---Advertisement---

Dhar Lokayukta Trap: 20 हजार की रिश्वत में फंसा लाइनमैन, 15 हजार पहले लिए; 4 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ाया

---Advertisement---

Dhar News: किसान से अस्थाई बिजली कनेक्शन स्थाई कराने के बदले मांगी थी रिश्वत; 10 हजार रुपये नकद और 5 हजार ऑनलाइन लेने का आरोप, लोकायुक्त ने बिजली कंपनी के कार्यालय में बिछाया जाल।

धार। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। धार जिले के बदनावर में लोकायुक्त टीम ने मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के ग्रामीण कार्यालय में पदस्थ एक लाइनमैन को कथित तौर पर 4,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोप है कि लाइनमैन ने एक किसान के पिता के नाम दर्ज अस्थाई बिजली कनेक्शन को स्थाई कराने के बदले 20,000 रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह पहले ही 15,000 रुपये दे चुका था। शेष रकम के लिए दबाव बनाए जाने के बाद किसान ने लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई से बिजली कंपनी के कार्यालय में हड़कंप मच गया। टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद पूरी योजना के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।

तीन महीने पहले मांगी थी 20 हजार रुपये की रिश्वत

लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, बदनावर तहसील के ग्राम बालोदा माझी निवासी किसान राजेश दास (38) अपने पिता के नाम पर दर्ज अस्थाई बिजली कनेक्शन को स्थाई कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बिजली कंपनी के बदनावर ग्रामीण कार्यालय में पदस्थ लाइन परिचालक सौरभ कुमार जैन (35) को आवेदन और आवश्यक दस्तावेज सौंपे थे।

आरोप है कि कनेक्शन स्थाई कराने की प्रक्रिया पूरी करने के बदले लाइनमैन ने करीब तीन महीने पहले किसान से 20,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। किसान को उम्मीद थी कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद उसका काम नियमानुसार पूरा हो जाएगा, लेकिन शिकायत के मुताबिक, उससे काम कराने के बदले रकम की मांग की गई।

पहले 15 हजार रुपये दिए, फिर बाकी रकम के लिए बनाया दबाव

शिकायतकर्ता राजेश दास के मुताबिक, आरोपी लाइनमैन को वह पहले ही 15,000 रुपये दे चुके थे। इसमें 10,000 रुपये नकद और 5,000 रुपये ऑनलाइन माध्यम से दिए जाने की बात शिकायत में सामने आई है।

इसके बावजूद कथित तौर पर शेष रकम की मांग जारी रही। आरोप है कि लाइनमैन बाकी रकम में से 4,000 रुपये लेने के लिए किसान पर दबाव बना रहा था। इससे परेशान होकर किसान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कराने का फैसला किया।

22 अक्टूबर को लोकायुक्त कार्यालय में की शिकायत

किसान राजेश दास ने 22 अक्टूबर को इंदौर स्थित लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिजली कनेक्शन स्थाई कराने के बदले लाइनमैन रिश्वत की मांग कर रहा है और पहले ही बड़ी रकम ले चुका है।

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देश पर शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने के बाद आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाने की तैयारी की गई।

4 हजार रुपये लेते ही लोकायुक्त टीम ने दबोचा

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को लोकायुक्त निरीक्षक सचिन पटेरिया के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने शिकायतकर्ता के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की योजना तैयार की।

योजनानुसार, किसान राजेश दास बदनावर स्थित बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे और आरोपी लाइनमैन को 4,000 रुपये दिए। जैसे ही आरोपी ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। मामले में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

लोकायुक्त टीम में ये अधिकारी रहे शामिल

इस कार्रवाई में लोकायुक्त निरीक्षक सचिन पटेरिया के साथ प्रधान आरक्षक विवेक मिश्रा, आरक्षक आदित्य सिंह भदौरिया, पवन पटोरिया, सतीश यादव और कृष्ण अहिरवार शामिल रहे।

टीम ने शिकायत के सत्यापन से लेकर रिश्वत लेते पकड़े जाने तक की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी की।

सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगे तो यहां करें शिकायत

लोकायुक्त पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई शासकीय अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी काम को करने के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो डरने के बजाय संबंधित लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।

इंदौर संभाग में भी रिश्वत मांगने से जुड़े मामलों की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में की जा सकती है। भ्रष्टाचार के मामलों में समय पर शिकायत मिलने से संबंधित आरोपों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई में मदद मिलती है।

धार के बदनावर में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को सामने लाती है। बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए किसी किसान को कथित तौर पर रिश्वत देने के लिए मजबूर किए जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और कार्रवाई की जाएगी।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a comment