
लाल गेंद से सफेद गेंद तक, एक दिन में 80 ओवर का रोमांच; 14 नवंबर से श्रीलंका में शुरू होगा अनोखा टूर्नामेंट, जहां दोनों टीमों के महिला और पुरुष खिलाड़ियों के रन जुड़कर तय करेंगे हार-जीत
कोलंबो/नई दिल्ली। क्रिकेट में अब तक आपने टेस्ट मैच, वनडे और टी-20 के रोमांच का आनंद लिया होगा। टेस्ट में धैर्य और तकनीक की परीक्षा होती है, वनडे में रणनीति और तेजी का संतुलन देखने को मिलता है, जबकि टी-20 में कुछ ही घंटों में चौकों-छक्कों की बरसात मैच का रुख बदल देती है। लेकिन जरा सोचिए, अगर किसी क्रिकेट मैच में लड़कों और लड़कियों की टीमों के रन अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ जोड़े जाएं और इसी संयुक्त स्कोर से जीत-हार का फैसला हो, तो मुकाबला कितना दिलचस्प होगा? क्रिकेट की दुनिया में इसी अनोखे विचार को हकीकत में बदलने की तैयारी है। इसका नाम है ‘टेस्ट ट्वेंटी’।
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में 14 से 29 नवंबर तक इस नए फॉर्मेट का पहला टूर्नामेंट आयोजित किया जाएगा। मुकाबले सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (एसएससी) में खेले जाएंगे। आयोजकों के मुताबिक, इसे क्रिकेट के चौथे फॉर्मेट के रूप में पेश करने की योजना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लड़कों और लड़कियों की टीमें मैदान पर अपने-अपने मुकाबले खेलेंगी, लेकिन उनकी मेहनत का हिसाब एक ही स्कोरबोर्ड पर रखा जाएगा। यानी एक वर्ग के शानदार प्रदर्शन से टीम को बढ़त मिल सकती है, जबकि दूसरे वर्ग का प्रदर्शन भी उतना ही निर्णायक होगा। यह प्रयोग क्रिकेट की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा में समान भागीदारी का नया विचार जोड़ने जा रहा है।
आखिर क्या है टेस्ट ट्वेंटी, जो क्रिकेट के पुराने नियमों से अलग है?
क्रिकेट में आमतौर पर किसी मैच का परिणाम एक टीम के बनाए गए रनों और दूसरी टीम के प्रदर्शन के आधार पर तय होता है। महिला और पुरुष क्रिकेट के मुकाबले भी अलग-अलग आयोजित किए जाते हैं। लेकिन टेस्ट ट्वेंटी में दोनों वर्गों के प्रदर्शन को एक ही टीम के नतीजे से जोड़ा जाएगा।
इस फॉर्मेट में प्रत्येक महाद्वीपीय टीम में 40 खिलाड़ी होंगे। इनमें 20 लड़के और 20 लड़कियां शामिल होंगी। जब दो टीमें आमने-सामने होंगी, तब एक मुकाबला लड़कों के बीच और दूसरा लड़कियों के बीच खेला जाएगा। दोनों मैचों में बनाए गए रनों को जोड़कर संयुक्त स्कोर तैयार किया जाएगा। इसी कुल स्कोर से विजेता तय होगा।
उदाहरण के लिए, यदि किसी टीम के लड़के अपने मुकाबले में 180 रन बनाते हैं और उसी टीम की लड़कियां 150 रन बनाती हैं, तो टीम का संयुक्त स्कोर 330 रन होगा। यदि विपक्षी टीम के लड़के 170 और लड़कियां 155 रन बनाती हैं, तो उसका कुल स्कोर 325 रन होगा। इस काल्पनिक उदाहरण में पहली टीम पांच रन से आगे रहेगी। असल मुकाबलों में परिणाम निर्धारित करने के लिए आयोजकों के पूरे नियम लागू होंगे, लेकिन यह उदाहरण समझाता है कि दोनों वर्गों का योगदान एक ही परिणाम में कैसे जुड़ेगा।
इस नियम को ‘पैरिटी रूल’ यानी समान भागीदारी का नियम कहा गया है। इसके पीछे विचार यह है कि लड़कों और लड़कियों के प्रदर्शन को टीम की जीत में बराबर महत्व मिले। कोई टीम केवल एक वर्ग के अच्छे प्रदर्शन के भरोसे जीत सुनिश्चित नहीं कर सकेगी। दोनों को अपनी भूमिका निभानी होगी।
160 खिलाड़ी, चार महाद्वीपीय टीमें और दुनिया भर की नजर
टेस्ट ट्वेंटी के पहले संस्करण में 13 से 21 वर्ष की आयु के कुल 160 युवा क्रिकेटर हिस्सा लेंगे। इन खिलाड़ियों का चयन दुनिया के विभिन्न हिस्सों से किया जाएगा और उन्हें चार महाद्वीपीय टीमों में बांटा जाएगा। प्रत्येक टीम में 40 खिलाड़ी होंगे, जिनमें 20 लड़के और 20 लड़कियां शामिल होंगी।
इस हिसाब से टूर्नामेंट में 80 लड़के और 80 लड़कियां हिस्सा लेंगे। यह संख्या इस प्रतियोगिता को केवल एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच का रूप देती है।
आयोजकों के अनुसार, पांच महाद्वीपों से हजारों युवा क्रिकेटरों ने इस प्रतियोगिता के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। खिलाड़ियों को चुनने के लिए लगभग 300 दिनों तक मैदान पर और ऑनलाइन ट्रायल की प्रक्रिया चलाई गई। चयन प्रक्रिया की निगरानी ग्लोबल सिलेक्शन कमेटी ने की, जिसकी अध्यक्षता भारत के क्रिकेट कोच राजकुमार शर्मा कर रहे हैं।
खिलाड़ियों के नामों पर अंतिम मुहर इसी महीने होने वाले ड्राफ्ट के जरिए लगेगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों की उत्सुकता इस बात को लेकर भी रहेगी कि किन देशों और क्षेत्रों के युवा खिलाड़ियों को इन चार टीमों में जगह मिलती है।
एक दिन में 80 ओवर, लेकिन खेलेंगे दो अलग-अलग अंदाज में
टेस्ट ट्वेंटी की दूसरी बड़ी विशेषता इसका मैच प्रारूप है। हर मुकाबला एक ही दिन में कुल 80 ओवर का होगा। हालांकि, इसे पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की तरह कई दिनों तक नहीं खेला जाएगा। इसके बजाय मैच को दो अलग-अलग सत्रों में बांटा जाएगा, जिनमें गेंद, पोशाक और खेलने का माहौल भी बदल जाएगा।
पहले सत्र में 40 ओवर दिन के उजाले में लाल गेंद से खेले जाएंगे। इस दौरान खिलाड़ी पारंपरिक सफेद पोशाक में नजर आएंगे। लाल गेंद और सफेद कपड़ों का यह संयोजन क्रिकेट के पारंपरिक स्वरूप की याद दिलाएगा। इस सत्र में बल्लेबाजों को अपनी तकनीक, गेंदबाजों को लाइन-लेंथ और फील्डिंग टीमों को अनुशासन दिखाने का अवसर मिलेगा।
इसके बाद मुकाबले का दूसरा चरण फ्लडलाइट्स में खेला जाएगा। शेष 40 ओवर सफेद गेंद से होंगे और खिलाड़ी रंगीन जर्सी पहनेंगे। यानी दर्शकों को एक ही दिन में क्रिकेट के दो अलग-अलग दृश्य देखने को मिलेंगे—पहले पारंपरिक लाल गेंद वाला अंदाज और फिर सफेद गेंद के साथ रोशनी में खेला जाने वाला मुकाबला।
इस बदलाव से मैच का माहौल जरूर बदलेगा, लेकिन स्कोर का हिसाब नहीं बदलेगा। पहले सत्र में बने रन दूसरे सत्र में भी जुड़े रहेंगे। स्कोर को दोबारा शून्य से शुरू नहीं किया जाएगा। यही नियम पूरे मुकाबले में निरंतरता बनाए रखेगा और संयुक्त स्कोर को निर्णायक बनाएगा।
टॉस का फैसला भी होगा ज्यादा दिलचस्प
टेस्ट ट्वेंटी में टॉस जीतना केवल बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनने तक सीमित नहीं रहेगा। टॉस जीतने वाली टीम यह भी तय कर सकेगी कि लड़कों का मुकाबला पहले खेला जाएगा या लड़कियों का।
यह फैसला रणनीति के लिहाज से दिलचस्प हो सकता है। कप्तानों को अपनी टीम की ताकत, खिलाड़ियों की तैयारी और मुकाबले की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा। हालांकि, टॉस से मिलने वाला फायदा तभी निर्णायक साबित होगा, जब खिलाड़ी मैदान पर अपने प्रदर्शन से उसे सही साबित कर सकें।
दर्शकों के लिए भी यह व्यवस्था मुकाबले को और रोचक बना सकती है। उन्हें यह देखने की उत्सुकता रहेगी कि कप्तान किस वर्ग के खिलाड़ियों को पहले मैदान पर उतारना पसंद करते हैं और क्या इसका संयुक्त स्कोर पर कोई असर पड़ता है।
क्या एक टीम की लड़कियां लड़कों की खराब शुरुआत की भरपाई कर सकती हैं?
यह सवाल टेस्ट ट्वेंटी को सबसे ज्यादा दिलचस्प बनाता है। क्रिकेट में कई बार किसी टीम की शुरुआत खराब होती है, लेकिन मध्यक्रम के बल्लेबाज या गेंदबाज शानदार प्रदर्शन करके मुकाबले का रुख बदल देते हैं। इस फॉर्मेट में यह संभावना केवल एक ही वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी।
यदि लड़कों के मुकाबले में कोई टीम अपेक्षाकृत कम रन बनाती है, तो लड़कियों के मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन संयुक्त स्कोर को मजबूत कर सकता है। इसी तरह लड़कों का शानदार प्रदर्शन लड़कियों के मुकाबले में बने कम स्कोर के असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि किसी एक वर्ग के प्रदर्शन को कम महत्व दिया जाएगा। इस फॉर्मेट का मूल विचार ही यही है कि दोनों वर्गों के रन जीत या हार में समान योगदान दें। यही कारण है कि खिलाड़ियों को केवल अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि पूरी टीम के संयुक्त परिणाम पर भी ध्यान देना होगा।
इस व्यवस्था से टीम प्रबंधन के सामने भी नई चुनौती होगी। खिलाड़ियों का चयन करते समय केवल व्यक्तिगत प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन करने की क्षमता और टीम के समग्र संतुलन को भी महत्व देना होगा।
एबी डिविलियर्स, मैथ्यू हेडन और क्लाइव लॉयड भी जुड़े
टेस्ट ट्वेंटी को क्रिकेट जगत की कई जानी-मानी हस्तियों का साथ मिला है। इसकी सलाहकार समिति में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व धुरंधर बल्लेबाज एबी डिविलियर्स, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन और वेस्टइंडीज के महान पूर्व कप्तान सर क्लाइव लॉयड शामिल हैं।
इन दिग्गजों का जुड़ना इस नए प्रारूप को क्रिकेट प्रेमियों के बीच पहचान दिलाने में मददगार हो सकता है। इन खिलाड़ियों ने अपने करियर में क्रिकेट के अलग-अलग दौर और प्रारूपों को करीब से देखा है। ऐसे में उनके अनुभव से प्रतियोगिता के संचालन, खेल के विकास और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने से जुड़े पहलुओं को दिशा मिल सकती है।
टूर्नामेंट के संचालन की जिम्मेदारी माइक फोर्डहैम संभाल रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि प्रतियोगिता का उद्देश्य सिर्फ मैच आयोजित करना नहीं, बल्कि युवा क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने और भविष्य में आगे बढ़ने का नया अवसर देना भी है।
संस्थापक गौरव बहिरवानी ने क्यों चुना यह रास्ता?
टेस्ट ट्वेंटी के संस्थापक गौरव बहिरवानी ने इसे क्रिकेट के इतिहास में एक अहम कदम बताया है। उनके मुताबिक, इस फॉर्मेट की कल्पना युवा खिलाड़ियों को अपना टूर्नामेंट और अपना मंच देने के उद्देश्य से की गई थी।
बहिरवानी ने समान भागीदारी के विचार पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल नियमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रसारण और मैचों के समय निर्धारण में भी दिखाई देगा। कुछ मुकाबलों में लड़कियां फ्लडलाइट्स के नीचे प्राइम टाइम में खेलेंगी, जबकि अन्य मुकाबलों में लड़कों को यह अवसर मिलेगा। इस तरह दोनों वर्गों को दर्शकों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलेंगे।
उनका मानना है कि जब लड़के और लड़कियां एक ही टीम के संयुक्त परिणाम के लिए खेलेंगे, तो जीत और हार की जिम्मेदारी भी साझा होगी। यह विचार क्रिकेट के उस पारंपरिक ढांचे से अलग है, जिसमें महिला और पुरुष टीमों की प्रतियोगिताएं आमतौर पर अलग-अलग आयोजित की जाती हैं।
कोलंबो को ही क्यों चुना गया?
इस टूर्नामेंट के लिए श्रीलंका की राजधानी कोलंबो को चुनना भी खास माना जा रहा है। आयोजकों ने श्रीलंका क्रिकेट और सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब के सहयोग के लिए आभार जताया है। श्रीलंका में स्कूली क्रिकेट की मजबूत परंपरा और युवा खिलाड़ियों के प्रति लोगों का उत्साह इस तरह की प्रतियोगिता के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकता है।
सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब का मैदान इस आयोजन का केंद्र होगा, जहां युवा क्रिकेटरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। चार महाद्वीपीय टीमों के बीच मुकाबलों से खिलाड़ियों को अलग-अलग क्रिकेट पृष्ठभूमि वाले साथियों और प्रतिद्वंद्वियों के साथ खेलने का अनुभव भी मिल सकता है।
कब शुरू होगा टूर्नामेंट और कहां देख सकेंगे मुकाबले?
टेस्ट ट्वेंटी के पहले संस्करण का उद्घाटन 14 नवंबर को होगा। प्रतियोगिता का समापन 29 नवंबर को फाइनल मुकाबले के साथ होगा, जबकि 30 नवंबर को रिजर्व डे के रूप में रखा गया है। सभी मैच कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित किए जाने हैं।
आयोजकों के अनुसार, टूर्नामेंट के सभी मुकाबलों का लाइव प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। इससे भारत सहित अन्य देशों के क्रिकेट प्रेमियों को इस नए प्रारूप को देखने का अवसर मिल सकता है। प्रसारण के समय और उपलब्ध चैनलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए दर्शकों को आयोजकों तथा प्रसारणकर्ता की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
क्या टेस्ट ट्वेंटी क्रिकेट का चौथा बड़ा फॉर्मेट बन पाएगा?
टेस्ट ट्वेंटी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह प्रयोग क्रिकेट प्रेमियों के बीच लोकप्रियता हासिल कर पाएगा। किसी नए प्रारूप की सफलता केवल उसके अनोखे नियमों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए प्रतिस्पर्धा का स्तर, खिलाड़ियों की गुणवत्ता, मैचों का रोमांच, दर्शकों की दिलचस्पी और प्रसारण की पहुंच भी महत्वपूर्ण होती है।
टेस्ट ट्वेंटी की खासियत यह है कि इसमें लड़के और लड़कियां अलग-अलग मुकाबले खेलते हुए भी एक ही टीम की जीत के लिए योगदान देंगे। इससे महिला और पुरुष क्रिकेट के प्रदर्शन को एक साझा परिणाम में देखने का अवसर मिलेगा। साथ ही, युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए नया मंच उपलब्ध हो सकता है।
लेकिन यह भी देखना होगा कि संयुक्त स्कोरिंग प्रणाली मैदान पर कितनी प्रभावी साबित होती है, कप्तान किस तरह रणनीति बनाते हैं और दर्शक इस नए प्रयोग को कितना पसंद करते हैं। टूर्नामेंट के पहले संस्करण के परिणाम ही इस प्रारूप के भविष्य की दिशा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।