिकायतकर्ता ने अगस्त 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप है कि राहुल गांधी ने 8 मई 2018 को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कार्यवाही की गई है। धारा 499 मानहानि को परिभाषित करती है, जबकि धारा 500 में मानहानि के लिए दंड का प्रावधान है।
राहुल गांधी के वकील बोले- न्याय मिलने का पूरा भरोसा
राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने कहा कि मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में निर्णय के लिए सूचीबद्ध है। लंबे इंतजार के बाद फैसला आने का समय आया है। उन्होंने भरोसा जताया कि राहुल गांधी को न्याय मिलेगा और उन्हें बाइज्जत बरी किया जाएगा।
वहीं, शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के वकील संतोष कुमार पांडे के मुताबिक, मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में तीन गवाह पेश किए गए थे। 12 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 26 अक्टूबर को फैसले की तारीख निर्धारित की।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राहुल गांधी की पेशी को देखते हुए सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट और दीवानी न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अदालत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
सुरक्षा के मद्देनजर न्यायालय परिसर में आने वाले फरियादियों को बाहर ही कतार में खड़ा किया जा रहा है। लोगों को जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कूरेभार के पास कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी के स्वागत के लिए जुटे थे। इस दौरान पूर्व मंत्री ओपी सिंह के करीब 400 गाड़ियों के काफिले और लगभग 4,000 लोगों के साथ पहुंचने की जानकारी सामने आई, जिसे कांग्रेस की ओर से शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
सीडी और वॉइस सैंपल को लेकर भी हुई कानूनी लड़ाई
मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अदालत में एक सीडी पेश की गई थी। इसमें मौजूद आवाज का राहुल गांधी के वॉइस सैंपल से फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के माध्यम से मिलान कराने की मांग की गई थी।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने 2 मई 2026 को इस मांग से संबंधित अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने सेशन कोर्ट का रुख किया, जहां 15 जुलाई 2026 को भी अर्जी खारिज कर दी गई। इसके बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सितंबर 2026 में वॉइस सैंपल के मिलान से संबंधित याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसके बाद मामले में अंतिम बहस की कार्यवाही आगे बढ़ी और अब अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।
2023 में भी मानहानि मामले में गई थी राहुल गांधी की सदस्यता
राहुल गांधी इससे पहले भी मानहानि के एक अन्य मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। 23 मार्च 2023 को गुजरात के सूरत की अदालत ने मोदी उपनाम संबंधी टिप्पणी के मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। इसके अगले दिन उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। उस समय राहुल गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद थे।
बाद में सुप्रीम कोर्ट से सजा पर रोक मिलने के बाद उनकी संसद सदस्यता बहाल कर दी गई थी। हालांकि, सूरत का मामला और सुल्तानपुर में अमित शाह से जुड़ा मानहानि मामला अलग-अलग हैं।
फिलहाल सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले का इंतजार है। अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि भाजपा नेता विजय मिश्रा की शिकायत पर वर्षों से चल रहे इस मामले में आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है।