नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि वे आखिर उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर सकते। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने का समय मांगा था, जिसे CJI ने ठुकरा दिया।
विपक्ष को मुलाकात का समय न देने के पीछे CJI ने बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी कारण बताए हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की 4 मुख्य वजहें:
- SIR और CEC से जुड़े मामले पहले से ही कोर्ट में लंबित
CJI ने विपक्ष को भेजे गए अपने जवाब में स्पष्ट किया कि वे जिन मुद्दों (जैसे SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मामले) को उठाना चाहते हैं, वे सभी मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन और लंबित हैं। - प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर सकती अदालत
संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए CJI ने साफ किया कि अदालत प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की शिकायतों पर सीधे संज्ञान नहीं ले सकती। किसी भी मामले में कार्रवाई के लिए उचित न्यायिक प्रक्रिया का ही पालन करना होगा। - याचिका दायर करें, मंगलवार को सुनवाई के लिए कर देंगे सूचीबद्ध
CJI ने विपक्ष को सुझाव दिया कि वे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक याचिका दायर कर सकते हैं। उन्होंने यहां तक आश्वस्त किया कि यदि सोमवार को याचिका दायर की जाती है, तो उसे मंगलवार को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया जाएगा, क्योंकि उस दिन पहले से लंबित संबंधित मामलों पर भी सुनवाई होनी है। - मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट के दरवाजे हमेशा खुले
CJI ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के लिए खुले हैं। कोर्ट कानून के मुताबिक उनकी समस्याएं सुनेगा, लेकिन इसके लिए ज्ञापन या प्रशासनिक मुलाकात की बजाय न्यायिक मार्ग (याचिका) अपनाना जरूरी है।
CJI के इनकार के बावजूद आज ‘चलो दिल्ली-मार्च’
चीफ जस्टिस की ओर से मुलाकात की अर्जी ठुकराए जाने के बाद भी विपक्षी दलों ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का बड़ा ऐलान किया है। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली-मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी ने जानकारी दी है कि इस मार्च में युवा, विपक्षी दल, नागरिक संगठन और संविधान में आस्था रखने वाले तमाम लोग शामिल होंगे। यह मार्च किसी पार्टी या वर्ग विशेष का न होकर, एक भारतीय के रूप में संविधान की रक्षा के लिए निकाला जा रहा है।